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बुनियादी सुविधाओं से महरूम जौलकांडे गांव
अमर उजाला ब्यूरो बागेश्वर।
Updated Fri, 29 Jun 2018 11:21 PM IST
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बागेश्रर में डीएम को समस्या बताते जौलकांडे के ग्रामीण।
- फोटो : अमर उजाला
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प्राकृतिक रूप से समृद्ध विकास खंड का जौलकांडे का विकास तो दूर ग्रामीण बुनियादी सेवाओं के लिए जूझ रहे हैं। गांव स्वास्थ्य, पेयजल, रसोई गैस जैसी बुनियादी सुविधाओं से महरूम है। ग्रामीणों ने प्रशासन से आवश्यक सेवाओं की उपलब्धता की गुहार लगाई है।
शुक्रवार को मुख्यालय पहुंचे ग्रामीणों ने डीएम से मिलकर समस्या बताई। कहा कि गांव की पेयजल योजना अब नाकाफी साबित हो रही है। पानी का दूसरा स्रोत है, लेकिन इस स्रोत से पेयजल योजना नहीं बन पाई है। इसी तरह गांव में स्वास्थ्य केंद्र नहीं है। क्षेत्र के आठ गांवों को इलाज के लिए मुख्यालय दौड़ लगानी पड़ती है। रसोई गैस का वाहन एक माह पूर्व तक गांव में आता था, लेकिन अब यह सुविधा बंद हो गई है। गांव में यातायात की सुविधा नहीं है। स्कूली बच्चों को कई किमी की पैदल दूरी नापनी पड़ती है। ग्रामीणों ने डीएम से इन समस्याओं का निराकरण करने की मांग की है। इस दौरान प्रेमा आर्या, मोहन चंद्र, रमेश लोहनी, दरबान सिंह बिष्ट आदि थे।
पर्यटक आवास गृह का मामला लटका
प्राकृतिक रूप से समृद्ध जौलकांडे में पर्यटन विकास की संभावनाएं हैं। यहां हिमालय के दर्शन होते हैं। बागनाथ नगरी का विहंगम दृश्य भी नजर आता है। लंबे समय से जौलकांडे को पर्यटन क्षेत्र के रूप में विकसित करने की मांग उठ रही है। लेकिन सरकारी मशीनरी पर्यटन विकास को छोड़िए, ग्रामीणों को बुनियादी सेवाओं का लाभ तक नहीं दे पा रही है। गांव में पर्यटक आवास गृह निर्माण का मामला पिछले आठ सालों से लटका है।
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शुक्रवार को मुख्यालय पहुंचे ग्रामीणों ने डीएम से मिलकर समस्या बताई। कहा कि गांव की पेयजल योजना अब नाकाफी साबित हो रही है। पानी का दूसरा स्रोत है, लेकिन इस स्रोत से पेयजल योजना नहीं बन पाई है। इसी तरह गांव में स्वास्थ्य केंद्र नहीं है। क्षेत्र के आठ गांवों को इलाज के लिए मुख्यालय दौड़ लगानी पड़ती है। रसोई गैस का वाहन एक माह पूर्व तक गांव में आता था, लेकिन अब यह सुविधा बंद हो गई है। गांव में यातायात की सुविधा नहीं है। स्कूली बच्चों को कई किमी की पैदल दूरी नापनी पड़ती है। ग्रामीणों ने डीएम से इन समस्याओं का निराकरण करने की मांग की है। इस दौरान प्रेमा आर्या, मोहन चंद्र, रमेश लोहनी, दरबान सिंह बिष्ट आदि थे।
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पर्यटक आवास गृह का मामला लटका
प्राकृतिक रूप से समृद्ध जौलकांडे में पर्यटन विकास की संभावनाएं हैं। यहां हिमालय के दर्शन होते हैं। बागनाथ नगरी का विहंगम दृश्य भी नजर आता है। लंबे समय से जौलकांडे को पर्यटन क्षेत्र के रूप में विकसित करने की मांग उठ रही है। लेकिन सरकारी मशीनरी पर्यटन विकास को छोड़िए, ग्रामीणों को बुनियादी सेवाओं का लाभ तक नहीं दे पा रही है। गांव में पर्यटक आवास गृह निर्माण का मामला पिछले आठ सालों से लटका है।
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