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उत्तरायणी मेले से लौटने लगे व्यापारी
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वाहनों में सामान लेकर लौटते उत्तरायणी मेले में आए व्यापारी।
- फोटो : BAGESHWAR
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बागेश्वर। उत्तरायणी मेले की समाप्ति के सप्ताहभर बाद अब सभी बाहरी व्यापारी अपने घरों की ओर लौटने लगे हैं। इसके लिए व्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने कई अधिकारियों को ज्ञापन सौंपे थे।
उत्तरायणी मेले के लिए कई दिन पहले से व्यापारी बागेश्वर पहुंचे थे। मेले के दौरान मौसम खराब रहने के कारण भीड़ कम रही। सामान बचने के कारण बाहरी व्यापारी यहीं डटे रहे। इससे स्थानीय व्यापारियों को भी उनका कारोबार मंदा होने की चिंता सताने लगी। इसी कारण उन्होंने 25 जनवरी को मेलाधिकारी एसडीएम राकेश तिवारी को ज्ञापन सौंपा था।
इसके बावजूद मांग पूरी न होने पर उन्होंने सोमवार को हुई जनसुनवाई के दौरान डीएम रंजना राजगुरु को भी सामूहिक रूप से ज्ञापन सौंपकर मेला स्थल से बाहरी व्यापारियों को हटाने की मांग की थी। नुमाइशखेत मैदान में लगे झूले, चरखे भी हटा दिए गए हैं। जिला पंचायत कार्यालय परिसर भी खाली होने लगा है। अब जिला अस्पताल रोड स्थित भोटिया पड़ाव में ही बाहरी व्यापारियों की अधिकतर दुकानें खुली हैं।
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मेले के बहाने परिजनाें से मिलने आए लोग
बागेश्वर। इनमें नई बस्ती निवासी विजय राम ने बताया कि वह कई साल तक मेले में हस्तशिल्प का सामान बेचते थे लेकिन अब 72 साल की उम्र में उनका स्वास्थ्य खराब रहता है। परिजन भी दूसरे कामों में व्यस्त हो गए हैं। इस कारण उन्होंने मेले में दुकान लगाने की बजाय अपने कारोबार को घर तक ही सीमित कर दिया है। इसके बावजूद वह अपने परिचितों से मिलने के लिए मेले में अवश्य आते हैं। वहीं मुनस्यारी से आए नैनराम ने बताया कि वह सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) में 28 साल की सेवा के बाद सेवानिवृत्त हुए थे। अब वह खुद पेंशनर हैं और उनके दोनों बेटे शिक्षक हैं। उनका उत्तरायणी मेले से लगाव रहा है लेकिन अब मेले की समाप्ति पर अधिकतर व्यापारी फुरसत में हैं। इसी कारण वह मेले की शुरुआत में नहीं आए। ब्यूरो
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उत्तरायणी मेले के लिए कई दिन पहले से व्यापारी बागेश्वर पहुंचे थे। मेले के दौरान मौसम खराब रहने के कारण भीड़ कम रही। सामान बचने के कारण बाहरी व्यापारी यहीं डटे रहे। इससे स्थानीय व्यापारियों को भी उनका कारोबार मंदा होने की चिंता सताने लगी। इसी कारण उन्होंने 25 जनवरी को मेलाधिकारी एसडीएम राकेश तिवारी को ज्ञापन सौंपा था।
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इसके बावजूद मांग पूरी न होने पर उन्होंने सोमवार को हुई जनसुनवाई के दौरान डीएम रंजना राजगुरु को भी सामूहिक रूप से ज्ञापन सौंपकर मेला स्थल से बाहरी व्यापारियों को हटाने की मांग की थी। नुमाइशखेत मैदान में लगे झूले, चरखे भी हटा दिए गए हैं। जिला पंचायत कार्यालय परिसर भी खाली होने लगा है। अब जिला अस्पताल रोड स्थित भोटिया पड़ाव में ही बाहरी व्यापारियों की अधिकतर दुकानें खुली हैं।
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मेले के बहाने परिजनाें से मिलने आए लोग
बागेश्वर। इनमें नई बस्ती निवासी विजय राम ने बताया कि वह कई साल तक मेले में हस्तशिल्प का सामान बेचते थे लेकिन अब 72 साल की उम्र में उनका स्वास्थ्य खराब रहता है। परिजन भी दूसरे कामों में व्यस्त हो गए हैं। इस कारण उन्होंने मेले में दुकान लगाने की बजाय अपने कारोबार को घर तक ही सीमित कर दिया है। इसके बावजूद वह अपने परिचितों से मिलने के लिए मेले में अवश्य आते हैं। वहीं मुनस्यारी से आए नैनराम ने बताया कि वह सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) में 28 साल की सेवा के बाद सेवानिवृत्त हुए थे। अब वह खुद पेंशनर हैं और उनके दोनों बेटे शिक्षक हैं। उनका उत्तरायणी मेले से लगाव रहा है लेकिन अब मेले की समाप्ति पर अधिकतर व्यापारी फुरसत में हैं। इसी कारण वह मेले की शुरुआत में नहीं आए। ब्यूरो