{"_id":"5826034c4f1c1b342fb3a9eb","slug":"sought-to-examine-the-development-works-under-mgnrega","type":"story","status":"publish","title_hn":"मनरेगा के तहत हुए विकास कार्यों की जांच की मांग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मनरेगा के तहत हुए विकास कार्यों की जांच की मांग
अमर उजाला बागेश्वर
Updated Fri, 11 Nov 2016 11:13 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जनपद के बमराड़ी गांव के ग्रामीणों ने जिला प्रशासन को ज्ञापन देकर मनरेगा के तहत गांव में हुए विकास कार्यों की जांच कराने की मांग की। ग्रामीणों ने कहा है कि लाखों रुपये के कार्यों में केवल लीपापोती की गई है। ग्रामीणों ने आरटीआई के तहत मांगी गई सूचना के भी समय से नहीं मिलने का आरोप लगाया है।
अपर जिलाधिकारी को सौंपे ज्ञापन में हरीश सिंह सहित अन्य ग्रामीणों ने कहा कि गांव में वर्ष 2014 से 2016 तक हुए कई कार्यों में अनियमितता हुई हैं। एक पुराने पेयजल टैंक में लीपापोती कर उसे नवनिर्मित दिखाया गया है। आरोप है कि विकास कार्यों की आरटीआई के तहत सूचना खंड विकास कार्यालय से मांगी गई। लेकिन निर्धारित अवधि के भीतर कोई सूचना उन्हें नहीं दी गई।
जिस पर प्रथम अपीलीय अधिकारी को पत्र लिखा इसके बाद भी अधूरी जानकारी उपलब्ध कराई गई। उन्होंने गांव में पेयजल टैंक निर्माण सहित अन्य कार्यों की उच्चस्तरीय जांच करने की मांग की है। ज्ञापन में नंदी देवी, मोहनी देवी, लाल सिंह, नंदन सिंह आदि ग्रामीणों के हस्ताक्षर हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
अपर जिलाधिकारी को सौंपे ज्ञापन में हरीश सिंह सहित अन्य ग्रामीणों ने कहा कि गांव में वर्ष 2014 से 2016 तक हुए कई कार्यों में अनियमितता हुई हैं। एक पुराने पेयजल टैंक में लीपापोती कर उसे नवनिर्मित दिखाया गया है। आरोप है कि विकास कार्यों की आरटीआई के तहत सूचना खंड विकास कार्यालय से मांगी गई। लेकिन निर्धारित अवधि के भीतर कोई सूचना उन्हें नहीं दी गई।
विज्ञापन
जिस पर प्रथम अपीलीय अधिकारी को पत्र लिखा इसके बाद भी अधूरी जानकारी उपलब्ध कराई गई। उन्होंने गांव में पेयजल टैंक निर्माण सहित अन्य कार्यों की उच्चस्तरीय जांच करने की मांग की है। ज्ञापन में नंदी देवी, मोहनी देवी, लाल सिंह, नंदन सिंह आदि ग्रामीणों के हस्ताक्षर हैं।
विज्ञापन