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कमजोर पुल पर खतर उठाकर आवाजाही कर रहे लोग
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बागेश्वर। विकास की रफ्तार में ग्रामीण क्षेत्रों में नदियों और गधेरों पर बने पैदल पुल उपेक्षित हो गए हैं। कपकोट तहसील क्षेत्र में बड़ेत गांव के खारबगड़ तोक को जोड़ने वाले पुल की बुनियाद भी लगातार कमजोर होती जा रही है। बावजूद इसके विभाग सुध नहीं ले रहा है। ग्रामीण खतरा उठाकर पुल से आवागमन करने के लिए मजबूर हैं।
खारबगड़ तोक में 42 परिवार निवास करते हैं, जिन्हें गांव पहुंचने के लिए नदी पर बने पुल से गुजरना पड़ता है। गांव को जोड़ने वाले पैदल पुल का एक अपरमेंट पांच वर्ष से क्षतिग्रस्त है। नदी के कटाव से पुल की बुनियाद भी कमजोर हो रही है। इस कारण ग्रामीणों की आवाजाही में खतरा बना हुआ है।
खारबगड़ तोक दो बार आपदा की मार झेल चुका है। वर्ष 2010 में आई भीषण आपदा में पैदल पुल बह गया था। वर्ष 2012 में पुल का नवनिर्माण कराया गया। निर्माण के चार वर्ष में ही पुल का एक अपरमेंट की रिंगवाल गिर गई। वहीं नदी के कटाव से पुल के मुख्य पीलर खतरे की जद में आ गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार लोक निर्माण विभाग को सूचना देने के बावजूद पुल की मरम्मत नहीं हो रही है।
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रोजाना पुल से ग्रामीण आवाजाही करते हैं। बारिश के दिनों में नदी उफान पर रहने से खतरा बढ़ जाता है। जिसके कारण पुल के टूटने का खतरा बना रहता है। डर के बावजूद पुल से आवागमन करना गांव वालों की मजबूरी बन गई है। प्रशासन को जल्द इसका संज्ञान लेना चाहिए, ताकि भविष्य में किसी प्रकार का हादसा होने से बचा जा सके। - दीपक सिंह बड़ती, ग्रामीण खारबगड़
बड़ेत ग्राम पंचायत में एक पुल एक वर्ष से ध्वस्त है, जबकि दूसरी की बुनियाद कमजोर हो गई है। कई बार पैदल पुलों की मरम्मत को लेकर शासन-प्रशासन को ज्ञापन दिए गए। अब तक सुनवाई नहीं हो रही है। मानसून में खारबगड़ पुल से आने-जाने में खतरा बना रहता है। प्रशासन को जल्द पुलों की संज्ञान लेकर मरम्मत करानी चाहिए। - भुवन सिंह ऐठानी, ग्राम प्रधान बड़ेत
खारबगड़ को जोड़ने वाली पैदल पुल की मरम्मत के लिए जिला योजना के तहत निविदा लगा दी गई है। जल्द ही मरम्मत का काम शुरू करा दिया जाएगा। - एसके पांडेय, अधिशासी अभियंता, लोनिवि
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खारबगड़ तोक में 42 परिवार निवास करते हैं, जिन्हें गांव पहुंचने के लिए नदी पर बने पुल से गुजरना पड़ता है। गांव को जोड़ने वाले पैदल पुल का एक अपरमेंट पांच वर्ष से क्षतिग्रस्त है। नदी के कटाव से पुल की बुनियाद भी कमजोर हो रही है। इस कारण ग्रामीणों की आवाजाही में खतरा बना हुआ है।
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खारबगड़ तोक दो बार आपदा की मार झेल चुका है। वर्ष 2010 में आई भीषण आपदा में पैदल पुल बह गया था। वर्ष 2012 में पुल का नवनिर्माण कराया गया। निर्माण के चार वर्ष में ही पुल का एक अपरमेंट की रिंगवाल गिर गई। वहीं नदी के कटाव से पुल के मुख्य पीलर खतरे की जद में आ गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार लोक निर्माण विभाग को सूचना देने के बावजूद पुल की मरम्मत नहीं हो रही है।
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रोजाना पुल से ग्रामीण आवाजाही करते हैं। बारिश के दिनों में नदी उफान पर रहने से खतरा बढ़ जाता है। जिसके कारण पुल के टूटने का खतरा बना रहता है। डर के बावजूद पुल से आवागमन करना गांव वालों की मजबूरी बन गई है। प्रशासन को जल्द इसका संज्ञान लेना चाहिए, ताकि भविष्य में किसी प्रकार का हादसा होने से बचा जा सके। - दीपक सिंह बड़ती, ग्रामीण खारबगड़
बड़ेत ग्राम पंचायत में एक पुल एक वर्ष से ध्वस्त है, जबकि दूसरी की बुनियाद कमजोर हो गई है। कई बार पैदल पुलों की मरम्मत को लेकर शासन-प्रशासन को ज्ञापन दिए गए। अब तक सुनवाई नहीं हो रही है। मानसून में खारबगड़ पुल से आने-जाने में खतरा बना रहता है। प्रशासन को जल्द पुलों की संज्ञान लेकर मरम्मत करानी चाहिए। - भुवन सिंह ऐठानी, ग्राम प्रधान बड़ेत
खारबगड़ को जोड़ने वाली पैदल पुल की मरम्मत के लिए जिला योजना के तहत निविदा लगा दी गई है। जल्द ही मरम्मत का काम शुरू करा दिया जाएगा। - एसके पांडेय, अधिशासी अभियंता, लोनिवि