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बुग्यालों में ऊन फेंकने को मजबूर भेड़पालक
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कपकोट के विधायक बलवंत सिंह भौर्याल से ऊन क्रय केंद्र खोलने की मांग करते ग्रामीण।
- फोटो : BAGESHWAR
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बागेश्वर। जिले के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीण भेड़ों से ऊन निकालने के बाद उसे फेंकने को मजबूर हो रहे हैं। ऊन के व्यवसाय के लिए क्रय केंद्र न खुलने से भेड़ पालन के प्रति लोगों का रुझान कम हो रहा है।
कपकोट के ब्लॉक प्रमुख गोविंद सिंह दानू के साथ आए ग्रामीणों ने बुधवार को वहां के विधायक बलवंत सिंह भौर्याल के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर कपकोट में ऊन क्रय केंद्र खोलने की मांग की है। उन्होंने बताया कि कपकोट का अधिकतर हिस्सा उच्च हिमालयी क्षेत्र से जुड़ा है। यहां अधिकतर ग्रामीणों की आजीविका का मुख्य जरिया कृषि और भेड़- बकरी पालन है। कुमाऊं में कहीं भी ऊन क्रय केंद्र नहीं है, जबकि गढ़वाल मंडल में उत्तरकाशी, हर्सिल, चमोली, जोशीमठ, नीति, माणा सहित कई जगह ऊन क्रय केंद्र खुले हैं। इनके जरिये राज्य सरकार हर साल कई टन ऊन खरीदती है। उन्होंने कपकोट के पशुपालकों ने कर्मी, शामा और ब्लॉक परिसर कपकोट में ऊन क्रय केंद्र खोलने की मांग की है। उन्होंने पशुपालन, भेड़-बकरी पालन विभाग की मंत्री रेखा आर्या को भी पत्र भेजा है। इस अवसर पर ग्राम प्रधान डौला महेश दानू, प्रधान कालू धर्मेंद्र सिंह, पुष्पा देवी, सोनू दानू, प्रवीन सिंह, श्याम सिंह, भगवंत सिंह आदि मौजूद थे।
17635 भेड़ बकरियां है बागेश्वर जिले में
बागेश्वर। पशुपालन विभाग के मुताबिक जिले में 17635 भेड़-बकरी हैं। 801 परिवार इस व्यवसाय से जुड़े हैं। हर साल अप्रैल-मई, सितंबर-अक्तूबर में पशुपालक दो बार ऊन निकालते हैं लेकिन ऊन का वाजिब मूल्य न मिलने से पशुपालक परेशान हैं। संवाद
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कपकोट के ब्लॉक प्रमुख गोविंद सिंह दानू के साथ आए ग्रामीणों ने बुधवार को वहां के विधायक बलवंत सिंह भौर्याल के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर कपकोट में ऊन क्रय केंद्र खोलने की मांग की है। उन्होंने बताया कि कपकोट का अधिकतर हिस्सा उच्च हिमालयी क्षेत्र से जुड़ा है। यहां अधिकतर ग्रामीणों की आजीविका का मुख्य जरिया कृषि और भेड़- बकरी पालन है। कुमाऊं में कहीं भी ऊन क्रय केंद्र नहीं है, जबकि गढ़वाल मंडल में उत्तरकाशी, हर्सिल, चमोली, जोशीमठ, नीति, माणा सहित कई जगह ऊन क्रय केंद्र खुले हैं। इनके जरिये राज्य सरकार हर साल कई टन ऊन खरीदती है। उन्होंने कपकोट के पशुपालकों ने कर्मी, शामा और ब्लॉक परिसर कपकोट में ऊन क्रय केंद्र खोलने की मांग की है। उन्होंने पशुपालन, भेड़-बकरी पालन विभाग की मंत्री रेखा आर्या को भी पत्र भेजा है। इस अवसर पर ग्राम प्रधान डौला महेश दानू, प्रधान कालू धर्मेंद्र सिंह, पुष्पा देवी, सोनू दानू, प्रवीन सिंह, श्याम सिंह, भगवंत सिंह आदि मौजूद थे।
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17635 भेड़ बकरियां है बागेश्वर जिले में
बागेश्वर। पशुपालन विभाग के मुताबिक जिले में 17635 भेड़-बकरी हैं। 801 परिवार इस व्यवसाय से जुड़े हैं। हर साल अप्रैल-मई, सितंबर-अक्तूबर में पशुपालक दो बार ऊन निकालते हैं लेकिन ऊन का वाजिब मूल्य न मिलने से पशुपालक परेशान हैं। संवाद
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