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Bageshwar News: रंगदारी और धमकी देने के आरोपी की निगरानी याचिका खारिज
Wed, 12 Aug 2026 11:49 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
Updated Wed, 12 Aug 2026 11:49 PM IST
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बागेश्वर। सत्र न्यायाधीश पंकज तोमर की अदालत ने रंगदारी, धोखाधड़ी और जान से मारने की धमकी देने के आरोपी गोपाल चंद्र बनवासी की फौजदारी निगरानी याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने न्यायिक मजिस्ट्रेट गरुड़ के उस आदेश की पुष्टि कर दी है, जिसमें आरोपी के खिलाफ बीएनएस की सुसंगत धाराओं में आरोप तय करने के पर्याप्त आधार पाए गए थे।
सिटोली निवासी व्यापारी मंगल सिंह ने 19 सितंबर 2025 को बैजनाथ थाने में तहरीर दी थी। आरोप था कि उनकी दुकान के पुनर्निमाण के दौरान आरोपी ने शिकायत वापस लेने के नाम पर पहले 10 हजार रुपये ऐंठ लिए। इसके बाद वह लगातार दुकान से उधार सामान लेता रहा और मदद के नाम पर दो लाख रुपये अपने बैंक खाते में ट्रांसफर भी करवा लिए। जब व्यापारी ने उधारी के पैसे और दिए गए दो लाख रुपये वापस मांगे, तो आरोपी ने पैसे देने से साफ इनकार कर दिया। उन्हें झूठे मुकदमे और हाईकोर्ट में रिट डालकर जेल भिजवाने की धमकी दी। आरोपी ने व्यवसाय चलाने के बदले पांच लाख रुपये अतिरिक्त रंगदारी की मांग की और जान से मारने की धमकी भी दी। विवेचना के बाद अदालत में चार्जशीट दाखिल की गई। 14 नवंबर 2025 को संज्ञान लेते हुए आरोपी को समन जारी किए गए थे। न्यायिक मजिस्ट्रेट गरुड़ ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद 11 फरवरी 2026 को आरोपी के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत आरोप तय करने के आदेश जारी किए। निचली अदालत के फैसले को आरोपी ने सत्र न्यायाधीश की अदालत में चुनौती दी थी। सत्र न्यायालय ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं को सुनने और दस्तावेज का अवलोकन करने के बाद फैसले में स्पष्ट किया कि प्रथम दृष्टया आरोपी के खिलाफ मुकदमा चलाने के पर्याप्त आधार मौजूद हैं। आरोपी का आचरण शुरुआत से ही बेईमानी पूर्ण और दबाव बनाकर वसूली करने का दर्शा रहा है। अदालत ने गरुड़ मजिस्ट्रेट कोर्ट के आदेश में किसी तरह की त्रुटि न पाते हुए निगरानी याचिका को बलहीन मानकर निरस्त कर दिया। संवाद
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सिटोली निवासी व्यापारी मंगल सिंह ने 19 सितंबर 2025 को बैजनाथ थाने में तहरीर दी थी। आरोप था कि उनकी दुकान के पुनर्निमाण के दौरान आरोपी ने शिकायत वापस लेने के नाम पर पहले 10 हजार रुपये ऐंठ लिए। इसके बाद वह लगातार दुकान से उधार सामान लेता रहा और मदद के नाम पर दो लाख रुपये अपने बैंक खाते में ट्रांसफर भी करवा लिए। जब व्यापारी ने उधारी के पैसे और दिए गए दो लाख रुपये वापस मांगे, तो आरोपी ने पैसे देने से साफ इनकार कर दिया। उन्हें झूठे मुकदमे और हाईकोर्ट में रिट डालकर जेल भिजवाने की धमकी दी। आरोपी ने व्यवसाय चलाने के बदले पांच लाख रुपये अतिरिक्त रंगदारी की मांग की और जान से मारने की धमकी भी दी। विवेचना के बाद अदालत में चार्जशीट दाखिल की गई। 14 नवंबर 2025 को संज्ञान लेते हुए आरोपी को समन जारी किए गए थे। न्यायिक मजिस्ट्रेट गरुड़ ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद 11 फरवरी 2026 को आरोपी के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत आरोप तय करने के आदेश जारी किए। निचली अदालत के फैसले को आरोपी ने सत्र न्यायाधीश की अदालत में चुनौती दी थी। सत्र न्यायालय ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं को सुनने और दस्तावेज का अवलोकन करने के बाद फैसले में स्पष्ट किया कि प्रथम दृष्टया आरोपी के खिलाफ मुकदमा चलाने के पर्याप्त आधार मौजूद हैं। आरोपी का आचरण शुरुआत से ही बेईमानी पूर्ण और दबाव बनाकर वसूली करने का दर्शा रहा है। अदालत ने गरुड़ मजिस्ट्रेट कोर्ट के आदेश में किसी तरह की त्रुटि न पाते हुए निगरानी याचिका को बलहीन मानकर निरस्त कर दिया। संवाद
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