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भाषण प्रतियोगिता में संगीता और पोस्टर में निम्मी ने मारी बाजी
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बागेश्वर के कृषि विज्ञान केंद्र प्रतिभागी को पुरस्कार देते आयोजक। विज्ञप्ति
- फोटो : BAGESHWAR
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बागेश्वर। कृषि विज्ञान केंद्र काफलीगैर में गाजर घास उन्मूलन सप्ताह के समापन पर जागरूकता गोष्ठी और प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। गोष्ठी में काश्तकारों को गाजर घास से होने वाले नुकसान बताए गए। भाषण और पोस्टर प्रतियोगिता में विवेकानंद विद्या मंदिर इंटर कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने भागीदारी की। भाषण में संगीता जोशी और पोस्टर प्रतियोगिता में निम्मी रौतेला ने पहला स्थान हासिल किया। विजेता प्रतिभागियों को आकर्षक पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
जागरूकता कार्यक्रम भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद दिल्ली के निर्देश पर हुआ। गोष्ठी का शुभारंभ करते हुए कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉ. कमल कुमार पांडेय ने बताया कि गाजर घास पर्यावरण के लिए हानिकारक होने के साथ कृषि उपज को भी प्रभावित करती है। 1950 के दशक में अमेरिका से गेहूं के साथ आई यह घास पहाड़ी प्रदेशों में भी जैव विविधता को नुकसान करने के साथ फसल, पशु और मनुष्य के स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही है। गाजर घास से मनुष्य में एलर्जी, चर्म रोग, अस्थमा जैसी बीमारी होती है तो पशुओं में यह आंत का अल्सर और दूध कम करने जैसा प्रभाव डाल रहा है। क्षेत्रीय प्रबंधक मेंदनी प्रताप सिंह ने गाजर घास की पहचान, जीवन चक्र, रासायनिक और भौतिक प्रबंधन की जानकारी दी। केंद्र के कर्मचारियों ने प्रशासनिक भवन, बाजार और आसपास के क्षेत्र में अभियान चलाकर गाजर घास का उन्मूलन भी किया।
कार्यक्रम के तहत कराई गई भाषण प्रतियोगिता में मनीषा तिवारी ने दूसरा और रेशमी रौतेला ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। पोस्टर प्रतियोगिता में खुशबू टम्टा और दीपिका बिष्ट क्रमश: दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे। विजेता प्रतिभागियों को केंद्र प्रभारी ने पुरस्कृत किया। इस मौके पर तकनीकी अधिकारी निधि सिंह, जानकी मेहता, बहादुर सिंह आदि मौजूद रहे।
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जागरूकता कार्यक्रम भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद दिल्ली के निर्देश पर हुआ। गोष्ठी का शुभारंभ करते हुए कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉ. कमल कुमार पांडेय ने बताया कि गाजर घास पर्यावरण के लिए हानिकारक होने के साथ कृषि उपज को भी प्रभावित करती है। 1950 के दशक में अमेरिका से गेहूं के साथ आई यह घास पहाड़ी प्रदेशों में भी जैव विविधता को नुकसान करने के साथ फसल, पशु और मनुष्य के स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही है। गाजर घास से मनुष्य में एलर्जी, चर्म रोग, अस्थमा जैसी बीमारी होती है तो पशुओं में यह आंत का अल्सर और दूध कम करने जैसा प्रभाव डाल रहा है। क्षेत्रीय प्रबंधक मेंदनी प्रताप सिंह ने गाजर घास की पहचान, जीवन चक्र, रासायनिक और भौतिक प्रबंधन की जानकारी दी। केंद्र के कर्मचारियों ने प्रशासनिक भवन, बाजार और आसपास के क्षेत्र में अभियान चलाकर गाजर घास का उन्मूलन भी किया।
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कार्यक्रम के तहत कराई गई भाषण प्रतियोगिता में मनीषा तिवारी ने दूसरा और रेशमी रौतेला ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। पोस्टर प्रतियोगिता में खुशबू टम्टा और दीपिका बिष्ट क्रमश: दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे। विजेता प्रतिभागियों को केंद्र प्रभारी ने पुरस्कृत किया। इस मौके पर तकनीकी अधिकारी निधि सिंह, जानकी मेहता, बहादुर सिंह आदि मौजूद रहे।
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