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वीर सपूतों के गांव पहुंची स्वर्णिम विजय मशाल
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बागेश्वर के परमटी गांव में मशाल के साथ खड़े वीरचक्र विजेता के परिजन। संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : BAGESHWAR
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बागेश्वर/कपकोट। वर्ष 1971 की की लड़ाई के 50 वर्ष पूरे होने पर सेना मुख्यालय नई दिल्ली से परमवीर चक्र, महावीर चक्र विजेताओं के गांव की माटी लेने निकली स्वर्णिम विजय मशाल बुधवार को बागेश्वर के दो वीरचक्र विजेताओं के गांव पहुंची। सैन्य अधिकारी वर्ष 1971 की लड़ाई में अदम्य साहस और वीरता का परिचय देने वाले वीरचक्र विजेताओं के गांव की माटी लेकर वापस बागेश्वर लौटे।
बुधवार की सुबह 10 बजे जिला सैनिक कल्याण कार्यालय परिसर में स्वर्णिम विजय मशाल को जिलाधिकारी विनीत कुमार, एसपी मणिशंकर मिश्रा, जिला सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास अधिकारी लेफ्टीनेंट कर्नल (अवकाश प्राप्त) जीएस बिष्ट, सीडीओ डीडी पंत, एसडीएम योगेंद्र सिंह, पुलिस के सीओ विपिन पंत, तहसीलदार नवाजिश खलीक, सहायक जिला सैनिक कल्याण अधिकारी आरसी तिवारी आदि ने पुष्ट चढ़ाए और नमन किया। इसके पश्चात डीएम ने स्वर्णिम विजय मशाल का नेतृत्व कर रहे स्टेशन हेडक्वार्टर रानीखेत के लेफ्टानेंट कर्नल नरेश तिवारी को सौंपी।
लेफ्टीनेंट कर्नल तिवारी के नेतृत्व में मशाल वीरचक्र विजेता स्वर्गीय नंदन सिंह के गांव परमटी (कपकोट) के लिए रवाना हुई। परमटी में वीर चक्र विजेता के एकलौते पुत्र गोकुल सिंह बिष्ट को मशाल सौंपी। वीरचक्र विजेता के परिजनों को मिष्ठान वितरित किया। वीरचक्र विजेता नंदन सिंह की 2016 में और उनकी वीरांगना हिमती देवी की वर्ष 2016 में मृत्यु हो गई थी। वीरचक्र विजेता के पुत्र से गांव की माटी लेकर सैन्य दल सूपी निवासी वीरचक्र विजेता खड़क सिंह के परिजनों से मुलाकात के लिए निकल पड़ा। सूपी में वीरचक्र विजेता की वीरांगना पानुली देवी को स्वर्णिम विजय मशाल सौंपी। परिजनों को मिष्ठान वितरित किया और गांव की लेकर वापस बागेश्वर लौट आए।
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बागेश्वर के 24 जवानों ने दी है 1971 की लड़ाई में शहादत
बागेश्वर। वर्ष 1971 के भारत-पाक युद्ध में बागेश्वर जिले के 24 वीरों ने अपना सर्वस्व न्योछावर करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी। अदम्य साहस के लिए चार जवानों को वीरचक्र से नवाजा गया।
आज धरमघर के स्यांकुरी पहुंचेगी स्वर्णिम विजय मशाल
बागेश्वर। बृहस्पतिवार को स्वर्णिम विजय मशाल एक और वीरचक्र विजेता धरमघर के स्यांकुरी निवासी शंकर दत्त पाठक के गांव पहुंचेगी। वहां वीरचक्र विजेता के परिजनों को सम्मानित करने के बाद गांव की माटी लेकर वापस रानीखेत लौटेगी। चौथे वीरचक्र विजेता रावतसेरा निवासी नायब सुबेदार गंगा सिंह रावत का परिवार पिथौरागढ़ जिले के बेड़ीनाग में रहता है। उनके परिजनों को पिथौरागढ़ बिगेड की सैन्य टुकड़ी की ओर से सम्मानित किया जाएगा।
