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वेतन का 10 प्रतिशत विद्यार्थियों पर खर्च करते हैं राजूहा रौल्याना के शिक्षक
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बागेश्वर के राजूहा रौल्यांना में एक विद्यार्थी के जन्मदिन पर उसे केक खिलाते प्रभारी प्रधानाध्य?
- फोटो : BAGESHWAR
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बागेश्वर। विद्यालय में शिक्षक का कार्य बच्चों को शिक्षित कर बेहतर कॅरियर तलाशने और समाज निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित करना है। अधिकतर शिक्षक जहां बच्चों को बेहतर शिक्षा देने का कार्य करते हैं, वहीं कुछ शिक्षक उन्हें व्यहारिक ज्ञान भी प्रदान करते हैं। राजकीय जूनियर हाईस्कूल रौल्याना के शिक्षक भी ऐसा ही कार्य कर रहे हैं। एक ओर जहां विद्यालय के शिक्षक छात्र-छात्राओं को बेहतर शिक्षा प्रदान कर रहे हैं, वहीं विद्यार्थियों के विकास में प्रति माह अपने वेतन का 10 प्रतिशत रुपया खर्च कर उन्हें मानवता की सेवा करने का पाठ भी पढ़ा रहे हैं।
राजूहा रौल्यांना में प्रभारी प्रधानाध्यापक नीरज पंत के साथ दो सहायक अध्यापक दीपक पांडेय और भास्कर पंत तैनात हैं। वर्ष 2015 में शिक्षक नीरज पंत की तैनाती विद्यालय में हुई थी। तब विद्यालय की छात्र संख्या 22 थी और शिक्षक व प्रधानाध्यापक दोनों की जिम्मेदारी नीरज पंत के जिम्मे थी। विद्यालय में तैनाती के बाद शिक्षक पंत ने देखा कि क्षेत्र के कई बच्चे कमजोर माली हालत के कारण विद्यालय नहीं आ रहे थे। ऐसे में उन्होंने तय किया कि वह अपने वेतन का कुछ हिस्सा आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों की पढ़ाई में खर्च करेंगे। इसके बाद उन्होंने घर-घर जाकर बच्चों को पढ़ने के लिए प्रेरित किया। उनका प्रयास रंग लाया और धीरे-धीरे विद्यालय में छात्र संख्या बढ़ने लगी। एक साल बाद विद्यालय में शिक्षक दीपक पांडेय की तैनाती हुई। प्रधानाध्यापक पंत की देखादेखी उन्होंने भी अपने वेतन से प्रति माह 10 प्रतिशत राशि बच्चों पर खर्च करने की बात कही। विद्यालय में तैनाती लेने वाले तीसरे शिक्षक भाष्कर पंत ने भी दोनों का अनुसरण किया। वर्तमान में विद्यालय की छात्र संख्या बढ़कर 49 हो गई है।
बच्चों की पढ़ाई, जन्मदिन, प्रतियोगिताओं में करते हैं खर्च
बागेश्वर। रौल्यांना के शिक्षक अपने वेतन से हर महीने एक निश्चित राशि को अलग जमा कर देते हैं। इस धन का उपयोग हर महीने बच्चों का सामूहिक जन्मोत्सव मनाने में किया जाता है। कार्यक्रम में केक से लेकर बच्चों की पसंद के उपहार तक का खर्चा इसी राशि से किया जाता है। इसके अलावा विद्यालय में समय-समय पर होने वाली प्रतियोगिताओं में बच्चों के उत्साहवर्धन के लिए आकर्षक उपहार, बच्चों को गर्मियों में टीशर्ट और सर्दियों में ट्रैक सूट वितरण, विदाई समारोह, आनंदम गतिविधि, आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों की कापी, पेन, पेंसिल सहित अन्य खर्च के लिए भी शिक्षकों की जमा की गई राशि का प्रयोग होता है। विद्यालय में रंग रोगन के कार्य के लिए भी शिक्षकों ने अपने वेतन से 40 हजार रुपये की राशि खर्च की है। प्रधानाध्यापक पंत ने बताया कि विद्यालय को सुरक्षित बनाने के लिए ग्राम पंचायत के सहयोग से विद्यालय में सुरक्षा दीवार, फील्ड निर्माण और चाहरदीवारी निर्माण कार्य भी कराया गया है।
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कोरोना काल में घर-घर जाकर दी शिक्षा
