{"_id":"5f172f8e8ebc3e9ed3112adb","slug":"sumharh-hadasa-bageshwar-news-hld390558678","type":"story","status":"publish","title_hn":"सुमगढ़ हादसे को याद कर शरीर में पैदा हो जाती है सिहरन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सुमगढ़ हादसे को याद कर शरीर में पैदा हो जाती है सिहरन
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बागेश्वर। कपकोट विकासखंड के सुमगढ़ में दस वर्ष पूर्व हुए हृदयविदारक हादसे को आज भी जिले के लोग नहीं भूल पाए हैं। इस हादसे की याद जेहन में आते ही सिहरन पैदा हो जाती है। इस हादसे में 18 मासूम स्कूली बच्चों की जान चली गई थी।
बरसात के सीजन में कहीं भी बादल फटने की घटना होने पर 18 अगस्त 2010 का वह मनहूस दिन याद आ जाता है, जिस दिन सुमगढ़ में बादल फटने के कारण सरस्वती शिशु मंदिर का भवन मलबे से पट गया था। जिससे 18 मासूम बच्चों को काल कवलित होना पड़ा था। हादसे के बाद कुछ समय तक शोक, संवेदनाओं का दौर चला। परिजनों को राहत राशि दी गई। हर साल हादसे की बरसी पर बच्चों की याद में स्थापित स्मृति स्तंभ पर श्रद्धांजलि दी जाती है लेकिन इन मासूमों के माता-पिता और परिजनों के दिल के घाव आज भी हरे हैं। वह घटना को भूल नहीं पाते।
बचपन मलबे में हो गया दफन
प्रीति कुमल्टा (6) दीपा कुमल्टा (8), योगिता मिश्रा (7), भारती जोशी (6), खुशबू जोशी (5), उर्मिला मिश्रा (10), नेहा दानू (7), मनीषा दानू (5), प्रेमा (5), चंद्रशेखर जोशी (6), पंकज दानू (5), रमेश सिंह गड़िया (8), मुन्ना टाकुली (7), तारा सिंह कुमल्टा (8), गौरव मिश्रा (4), मोहित चंद्र जोशी (5), खीम सिंह (6), करन पाठक (5)
विज्ञापन
कपकोट विकासखंड अति संवेदनशील
बागेश्वर। बागेश्वर जिले में आपदा की दृष्टि से कपकोट विकासखंड अति संवेदनशील है। कपकोट में बादल फटने की घटनाएं सामने आती रही हैं। जिला आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार 2005 में कपकोट के सुडिंग में बादल फटने से तीन लोग मारे गए थे। 2013 में पोथिंग में बादल फटने से तीन लोग मारे गए। 2013 में कपकोट के बमसेरा में बादल फटने की घटना में तीन लोगों की मौत हो गई थी।
विज्ञापन
बरसात के सीजन में कहीं भी बादल फटने की घटना होने पर 18 अगस्त 2010 का वह मनहूस दिन याद आ जाता है, जिस दिन सुमगढ़ में बादल फटने के कारण सरस्वती शिशु मंदिर का भवन मलबे से पट गया था। जिससे 18 मासूम बच्चों को काल कवलित होना पड़ा था। हादसे के बाद कुछ समय तक शोक, संवेदनाओं का दौर चला। परिजनों को राहत राशि दी गई। हर साल हादसे की बरसी पर बच्चों की याद में स्थापित स्मृति स्तंभ पर श्रद्धांजलि दी जाती है लेकिन इन मासूमों के माता-पिता और परिजनों के दिल के घाव आज भी हरे हैं। वह घटना को भूल नहीं पाते।
विज्ञापन
बचपन मलबे में हो गया दफन
प्रीति कुमल्टा (6) दीपा कुमल्टा (8), योगिता मिश्रा (7), भारती जोशी (6), खुशबू जोशी (5), उर्मिला मिश्रा (10), नेहा दानू (7), मनीषा दानू (5), प्रेमा (5), चंद्रशेखर जोशी (6), पंकज दानू (5), रमेश सिंह गड़िया (8), मुन्ना टाकुली (7), तारा सिंह कुमल्टा (8), गौरव मिश्रा (4), मोहित चंद्र जोशी (5), खीम सिंह (6), करन पाठक (5)
विज्ञापन
कपकोट विकासखंड अति संवेदनशील
बागेश्वर। बागेश्वर जिले में आपदा की दृष्टि से कपकोट विकासखंड अति संवेदनशील है। कपकोट में बादल फटने की घटनाएं सामने आती रही हैं। जिला आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार 2005 में कपकोट के सुडिंग में बादल फटने से तीन लोग मारे गए थे। 2013 में पोथिंग में बादल फटने से तीन लोग मारे गए। 2013 में कपकोट के बमसेरा में बादल फटने की घटना में तीन लोगों की मौत हो गई थी।