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हिमालयी क्षेत्र के खाती अस्पताल में 6 महीने से डॉक्टर नहीं

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Tue, 10 May 2022 11:52 PM IST
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Health
बागेश्वर के खाती गांव में बने अस्पताल के भवन। विज्ञप्ति - फोटो : BAGESHWAR
बागेश्वर। पिंडारी ग्लेशियर रूट पर हिमालय की तलहटी पर बसे खाती गांव के अस्पताल में छह माह से एमबीबीएस डॉक्टर नहीं है। अस्पताल में लैब तकनीशियन के साथ ही जेएनएम और एएनएम के पद भी रिक्त हैं। अस्पताल में डॉक्टर और स्टाफ की कमी होने से लोगों को स्वास्थ्य सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। अस्पताल पर खाती की चार सौ आबादी के साथ ही आसपास के गांवों के लोग निर्भर हैं।
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वर्ष 2018 में खोले गए खाती के अस्पताल का संचालन हंस फाउंडेशन करती है। इसके लिए फाउंडेशन का सरकार से एमओयू हुआ है। अस्पताल की व्यवस्थाएं हंस फाउंडेशन की सहयोगी संस्था करुणा ट्रस्ट देखती थी। इस अप्रैल से हंस फाउंडेशन अस्पताल की जिम्मेदारी स्वयं संभाल रहा है। अस्पताल में एमबीबीएस चिकित्सक के साथ ही आयुष चिकित्सक, फार्मासिस्ट, एक जेएनएम, तीन एनएनएम और लैब तकनीशियन की तैनाती थी। महिलाओं के प्रसव भी अस्पताल में होने लगे थे।
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अस्पताल में बीते नवंबर माह से एमबीबीएस डॉक्टर नहीं है। जेएनएम और दो एएनएम के साथ ही लैब तकनीशियन का पद भी रिक्त चल रहा है। एमबीबीएस डॉक्टर के साथ ही अन्य स्टाफ की कमी के कारण उच्च क्षेत्र के इस गांव के साथ ही आसपास के गांवों के लोगों को स्वास्थ्य सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इन लोगों को इलाज के लिए 46 किमी दूर कपकोट या 70 किमी दूर बागेश्वर आना पड़ रहा है। क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता तारा सिंह दानू ने अस्पताल में डॉक्टर के साथ ही अन्य पदों पर नियुक्ति की मांग करते हुए कहा कि अव्यवस्था लोगों पर भारी पड़ रही है।
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अस्पताल में दवाओं का भी टोटा
बागेश्वर। खाती के अस्पताल में दवाओं की भी कमी बनी हुई है। अस्पताल से दवा न मिलने से लोग दवाओं के लिए भी बाजार पर निर्भर हो गए हैं।
कोट
खाती के अस्पताल को पहले हंस का सहयोगी करुणा ट्रस्ट संचालित करता था। इसी अप्रैल से हंस फाउंडेशन ने अस्पताल का पूरा काम अपने हाथ में ले लिया है। जल्द ही अस्पताल में एमबीबीएस डॉक्टर के साथ ही अन्य स्टाफ की तैनाती होगी। 123 दवाओं की डिमांड फाउंडेशन प्रबंधन को भेजी गई है।
एनबी अवस्थी कंसलटेंट हंस फाउंडेशन
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