बागेश्वर। विद्यालय के शिक्षकों ने कोरोना काल में घर-घर जाकर बच्चों को शिक्षित किया था। प्रधानाध्यापक नीरज पंत बताते हैं कि विद्यालय में पढ़ने वाले अधिकांश बच्चों के पास मोबाइल फोन नहीं थे। तब शिक्षकों ने मिलकर यह निर्णय लिया। इस दौरान रोजाना शिक्षक बच्चों के घर जाते और उन्हें तीन से चार घंटे तक पढ़ाते थे। शिक्षकों की इस मुहिम से आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को काफी मदद मिली।
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राजूहा रौल्यांना में प्रभारी प्रधानाध्यापक नीरज पंत के साथ दो सहायक अध्यापक दीपक पांडेय और भास्कर पंत तैनात हैं। वर्ष 2015 में शिक्षक नीरज पंत की तैनाती विद्यालय में हुई थी। तब विद्यालय की छात्र संख्या 22 थी और शिक्षक व प्रधानाध्यापक दोनों की जिम्मेदारी नीरज पंत के जिम्मे थी। विद्यालय में तैनाती के बाद शिक्षक पंत ने देखा कि क्षेत्र के कई बच्चे कमजोर माली हालत के कारण विद्यालय नहीं आ रहे थे। ऐसे में उन्होंने तय किया कि वह अपने वेतन का कुछ हिस्सा आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों की पढ़ाई में खर्च करेंगे। इसके बाद उन्होंने घर-घर जाकर बच्चों को पढ़ने के लिए प्रेरित किया। उनका प्रयास रंग लाया और धीरे-धीरे विद्यालय में छात्र संख्या बढ़ने लगी। एक साल बाद विद्यालय में शिक्षक दीपक पांडेय की तैनाती हुई। प्रधानाध्यापक पंत की देखादेखी उन्होंने भी अपने वेतन से प्रति माह 10 प्रतिशत राशि बच्चों पर खर्च करने की बात कही। विद्यालय में तैनाती लेने वाले तीसरे शिक्षक भाष्कर पंत ने भी दोनों का अनुसरण किया। वर्तमान में विद्यालय की छात्र संख्या बढ़कर 49 हो गई है।
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बच्चों की पढ़ाई, जन्मदिन, प्रतियोगिताओं में करते हैं खर्च
बागेश्वर। रौल्यांना के शिक्षक अपने वेतन से हर महीने एक निश्चित राशि को अलग जमा कर देते हैं। इस धन का उपयोग हर महीने बच्चों का सामूहिक जन्मोत्सव मनाने में किया जाता है। कार्यक्रम में केक से लेकर बच्चों की पसंद के उपहार तक का खर्चा इसी राशि से किया जाता है। इसके अलावा विद्यालय में समय-समय पर होने वाली प्रतियोगिताओं में बच्चों के उत्साहवर्धन के लिए आकर्षक उपहार, बच्चों को गर्मियों में टीशर्ट और सर्दियों में ट्रैक सूट वितरण, विदाई समारोह, आनंदम गतिविधि, आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों की कापी, पेन, पेंसिल सहित अन्य खर्च के लिए भी शिक्षकों की जमा की गई राशि का प्रयोग होता है। विद्यालय में रंग रोगन के कार्य के लिए भी शिक्षकों ने अपने वेतन से 40 हजार रुपये की राशि खर्च की है। प्रधानाध्यापक पंत ने बताया कि विद्यालय को सुरक्षित बनाने के लिए ग्राम पंचायत के सहयोग से विद्यालय में सुरक्षा दीवार, फील्ड निर्माण और चाहरदीवारी निर्माण कार्य भी कराया गया है।
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कोरोना काल में घर-घर जाकर दी शिक्षा
बागेश्वर। विद्यालय के शिक्षकों ने कोरोना काल में घर-घर जाकर बच्चों को शिक्षित किया था। प्रधानाध्यापक नीरज पंत बताते हैं कि विद्यालय में पढ़ने वाले अधिकांश बच्चों के पास मोबाइल फोन नहीं थे। तब शिक्षकों ने मिलकर यह निर्णय लिया। इस दौरान रोजाना शिक्षक बच्चों के घर जाते और उन्हें तीन से चार घंटे तक पढ़ाते थे। शिक्षकों की इस मुहिम से आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को काफी मदद मिली।