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राममय हुईं भद्रतुंगा की वादियां
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बागेश्वर। कपकोट के भद्रतुंगा और तप्तकुुंड में सरयू जयंती मनाई गई। भद्रतुंगा में भक्तों ने अखंड रामचरित मानस का पाठ किया। वादियों में राम नाम गूंजने से माहौल भक्तिमय हो गया। पारायण पर श्रद्धालुओं ने हवन-यज्ञ कर विधिविधान से मां सरयू की पूजा अर्चना की। नदी को संरक्षित और सुरक्षित रखने के लिए पौधरोपण भी किया गया।
भद्रतुंगा में सरयू जयंती का आयोजन सरमूल, सौधारा, भद्रतुुंगा विकास समिति ने किया। संत देवानंद दास के मार्गदर्शन में बुधवार की शाम से भक्तों ने अखंड रामचरित मानस पाठ की शुरुआत की। बृहस्पतिवार को दोपहर बाद हवन-यज्ञ के साथ रामचरित मानस पाठ का पारायण हुआ। जिसके बाद भक्तों ने मंदिर परिसर और सरयू के किनारे देवदार, बांज, उतीस सहित फूलों के पौधे रोपे। कार्यक्रम में क्षेत्रीय विधायक बलवंत सिंह भौर्याल ने भी शिरकत की। उन्होंने सरमूल, सहस्त्रधारा, भद्रतुंगा और तत्पकुंड के विकास के लिए किए जा रहे कार्यों के बारे में बताया। कहा कि क्षेत्र को पर्यटन के क्षेत्र में विशेष पहचान दिलाने के लिए हरसंभव कार्य किए जा रहे हैं। इस मौके पर ब्लॉक प्रमुख गोविंद सिंह दानू, समिति की महामंत्री कमला कुमल्टा सहित क्षेत्र के ग्रामीण मौजूद रहे।
इधर, तप्तकुंड में भी संत सीताराम के मार्गदर्शन में भक्तों ने सरयू जयंती मनाई। क्षेत्र के विभिन्न गांवों से आए भक्तों ने सरयू किनारे हवन-यज्ञ कर मां सरयू की उपासना की। सरयू जल को शुद्ध, स्वच्छ और सुरक्षित रखने के लिए कार्य करने का संकल्प लिया।
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ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को प्रकट हुई थी सरयू नदी
बागेश्वर। सरमूल, सौधारा, भद्रतुंगा विकास समिति के अध्यक्ष भगवत कोरंगा और सलाहकार दयाल सिंह कुमल्टा ने बताया कि सरयू नदी ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को मानसरोवर से गुप्त रूप से निकलकर कपकोट के झूनी गांव में सरमूल नामक स्थान से साक्षात प्रकट हुई थी। जिसके चलते हर वर्ष ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को सरयू जयंती मनाई जाती है।
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भद्रतुंगा में सरयू जयंती का आयोजन सरमूल, सौधारा, भद्रतुुंगा विकास समिति ने किया। संत देवानंद दास के मार्गदर्शन में बुधवार की शाम से भक्तों ने अखंड रामचरित मानस पाठ की शुरुआत की। बृहस्पतिवार को दोपहर बाद हवन-यज्ञ के साथ रामचरित मानस पाठ का पारायण हुआ। जिसके बाद भक्तों ने मंदिर परिसर और सरयू के किनारे देवदार, बांज, उतीस सहित फूलों के पौधे रोपे। कार्यक्रम में क्षेत्रीय विधायक बलवंत सिंह भौर्याल ने भी शिरकत की। उन्होंने सरमूल, सहस्त्रधारा, भद्रतुंगा और तत्पकुंड के विकास के लिए किए जा रहे कार्यों के बारे में बताया। कहा कि क्षेत्र को पर्यटन के क्षेत्र में विशेष पहचान दिलाने के लिए हरसंभव कार्य किए जा रहे हैं। इस मौके पर ब्लॉक प्रमुख गोविंद सिंह दानू, समिति की महामंत्री कमला कुमल्टा सहित क्षेत्र के ग्रामीण मौजूद रहे।
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इधर, तप्तकुंड में भी संत सीताराम के मार्गदर्शन में भक्तों ने सरयू जयंती मनाई। क्षेत्र के विभिन्न गांवों से आए भक्तों ने सरयू किनारे हवन-यज्ञ कर मां सरयू की उपासना की। सरयू जल को शुद्ध, स्वच्छ और सुरक्षित रखने के लिए कार्य करने का संकल्प लिया।
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ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को प्रकट हुई थी सरयू नदी
बागेश्वर। सरमूल, सौधारा, भद्रतुंगा विकास समिति के अध्यक्ष भगवत कोरंगा और सलाहकार दयाल सिंह कुमल्टा ने बताया कि सरयू नदी ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को मानसरोवर से गुप्त रूप से निकलकर कपकोट के झूनी गांव में सरमूल नामक स्थान से साक्षात प्रकट हुई थी। जिसके चलते हर वर्ष ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को सरयू जयंती मनाई जाती है।