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Bageshwar News: गांव छूटा पर उम्मीद नहीं...रोज मवेशियों के पास लाैटते हैं फुंगरा के लोग

Wed, 03 Sep 2025 12:06 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर Updated Wed, 03 Sep 2025 12:06 AM IST
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The village is abandoned but there is no hope...the people of Fungra return to their cattle every day
बागेश्वर। आपदा की मार झेल रहे परिवारों के लिए जीवन पहाड़ जैसा कठिन हो गया है। कभी अपने घर-आंगन में चैन से रहने वाले फुंगरा के लोग पांच किलोमीटर दूर तेजम कस्बे के किराए के कमरों में शरण लिए हुए हैं। गांव से उनका रिश्ता टूटा नहीं है। अपने मवेशियों को अकेले कैसे छोड़ दें। यही वजह है कि रोज सुबह यह लोग गांव लौटते हैं और शाम को फिर तेजम लौट जाते हैं।
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बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिले की सीमा से लगा रमाड़ी गांव भूस्खलन से खतरे की जद में है। कपकोट तहसील क्षेत्र की आबादी आपदा की मार झेल रही है। इससे कलनगढ़ घाटी के अलावा अन्य क्षेत्र भी प्रभावित हैं। रमाड़ी के फुंगरा तोक के पीछे की पहाड़ी से विगत 29 अगस्त से लगातार भूस्खलन हो रहा है। लगातार गिर रहे मलबे और पत्थरों ने सबके जेहन में खाैफ भर दिया है।
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हीरा सिंह, इंद्र सिंह, केदार सिंह और सरिता देवी को घर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा। कभी जिस छत के नीचे आसरा था अब वहां सिर्फ खतरे का साया है। यही नहीं राजेंद्र सिंह और भूपाल सिंह जैसे कई लोगों के परिवार पहले ही गांव छोड़ चुके हैं। गांव छोड़ना जितना कठिन था उससे कहीं ज्यादा दर्दनाक था अपने मवेशियों को पीछे छोड़ जाना। किराए की छत के नीचे मवेशी कैसे रखते।
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इन परिवारों ने पुराने टिन और लकड़ी से छप्पर बनाकर मवेशियों को वहीं सुरक्षित जगह पर रख दिया है। हर रोज सुबह कोई न कोई सदस्य गांव लौटता है ताकि जानवरों को चारा-पानी मिल सके। कई बार तो रात भी वही गुजारनी पड़ती है। तेजम लौटते वक्त आंखें बार-बार गांव की ओर मुड़ जाती हैं।
रमाड़ी की ग्राम प्रधान निर्मला देवी ने बताया कि राजस्व उपनिरीक्षक ने तोक का निरीक्षण किया लेकिन प्रशासन से प्रभावितों को उचित मदद नहीं मिली। राजस्व उप निरीक्षक सुंदर सिंह परिहार ने बताया कि उन्होंने रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को सौंप दी है।

मदद के नाम पर सिर्फ खाद्य सामग्री
प्रभावित परिवारों का कहना है कि प्रशासन की ओर से मदद के नाम पर अब तक केवल कुछ खाद्य सामग्री मिली है। तिरपाल तक उपलब्ध नहीं कराया गया। गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि पिछले साल ही भूस्खलन शुरू हो गया था, लेकिन इस बार हालात बेहद खतरनाक हो चुके हैं। घर टूट चुके हैं। खेत खतरे में और भविष्य अंधेरे में है। प्रभावित परिवार अब स्थायी विस्थापन की मांग कर रहे हैं।
कोट
पहाड़ी से भूस्खलन 2023 में शुरू हो गया था। इस साल हालात बिगड़ हो गए। राजस्व उपनिरीक्षक सुरक्षित स्थान पर जाने का सुझाव देकर चले गए। हमने गांव तो छोड़ दिया लेकिन मवेशियों को लाना मुमकिन नहीं था।
इंद्र सिंह, ग्रामीण

गांव में टिन से छप्पर बनाकर मवेशी रखे हैं। रोजाना सुबह मवेशियों की देखभाल के लिए जाते हैं। रात को एक या दो लोग भी वहीं छप्पर में रात गुजारते हैं। बाकी लोग वापस तेजम लौटते हैं।

केदार सिंह, ग्रामीण

कोट
मानसूनी बारिश से जिले में जहां भी नुकसान हुआ है उसका निरीक्षण कर जरूरी मदद की जा रही है। रमाड़ी गांव के आपदा प्रभावित क्षेत्र की जांच कर जल्द प्रभावितों तक हरसंभव मदद पहुंचाई जाएगी। - आशीष भटगांई, डीएम, बागेश्वर
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