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दो वर्ष ठप रहने के बाद खुशियों की सवारी में फिर गूंजने लगी किलकारी
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बैजनाथ अस्पताल से खुशियों की सवारी रवाना करते डॉ. राजेश गुंज्याल। विज्ञप्ति
- फोटो : BAGESHWAR
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बागेश्वर। वर्ष 2019 से ठप पड़ी खुशियों की सवारी का संचालन फिर से शुरु हो गया है। 108 को संचालित करने वाली कैंपा कंपनी अब खुशियों की सवारी का संचालन करेगी। जिले में फिलहाल पांच वाहन संचालित किए जाएंगे। जरुरतमंद 102 नंबर डायल कर खुशियों की सवारी का लाभ उठा सकेंगे।
खुशियों की सवारी योजना की शुरुआत प्रदेश सरकार ने वर्ष 2011 में की थी। इस वाहन की मदद से जच्चा और नवाजात बच्चे को अस्पताल में सुरक्षित प्रसव के बाद निशुल्क घर तक छोड़ा जाता था।
आपात स्थिति में वाहन गर्भवती महिलाओं को प्रसव के लिए अस्पताल तक लाने में भी मददगार थी। योजना की शुरुआत किराए के वाहनों से की गई। वर्ष 2013 में सरकार ने किराए की वैन के स्थान पर अपने वाहन खरीदे।
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पर्वतीय क्षेत्रों में इस योजना को काफी सराहा गया और खुशियों की सवारी की मांग बढ़ने लगी। सभी जिलों में योजना की जिम्मेदारी मुख्य चिकित्साधिकारी को दी गई थी। जिसके लिए प्रति केस 450 रुपये निर्धारित किया गया।
हालांकि समय बीतने के साथ योजना के वाहनों में खराबी आने लगी। जिसके चलते स्वास्थ्य विभाग ने भी योजना के संचालन से हाथ खड़े कर दिए। दो वर्ष पहले योजना पूरी तरह से ठप पड़ गई। वहीं कोरोना काल में खड़े-खड़े वाहन भी खराब हो गए।
कोरोना काल के बाद सरकार ने फिर से इस सफल योजना के संचालन की कवायद शुरु की और कैंपा कंपनी को खुशियों की सवारी के संचालन की जिम्मेदारी मिली है। मंगलवार से यह योजना सभी जिलों में शुरु हो गई है। टॉल फ्री नंबर पर फोन कर लाभार्थी योजना का लाभ उठा सकते हैं।
बैजनाथ में हुई योजना की शुरुआत
बागेश्वर। 108 के जिला समन्वयक भाष्कर शर्मा ने बताया कि जिले में संचालित होने वाले पांच वाहनों में से जिला अस्पताल में तीन, कपकोट और बैजनाथ सीएचसी में एक-एक खुशियों की सवारी तैनात रहेगी। मंगलवार को बैजनाथ में ग्वालदम निवासी चंपा देवी पत्नी दयाल सिंह ने खुशियों की सवारी का लाभ लिया।
वाहन को हरी झंडी सीएचसी के प्रभारी डॉ. राजेश गुंज्याल ने दिखाई। जिला समन्वयक शर्मा ने बताया कि फिलहाल किराए पर वाहन लेकर योजना का संचालन किया जा रहा है। वर्तमान में तीनों अस्पतालों में एक-एक खुशियों की सवारी की सुविधा मिल रही है। जिला अस्पताल में जल्द ही दो अन्य वाहन उपलब्ध हो जाएंगे।
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खुशियों की सवारी योजना की शुरुआत प्रदेश सरकार ने वर्ष 2011 में की थी। इस वाहन की मदद से जच्चा और नवाजात बच्चे को अस्पताल में सुरक्षित प्रसव के बाद निशुल्क घर तक छोड़ा जाता था।
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आपात स्थिति में वाहन गर्भवती महिलाओं को प्रसव के लिए अस्पताल तक लाने में भी मददगार थी। योजना की शुरुआत किराए के वाहनों से की गई। वर्ष 2013 में सरकार ने किराए की वैन के स्थान पर अपने वाहन खरीदे।
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पर्वतीय क्षेत्रों में इस योजना को काफी सराहा गया और खुशियों की सवारी की मांग बढ़ने लगी। सभी जिलों में योजना की जिम्मेदारी मुख्य चिकित्साधिकारी को दी गई थी। जिसके लिए प्रति केस 450 रुपये निर्धारित किया गया।
हालांकि समय बीतने के साथ योजना के वाहनों में खराबी आने लगी। जिसके चलते स्वास्थ्य विभाग ने भी योजना के संचालन से हाथ खड़े कर दिए। दो वर्ष पहले योजना पूरी तरह से ठप पड़ गई। वहीं कोरोना काल में खड़े-खड़े वाहन भी खराब हो गए।
कोरोना काल के बाद सरकार ने फिर से इस सफल योजना के संचालन की कवायद शुरु की और कैंपा कंपनी को खुशियों की सवारी के संचालन की जिम्मेदारी मिली है। मंगलवार से यह योजना सभी जिलों में शुरु हो गई है। टॉल फ्री नंबर पर फोन कर लाभार्थी योजना का लाभ उठा सकते हैं।
बैजनाथ में हुई योजना की शुरुआत
बागेश्वर। 108 के जिला समन्वयक भाष्कर शर्मा ने बताया कि जिले में संचालित होने वाले पांच वाहनों में से जिला अस्पताल में तीन, कपकोट और बैजनाथ सीएचसी में एक-एक खुशियों की सवारी तैनात रहेगी। मंगलवार को बैजनाथ में ग्वालदम निवासी चंपा देवी पत्नी दयाल सिंह ने खुशियों की सवारी का लाभ लिया।
वाहन को हरी झंडी सीएचसी के प्रभारी डॉ. राजेश गुंज्याल ने दिखाई। जिला समन्वयक शर्मा ने बताया कि फिलहाल किराए पर वाहन लेकर योजना का संचालन किया जा रहा है। वर्तमान में तीनों अस्पतालों में एक-एक खुशियों की सवारी की सुविधा मिल रही है। जिला अस्पताल में जल्द ही दो अन्य वाहन उपलब्ध हो जाएंगे।