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Bageshwar News: जानिये उत्तराखंड के किस जिले में लड़कों से अधिक है लड़कियां
Thu, 25 Jan 2024 12:31 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
Updated Thu, 25 Jan 2024 12:31 AM IST
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शंकर पांडेय
बागेश्वर। जिले के लिंगानुपात में लगातार सुधार हो रहा है। इस बार भी बेटियों की संख्या बढ़ी है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में दिसंबर तक 1000 बालकों के सापेक्ष बालिकाओं की संख्याा 1012 रही है जो वर्ष 2012-13 के सापेक्ष 133 अधिक है। इस बार प्रदेश में बालक-बालिकाओं का लिंगानुपात प्रति हजार लड़कों पर 984 लड़कियों का है।
वर्ष 2012-13 में जिले में बालक-बालिकाओं का लिंगानुपात 1000 के सापेक्ष 879 था। वर्ष 2013-14 से लिंगानुपात में सुधार होने लगा। वर्ष 2015-16 में कुछ गिरावट के बाद अगले चार साल में लिंगानुपात लगातार बढ़ता रहा। वर्ष 2019-20 में बालिका लिंगानुपात उच्च स्तर पर पहुंचकर 1012 हो गया था। हालांकि अगले साल फिर बाल लिंगानुपात में गिरावट देखने को मिली, लेकिन यह गिरावट मामूली थी। चालू वित्त वर्ष में एक बार फिर से लिंगानुपात में उछाल आया और दिसंबर महीने में ही बाल लिंगानुपात ने वर्ष 2019-20 के आंकड़े की बराबरी कर ली। संवाद
प्रसव के आंकड़ों पर निर्भर है रिपोर्ट
बागेश्वर। जिले में हर साल स्वास्थ्य केंद्रों और घरों में होने वाले प्रसव के आंकड़ों के आधार पर स्वास्थ्य विभाग लिंगानुपात की रिपोर्ट तैयार करता है। पूरे साल पैदा होने वाले बालक और बालिकाओं की संख्या के आधार पर प्रति 1000 के आधार पर लिंगानुपात निकाला जाता है।
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जागरूकता कार्यक्रमों की रही अहम भूमिका
बागेश्वर। बाल लिंगानुपात के लिए कन्या भ्रूण हत्या और गिरते लिंगानुपात को रोकने के लिए लागू पूर्व गर्भाधान और प्रसव पूर्व निदान तकनीक (PCPNDT) अधिनियम और बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ जैसी योजनाओं का भी बालिका लिंगानुपात बढ़ाने में योगदान रहा है।
जिले में लिंगानुपात की साल दर साल की रिपोर्ट
साल - लिंगानुपात
2012-13 - 879
2013-14 - 891
2014-15 - 936
2015-16 - 894
2016-17 - 925
2017-18 - 931
2018-19 - 956
2019-20 - 1012
2020-21 - 904
2021-22 - 995
2022-23 - 998
2023-24 - 1012 (दिसंबर तक)
(आंकड़े सालाना प्रसव के आधार पर स्वास्थ्य विभाग की जिला रिपोर्ट पर आधारित)
कोट
लिंगानुपात में लगातार हो रहे सुधार में सरकार की योजनाओं और जागरूकता की अहम भूमिका है। जिले के लोगों के सहयोग के बिना यह संभव नहीं है। लोगों के जागरूक होने से ही यह संभव हो पाया है। लोगों तक योजनाओं को पहुंचाने वाले सभी लोगों का सहयोग भी सराहनीय रहा है। -डॉ. डीपी जोशी, सीएमओ, बागेश्वर
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बागेश्वर। जिले के लिंगानुपात में लगातार सुधार हो रहा है। इस बार भी बेटियों की संख्या बढ़ी है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में दिसंबर तक 1000 बालकों के सापेक्ष बालिकाओं की संख्याा 1012 रही है जो वर्ष 2012-13 के सापेक्ष 133 अधिक है। इस बार प्रदेश में बालक-बालिकाओं का लिंगानुपात प्रति हजार लड़कों पर 984 लड़कियों का है।
वर्ष 2012-13 में जिले में बालक-बालिकाओं का लिंगानुपात 1000 के सापेक्ष 879 था। वर्ष 2013-14 से लिंगानुपात में सुधार होने लगा। वर्ष 2015-16 में कुछ गिरावट के बाद अगले चार साल में लिंगानुपात लगातार बढ़ता रहा। वर्ष 2019-20 में बालिका लिंगानुपात उच्च स्तर पर पहुंचकर 1012 हो गया था। हालांकि अगले साल फिर बाल लिंगानुपात में गिरावट देखने को मिली, लेकिन यह गिरावट मामूली थी। चालू वित्त वर्ष में एक बार फिर से लिंगानुपात में उछाल आया और दिसंबर महीने में ही बाल लिंगानुपात ने वर्ष 2019-20 के आंकड़े की बराबरी कर ली। संवाद
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प्रसव के आंकड़ों पर निर्भर है रिपोर्ट
बागेश्वर। जिले में हर साल स्वास्थ्य केंद्रों और घरों में होने वाले प्रसव के आंकड़ों के आधार पर स्वास्थ्य विभाग लिंगानुपात की रिपोर्ट तैयार करता है। पूरे साल पैदा होने वाले बालक और बालिकाओं की संख्या के आधार पर प्रति 1000 के आधार पर लिंगानुपात निकाला जाता है।
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जागरूकता कार्यक्रमों की रही अहम भूमिका
बागेश्वर। बाल लिंगानुपात के लिए कन्या भ्रूण हत्या और गिरते लिंगानुपात को रोकने के लिए लागू पूर्व गर्भाधान और प्रसव पूर्व निदान तकनीक (PCPNDT) अधिनियम और बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ जैसी योजनाओं का भी बालिका लिंगानुपात बढ़ाने में योगदान रहा है।
जिले में लिंगानुपात की साल दर साल की रिपोर्ट
साल - लिंगानुपात
2012-13 - 879
2013-14 - 891
2014-15 - 936
2015-16 - 894
2016-17 - 925
2017-18 - 931
2018-19 - 956
2019-20 - 1012
2020-21 - 904
2021-22 - 995
2022-23 - 998
2023-24 - 1012 (दिसंबर तक)
(आंकड़े सालाना प्रसव के आधार पर स्वास्थ्य विभाग की जिला रिपोर्ट पर आधारित)
कोट
लिंगानुपात में लगातार हो रहे सुधार में सरकार की योजनाओं और जागरूकता की अहम भूमिका है। जिले के लोगों के सहयोग के बिना यह संभव नहीं है। लोगों के जागरूक होने से ही यह संभव हो पाया है। लोगों तक योजनाओं को पहुंचाने वाले सभी लोगों का सहयोग भी सराहनीय रहा है। -डॉ. डीपी जोशी, सीएमओ, बागेश्वर