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Bageshwar News: स्विटजरलैंड के उर्स स्ट्रोबेल भारतवासियों को पढ़ा रहे वेद, पुराण

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sat, 13 Sep 2025 11:30 PM IST
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Urs Strobel of Switzerland is teaching Vedas and Puranas to Indians
स्वामी आशुतोष।
बागेश्वर। विदेशी होने के बावजूद संस्कृत और हिंदी बोलने वाले कई लोग होंगे लेकिन अपना देश छोड़कर विदेशी संस्कृति और भाषा का संरक्षण करने वाले बिरले ही मिलते हैं। स्विटजरलैंड के उर्स स्ट्रोबेल उर्फ स्वामी आशुतोष ऐसे ही विदेशी नागरिक हैं। अब भारत के नागरिक बन चुके स्वामी आशुतोष के अनामय आश्रम में विद्यार्थियों को वेद, पुराण का ज्ञान दिया जाता है। स्वामी आशुतोष संस्कृत के अच्छे जानकार होने के साथ-साथ हिंदी और कुमाऊंनी भी धाराप्रवाह रूप से बोलते हैं।
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उर्स स्ट्रोबेल को भारत से जोड़ने में महर्षि महेश योगी के भावातीत ध्यान की अहम भूमिका रही। 1973 में स्विटजरलैंड में हुए कार्यक्रम में शामिल होने के बाद स्ट्रोबेल सनातन को समझने के लिए 1976 में भारत आ गए। दिल्ली में एक होटल में रहते हुए उन्होंने हिंदी भाषा सीखी थी। इसके बाद उनका भारत आने-जाने का सिलसिला चलता रहा। 1996 में उन्होंने भारत में रहने के लिए देश ही छोड़ दिया।
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इससे पूर्व वह 1981 में संन्यास धारण कर स्वामी आशुतोष बन गए थे। 2006 में उन्होंने कौसानी में अनामय आश्रम की स्थापना की। वर्तमान में इस आश्रम में 43 विद्यार्थी वैदिक ज्ञान हासिल कर रहे हैं। 2011 में स्वामी आशुतोष को भारत की नागरिकता मिली। उनके आश्रम से विद्यार्थियों को न सिर्फ वैदिक ज्ञान मिल रहा है, बल्कि भाषा, संस्कृति, परंपराओं को सहेजकर रखने की प्रेरणा भी मिल रही है।
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