फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Bageshwar News ›   New Bridge in Bagehwar

पुलों के शहर के रूप में भी है बागेश्वर की पहचान

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sun, 06 Mar 2022 12:20 AM IST
विज्ञापन
New Bridge in Bagehwar
बागेश्वर के बागनाथ मंदिर और नुमाइशखेत के लिए बने पैदल पुल से ढका बागनाथ मंदिर समूह। संवाद न्यूज ए - फोटो : BAGESHWAR
बागेश्वर। भगवान बागनाथ की नगरी की पहचान पुलों के नगर के रूप में भी है। ब्रिटिश कालीन भारत में 109 वर्ष पहले बना ऐतिहासिक झूलापुल आज भी लोगों को सुगम आवागमन की सुविधा दे रहा है। जिला मुख्यालय में छह मोटर और दो पैदल पुल हैं।
विज्ञापन

बागेश्वर में वर्ष 1962 में सड़क पहुंची। पहला पुल गोमती नदी पर बना, जो आज भी सही सलामत है। इसके बाद सरयू नदी पर पुल बना। वर्ष 1997 में जिला बनने के बाद में गोमती नदी पर एक और पुल बना। सरयू नदी पर ही अस्पताल को जोड़ने वाला मोटर पुल बना। विकास भवन, कलक्ट्रेट को जोड़ने के लिए सरयू के पुल के साथ ही बिलौना के पास दफौट सड़क को जोड़ने के लिए मोटर पुल का निर्माण किया गया।
विज्ञापन

ब्रिटिश भारत में वर्ष 1913 में सरयू नदी पर झूलापुल बनाया गया। इस वर्ष बागनाथ मंदिर के पास एक पैदल पुल बनकर तैयार हुआ है। जिसने बागनाथ मंदिर समूह और नुमाइशखेत को आपस में जोड़ दिया है। पुलों के निर्माण से जिला मुख्यालय का यातायात सुगम हुआ है।
विज्ञापन
विज्ञापन

पैदल पुल की ऊंचाई पर उठ रहे सवाल
बागेश्वर। बागनाथ मंदिर और नुमाइशखेत मैदान को जोड़ने के लिए हाल में करीब तीन करोड़ की लागत से बने पैदल पुल से आवागमन में काफी सुविधा मिली है लेकिन इस पुल की ऊंचाई से बागनाथ मंदिर समूह ढक सा गया है। नुमाइशखेत मैदान से बागनाथ मंदिर समूह के स्पष्ट दर्शन नहीं हो पा रहे हैं। जैसे पहले होते थे। लोग इस पुल की ऊंचाई कम करने की भी मांग करने लगे हैं। बागेश्वर के सामाजिक कार्यकर्ता महिपाल भरड़ा का कहना है कि पुल से काफी सुविधा मिली है, लेकिन पुल की ऊंचाई कम होती तो बागनाथ मंदिर समूह की सुंदरता को बरकरार रखा जा सकता था। इसके लिए जनप्रतिनिधियों को पहल करनी चाहिए। पहले लोनिवि का इस स्थान पर मोटर पुल बनाने का विचार था। संपर्क मार्ग न होने के कारण प्रस्ताव को पैदल पुल में तब्दील किया गया।

बागनाथ मंदिर समूह और नुमाइशखेत के मध्य बने पैदल पुल के लिए सही जगह का चयन किया जाना चाहिए था। अब पुल की ऊंचाई कम करना मुश्किल दिखाई देता है। इसके लिए काफी रकम की आवश्यकता होगी। संभव तो इसके लिए प्रयास किए जाने चाहिए।
सुरेश खेतवाल अध्यक्ष नगरपालिका बागेश्वर।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed