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Bageshwar News: नामिक ग्लेशियर बेस कैंप की यात्रा कर लौटा ट्रैकर का दल
Wed, 07 Jun 2023 12:01 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
Updated Wed, 07 Jun 2023 12:01 AM IST
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बागेश्वर। नामिक ग्लेशियर के बेस कैंप ट्रैक पर गया ट्रैकर का दल वापस लौट आया है। दल में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कई जिलों के ट्रैकर शामिल हुए। ट्रैकर ने बिचला दानपुर की लोक कला, संस्कृति, रहन-सहन और खानपान की जानकारी भी जानकारी भी हासिल की। दल में स्थानीय गाइड, पोर्टर और ट्रैकर समेत 26 युवा थे।
नामिक ग्लेशियर ट्रैकिंग का आयोजन वंदे मातरम ग्रुप ने क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से करवाया था। एक जून को हल्द्वानी से ट्रैकर लीती पहुंचे। रात को लीती में बने होमस्टे में ट्रैकर ने रात बिताई। दो जून को ट्रैकर को क्षेत्र में होने वाली आलू और कीवी की खेती दिखाई गई। ट्रैकर ने किसानों से खेती के बारे में जाना। उसी दिन दल गोगिना रवाना हुआ। गोगिना में मशकबीन की धुन पर दल का स्वागत हुआ।
ट्रैकर ने हाईस्कूल गोगिना का भ्रमण कर विद्यार्थियों से क्षेत्र और उनकी शिक्षा के लिए चर्चा की। दोपहर बाद दल पिथौरागढ़ जिले के अंतिम गांव नामिक के लिए रवाना हुआ। चार किमी की पदयात्रा कर दल शाम को नामिक पहुंचा। तीन जून की सुबह नामिक ग्लेशियर बेस कैंप की यात्रा शुरू हुई। दोपहर के समय ट्रैकर 11 किमी चलकर नामिक ग्लेशियर के बेस कैंप पहुंचे और वहां कुछ समय बिताने के बाद वापस नामिक लौट गए।
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पूरे दिन 22 किमी की पदयात्रा के बाद रात को ट्रैकर ने नामिक गांव के होम स्टे में रात बिताई। चार जून की सुबह नामिक गांव का भ्रमण किया और दोपहर बाद गोगिना को रवाना हुए। रास्ते में ट्रैकर ने पनचक्की (घराट) देखा और ट्राउट मछली के उत्पादकों से मिलकर मछली पालन की बारीकियां जानीं। रात को लीती पहुंचने पर दल का ग्रामीणों ने स्वागत किया। ट्रैकर ने ग्रामीणों के साथ पारंपरिक झोड़ा-चांचरी गायन और नृत्य किया। पर्यावरण दिवस पर ट्रैकर ने पौधरोपण कार्यक्रम में भाग लिया और स्थानीय ऑर्गेनिक पहाड़ी उत्पाद खरीदे। शाम को दल वापस हल्द्वानी को लौट गया। यात्रा संयोजक भूपेंद्र सिंह कोरंगा ने बताया कि यात्रा के दौरान ट्रैकिंग रूट में व्यापक स्वच्छता अभियान चलाकर प्लास्टिक कचरा भी एकत्र किया गया।
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नामिक ग्लेशियर ट्रैकिंग का आयोजन वंदे मातरम ग्रुप ने क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से करवाया था। एक जून को हल्द्वानी से ट्रैकर लीती पहुंचे। रात को लीती में बने होमस्टे में ट्रैकर ने रात बिताई। दो जून को ट्रैकर को क्षेत्र में होने वाली आलू और कीवी की खेती दिखाई गई। ट्रैकर ने किसानों से खेती के बारे में जाना। उसी दिन दल गोगिना रवाना हुआ। गोगिना में मशकबीन की धुन पर दल का स्वागत हुआ।
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ट्रैकर ने हाईस्कूल गोगिना का भ्रमण कर विद्यार्थियों से क्षेत्र और उनकी शिक्षा के लिए चर्चा की। दोपहर बाद दल पिथौरागढ़ जिले के अंतिम गांव नामिक के लिए रवाना हुआ। चार किमी की पदयात्रा कर दल शाम को नामिक पहुंचा। तीन जून की सुबह नामिक ग्लेशियर बेस कैंप की यात्रा शुरू हुई। दोपहर के समय ट्रैकर 11 किमी चलकर नामिक ग्लेशियर के बेस कैंप पहुंचे और वहां कुछ समय बिताने के बाद वापस नामिक लौट गए।
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पूरे दिन 22 किमी की पदयात्रा के बाद रात को ट्रैकर ने नामिक गांव के होम स्टे में रात बिताई। चार जून की सुबह नामिक गांव का भ्रमण किया और दोपहर बाद गोगिना को रवाना हुए। रास्ते में ट्रैकर ने पनचक्की (घराट) देखा और ट्राउट मछली के उत्पादकों से मिलकर मछली पालन की बारीकियां जानीं। रात को लीती पहुंचने पर दल का ग्रामीणों ने स्वागत किया। ट्रैकर ने ग्रामीणों के साथ पारंपरिक झोड़ा-चांचरी गायन और नृत्य किया। पर्यावरण दिवस पर ट्रैकर ने पौधरोपण कार्यक्रम में भाग लिया और स्थानीय ऑर्गेनिक पहाड़ी उत्पाद खरीदे। शाम को दल वापस हल्द्वानी को लौट गया। यात्रा संयोजक भूपेंद्र सिंह कोरंगा ने बताया कि यात्रा के दौरान ट्रैकिंग रूट में व्यापक स्वच्छता अभियान चलाकर प्लास्टिक कचरा भी एकत्र किया गया।