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हरखोला के ललित को मिला उत्तराखंड रत्न सम्मान
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देहरादून में उत्तराखंड रत्न सम्मान प्राप्त करते ललित जोशी। संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : BAGESHWAR
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बागेश्वर। नशे के खिलाफ देशव्यापी मुहिम चलाने वाले काफलीगैर तहसील के हरखोला गांव निवासी ललित जोशी को उत्तराखंड रत्न से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान उन्हें सीआईएमएस कॉलेज देहरादून में हुए ऑल इंडिया कांफ्रेंस ऑफ इंटलेक्च्युअल के 42वें अधिवेशन में मिला। कार्यक्रम में मानवता के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए कुल 20 लोगों को सम्मानित किया गया।
हरखोला गांव निवासी रमेेश जोशी और जानकी जोशी के घर जन्मे ललित ने आठवीं तक की शिक्षा गांव के विद्यालय में और आगे की शिक्षा हल्द्वानी से पूरी की। देहरादून से एमबीए करने के बाद उन्होंने विदेशों में नौकरी की। कॉलेज की शिक्षा के दौरान उन्होंने नशामुक्ति अभियान में भागीदारी करनी शुरू कर दी। 2010 में विदेश से लौटने के बाद उन्होंने वकालत की पढ़ाई शुरू की और सक्रिय रूप से नशे के खिलाफ मुहिम में भी जुट गए। उन्होंने सजग इंडिया संस्था की पहल पर नशे को ना, जिंदगी को हां कार्यक्रम की नींव रखी। अपनी इस मुहिम को उन्होंने प्रदेश के स्कूल, कॉलेजों से शुरू किया। अब तक वह एक हजार विद्यालयों में जाकर पांच लाख से अधिक छात्र-छात्राओं और युवाओं को नशे से दूर रहने के लिए जागरूक कर चुके हैं।
नशे के खिलाफ वह सोशल मीडिया के जरिये अभियान चला रहे हैं। यू टयूब चैनल के जरिये वह रोज नशे की बुराई बताकर लोगों को नशे से दूर रहने को प्रेरित करते हैं। उनकी इस मुहिम के चलते ही ऑल इंडिया कांफ्रेंस ऑफ इंटलेक्च्युअल संस्था ने उन्हें उत्तराखंड रत्न के लिए चुना। प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत, पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार, प्लानिंग कमीशन के डिप्टी चेयरमैन विनय रोहेला, श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय के कुलपति पीवी ध्यानी की मौजूदगी में उन्हें सम्मानित किया गया।
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कई सम्मान कर चुके हैं हासिल
बागेश्वर। उत्तराखंड रत्न से सम्मानित होने से पूर्व भी ललित को नशे के खिलाफ मुहिम चलाने के लिए कई बार सम्मानित किया जा चुका है। वर्ष 2018 में उन्हें पुलिस वीरता सम्मान, यूथ आइकन नेशलन अवॉर्ड, राज्य वाद्य यंत्र सम्मान, युवा आह्वान सम्मान और हिमालय रत्न सम्मान से सम्मानित किया गया। 2019 में उन्हें कूर्मांचल रत्न सम्मान मिला। स्वामी विवेकानंद की जयंती युवा दिवस पर उन्हें उत्तराखंड युवा सम्मान से भी नवाजा जा चुका है। (संवाद)
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हरखोला गांव निवासी रमेेश जोशी और जानकी जोशी के घर जन्मे ललित ने आठवीं तक की शिक्षा गांव के विद्यालय में और आगे की शिक्षा हल्द्वानी से पूरी की। देहरादून से एमबीए करने के बाद उन्होंने विदेशों में नौकरी की। कॉलेज की शिक्षा के दौरान उन्होंने नशामुक्ति अभियान में भागीदारी करनी शुरू कर दी। 2010 में विदेश से लौटने के बाद उन्होंने वकालत की पढ़ाई शुरू की और सक्रिय रूप से नशे के खिलाफ मुहिम में भी जुट गए। उन्होंने सजग इंडिया संस्था की पहल पर नशे को ना, जिंदगी को हां कार्यक्रम की नींव रखी। अपनी इस मुहिम को उन्होंने प्रदेश के स्कूल, कॉलेजों से शुरू किया। अब तक वह एक हजार विद्यालयों में जाकर पांच लाख से अधिक छात्र-छात्राओं और युवाओं को नशे से दूर रहने के लिए जागरूक कर चुके हैं।
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नशे के खिलाफ वह सोशल मीडिया के जरिये अभियान चला रहे हैं। यू टयूब चैनल के जरिये वह रोज नशे की बुराई बताकर लोगों को नशे से दूर रहने को प्रेरित करते हैं। उनकी इस मुहिम के चलते ही ऑल इंडिया कांफ्रेंस ऑफ इंटलेक्च्युअल संस्था ने उन्हें उत्तराखंड रत्न के लिए चुना। प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत, पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार, प्लानिंग कमीशन के डिप्टी चेयरमैन विनय रोहेला, श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय के कुलपति पीवी ध्यानी की मौजूदगी में उन्हें सम्मानित किया गया।
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कई सम्मान कर चुके हैं हासिल
बागेश्वर। उत्तराखंड रत्न से सम्मानित होने से पूर्व भी ललित को नशे के खिलाफ मुहिम चलाने के लिए कई बार सम्मानित किया जा चुका है। वर्ष 2018 में उन्हें पुलिस वीरता सम्मान, यूथ आइकन नेशलन अवॉर्ड, राज्य वाद्य यंत्र सम्मान, युवा आह्वान सम्मान और हिमालय रत्न सम्मान से सम्मानित किया गया। 2019 में उन्हें कूर्मांचल रत्न सम्मान मिला। स्वामी विवेकानंद की जयंती युवा दिवस पर उन्हें उत्तराखंड युवा सम्मान से भी नवाजा जा चुका है। (संवाद)