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जाली ने रोका बंदरों का नुकसान
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, गरुड़ (बागेश्वर)।
Updated Sun, 03 Jan 2016 01:36 AM IST
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क्षेत्र के किसान बंदरों के आतंक से परेशान हैं। बंदरों के आतंक के चलते अधिकतर किसानों ने सब्जी की खेती करने से हाथ खींच लिए है। उत्तराखंड सरकार बंदरों के आतंक को रोकने के लिए आज तक ठोस नीति नहीं बना पायी है। वज्यूला के व्यापारियों ने अपने दुकान की सामग्री को बचाने के लिए दुकान के आगे जाली लगा ली है।
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वज्यूला बाजार रेंज कार्यालय गढ़खेत से एकदम सटा है। वज्यूला के व्यापारियों ने वन रेंजर सहित विभाग के आला अधिकारियों से कई बार बंदरों के आतंक से निजात दिलाने को कहा। वन विभाग ने व्यापारियों की समस्या को नजरअंदाज किया। बंदरों ने बीते सालों में दुकानदारों को जब भारी क्षति पहुंचा दी तो बाजार के सभी व्यापारियों ने अपने-अपने प्रतिष्ठान के आगे महंगी जाली लगा दी।
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वज्यूला के व्यापारी महेंद्र सिंह फर्स्वाण, जीवन सिंह, कैलाश परिहार, नवीन परिहार ने बताया कि दुकान के आगे जाली लगाने में दस से तीस हजार रुपये खर्च हुआ है। जब से दुकानों को जाली से बंद किया है, तब से बंदर दुकान से सामग्री नहीं उठा पा रहे है।
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बंदरों के आतंक के भय से वज्यूला बाजार से लगे मवई के ग्रामीणों ने सब्जी उगाना बंद कर दिया है। मवई गांव निवासी रूप सिंह परिहार ने बताया कि मवई गांव के किसान पूर्व में साग सब्जी का भारी मात्रा में उत्पादन करते थे। बंदरों के आतंक के चलते गांव के किसान अब सब्जी का उत्पादन कतई नहीं करते है।