16 दिसंबर को वापस दिल्ली पहुंचेंगी स्वर्णिम विजय मशालें
बागेश्वर। वर्ष 1971 की विजयी लड़ाई की 50वीं वर्षगांठ पर 16 दिसंबर 2020 को सेना मुख्यालय नई दिल्ली से देशभर में वीरों की गांवों की माटी लेने निकलीं मशालें इस वर्ष 16 दिसंबर को वापस दिल्ली पहुंचेंगी। लेफ्टीनेंट कर्नल नरेश तिवारी ने बताया कि सेना मुख्यालय से चारों दिशाओं के लिए चार स्वर्णिम मशाल निकली हैं। रानीखेत से बागेश्वर पहुंची सैन्य टुकड़ी में 3 जेसीओज, 16 अन्य रेंकों के सैनिक शामिल हैं।
रोमांचित हो उठे गांव के लोग, वीरों के परिजन
कपकोट (बागेश्वर)। स्वर्णिम विजय मशाल वीरचक्र विजेताओं के घर पहुंचने पर वीरों के परिजनों के साथ ही गांव के लोग रोमांचित हो उठे। वीरों के परिजनों ने इसे गौरव का क्षण बताया।
बुधवार की सुबह करीब 12 बजे मशाल वीरचक्र विजेता नंदन सिंह के गांव परमटी पहुंची। वातावरण भारत माता की जय के नारों से गूंज उठा। मशाल की अगवानी के लिए वीरचक्र विजेता के एकलौते पुत्र गोकुल सिंह बिष्ट और उनका परिवार खड़ा था। परिजनों ने मशाल का जोरदार स्वागत किया। हाथ में मशाल लेते समय वीरचक्र विजेता के पुत्र की आंखों में गजब की चमक थी। उनका कहना था कि भारतीय सेना ने वीर सैनिकों के परिवारों के सम्मान की परंपरा को कायम रखा है, यह सुखद है। कृषि कार्य करने वाले गोकुल सिंह का कहना था कि उनके पिता काफी साहसी थे।
इसके पश्चात सेना की मशाल सूपी गांव पहुंची। वीरचक्र विजेता स्वर्गीय खड़क सिंह के वीरांगना पानुली देवी को स्वर्णिम विजय मशाल सौंपी। वीरांगना पानुली देवी और परिजन काफी खुश दिखाई दे रहे थे। उनका कहना था कि उनके पति ने देश की रक्षा के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी थी। उनकी शहादत पर आज भी गुमान होता है। उन्होंने भारतीय सेना के सम्मान की परंपरा की सराहना की और कहा कि आज उन्हें युद्धकाल की याद आ गई। (संवाद)
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बुधवार की सुबह 10 बजे जिला सैनिक कल्याण कार्यालय परिसर में स्वर्णिम विजय मशाल को जिलाधिकारी विनीत कुमार, एसपी मणिशंकर मिश्रा, जिला सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास अधिकारी लेफ्टीनेंट कर्नल (अवकाश प्राप्त) जीएस बिष्ट, सीडीओ डीडी पंत, एसडीएम योगेंद्र सिंह, पुलिस के सीओ विपिन पंत, तहसीलदार नवाजिश खलीक, सहायक जिला सैनिक कल्याण अधिकारी आरसी तिवारी आदि ने पुष्ट चढ़ाए और नमन किया। इसके पश्चात डीएम ने स्वर्णिम विजय मशाल का नेतृत्व कर रहे स्टेशन हेडक्वार्टर रानीखेत के लेफ्टानेंट कर्नल नरेश तिवारी को सौंपी।
