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Bageshwar News: भेड़-बकरियों को जानलेवा बीमारी से बचाएगा पीपीआर टीका
Thu, 19 Oct 2023 11:49 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
Updated Thu, 19 Oct 2023 11:49 PM IST
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बागेश्वर। मौसम परिवर्तन के साथ ही जिले में ठंड की शुरुआत हो गई है। बदलते मौसम में भेड़-बकरियों में मानरोग या पीपीआर फैलने का खतरा भी बढ़ने लगता है। भेड़-बकरियों को इस संक्रामक बीमारी लगने से बचाने के लिए पशुपालन विभाग शुक्रवार से वृहद टीकाकरण अभियान शुरू कर रहा है। इसके लिए विभाग को शासन से 95,000 पीपीआर टीके मिल चुके हैं। इन्हें एक महीने के भीतर पशुओं को लगाने का लक्ष्य रखा गया है।
मानरोग या पीपीआर एक संक्रामक बीमारी है, जो ठंड के दिनों में अधिक होती है, हालांकि यह अन्य मौसम में भी असर दिखा सकती है। बीमारी की शुरुआत में भेड़ या बकरी को जुकाम होता है। बाद में तेज बुखार और खूनी दस्त होने लगते हैं।
पशुओं की विषाणु जनित यह बीमारी काफी तेजी से फैलती है। पीपीआर से मृत्यु दर करीब 99 प्रतिशत है। बीमारी के एक सप्ताह के भीतर संक्रमित भेड़, बकरी की मौत हो जाती है। इसलिए इस रोग से भेड़-बकरियों को बचाने के लिए पशुपालन विभाग हर साल ठंड की शुरुआत में टीकाकरण कराता है।
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वर्ष 2020 में हुई पशुगणना के अनुसार जिले में 1,02,075 बकरियां और 20,800 भेड़ थी। हालांकि पैदाइश और मांग के अनुसार इनकी संख्या घटती-बढ़ती रहती है। इसी अनुमान के मुताबिक फिलहाल विभाग को टीके उपलब्ध कराए गए हैं।
सभी भेड़ और बकरियों का टीकाकरण किया जाना जरूरी है। विभाग में कार्मिकों की कमी के कारण टीकाकरण को समय पर पूरा करना बड़ी चुनौती साबित होगी। फिर भी उपलब्ध कराए गए सभी टीके 20 नवंबर तक लगाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए पशु चिकित्सक, पशुधन प्रसार अधिकारी और अन्य कर्मचारी गांव-गांव जाकर टीकाकरण करेंगे। - डॉ. कमल पंत, प्रभारी मुख्य पशुचिकित्साधिकारी, बागेश्वर।
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मानरोग या पीपीआर एक संक्रामक बीमारी है, जो ठंड के दिनों में अधिक होती है, हालांकि यह अन्य मौसम में भी असर दिखा सकती है। बीमारी की शुरुआत में भेड़ या बकरी को जुकाम होता है। बाद में तेज बुखार और खूनी दस्त होने लगते हैं।
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पशुओं की विषाणु जनित यह बीमारी काफी तेजी से फैलती है। पीपीआर से मृत्यु दर करीब 99 प्रतिशत है। बीमारी के एक सप्ताह के भीतर संक्रमित भेड़, बकरी की मौत हो जाती है। इसलिए इस रोग से भेड़-बकरियों को बचाने के लिए पशुपालन विभाग हर साल ठंड की शुरुआत में टीकाकरण कराता है।
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वर्ष 2020 में हुई पशुगणना के अनुसार जिले में 1,02,075 बकरियां और 20,800 भेड़ थी। हालांकि पैदाइश और मांग के अनुसार इनकी संख्या घटती-बढ़ती रहती है। इसी अनुमान के मुताबिक फिलहाल विभाग को टीके उपलब्ध कराए गए हैं।
सभी भेड़ और बकरियों का टीकाकरण किया जाना जरूरी है। विभाग में कार्मिकों की कमी के कारण टीकाकरण को समय पर पूरा करना बड़ी चुनौती साबित होगी। फिर भी उपलब्ध कराए गए सभी टीके 20 नवंबर तक लगाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए पशु चिकित्सक, पशुधन प्रसार अधिकारी और अन्य कर्मचारी गांव-गांव जाकर टीकाकरण करेंगे। - डॉ. कमल पंत, प्रभारी मुख्य पशुचिकित्साधिकारी, बागेश्वर।