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लेफ्टीनेंट कर्नल तिवारी के नेतृत्व में मशाल वीरचक्र विजेता स्वर्गीय नंदन सिंह के गांव परमटी (कपकोट) के लिए रवाना हुई। परमटी में वीर चक्र विजेता के एकलौते पुत्र गोकुल सिंह बिष्ट को मशाल सौंपी। वीरचक्र विजेता के परिजनों को मिष्ठान वितरित किया। वीरचक्र विजेता नंदन सिंह की 2016 में और उनकी वीरांगना हिमती देवी की वर्ष 2016 में मृत्यु हो गई थी। वीरचक्र विजेता के पुत्र से गांव की माटी लेकर सैन्य दल सूपी निवासी वीरचक्र विजेता खड़क सिंह के परिजनों से मुलाकात के लिए निकल पड़ा। सूपी में वीरचक्र विजेता की वीरांगना पानुली देवी को स्वर्णिम विजय मशाल सौंपी। परिजनों को मिष्ठान वितरित किया और गांव की लेकर वापस बागेश्वर लौट आए।
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बागेश्वर के 24 जवानों ने दी है 1971 की लड़ाई में शहादत
बागेश्वर। वर्ष 1971 के भारत-पाक युद्ध में बागेश्वर जिले के 24 वीरों ने अपना सर्वस्व न्योछावर करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी। अदम्य साहस के लिए चार जवानों को वीरचक्र से नवाजा गया।
आज धरमघर के स्यांकुरी पहुंचेगी स्वर्णिम विजय मशाल
बागेश्वर। बृहस्पतिवार को स्वर्णिम विजय मशाल एक और वीरचक्र विजेता धरमघर के स्यांकुरी निवासी शंकर दत्त पाठक के गांव पहुंचेगी। वहां वीरचक्र विजेता के परिजनों को सम्मानित करने के बाद गांव की माटी लेकर वापस रानीखेत लौटेगी। चौथे वीरचक्र विजेता रावतसेरा निवासी नायब सुबेदार गंगा सिंह रावत का परिवार पिथौरागढ़ जिले के बेड़ीनाग में रहता है। उनके परिजनों को पिथौरागढ़ बिगेड की सैन्य टुकड़ी की ओर से सम्मानित किया जाएगा।
16 दिसंबर को वापस दिल्ली पहुंचेंगी स्वर्णिम विजय मशालें
बागेश्वर। वर्ष 1971 की विजयी लड़ाई की 50वीं वर्षगांठ पर 16 दिसंबर 2020 को सेना मुख्यालय नई दिल्ली से देशभर में वीरों की गांवों की माटी लेने निकलीं मशालें इस वर्ष 16 दिसंबर को वापस दिल्ली पहुंचेंगी। लेफ्टीनेंट कर्नल नरेश तिवारी ने बताया कि सेना मुख्यालय से चारों दिशाओं के लिए चार स्वर्णिम मशाल निकली हैं। रानीखेत से बागेश्वर पहुंची सैन्य टुकड़ी में 3 जेसीओज, 16 अन्य रेंकों के सैनिक शामिल हैं।
रोमांचित हो उठे गांव के लोग, वीरों के परिजन
कपकोट (बागेश्वर)। स्वर्णिम विजय मशाल वीरचक्र विजेताओं के घर पहुंचने पर वीरों के परिजनों के साथ ही गांव के लोग रोमांचित हो उठे। वीरों के परिजनों ने इसे गौरव का क्षण बताया।
बुधवार की सुबह करीब 12 बजे मशाल वीरचक्र विजेता नंदन सिंह के गांव परमटी पहुंची। वातावरण भारत माता की जय के नारों से गूंज उठा। मशाल की अगवानी के लिए वीरचक्र विजेता के एकलौते पुत्र गोकुल सिंह बिष्ट और उनका परिवार खड़ा था। परिजनों ने मशाल का जोरदार स्वागत किया। हाथ में मशाल लेते समय वीरचक्र विजेता के पुत्र की आंखों में गजब की चमक थी। उनका कहना था कि भारतीय सेना ने वीर सैनिकों के परिवारों के सम्मान की परंपरा को कायम रखा है, यह सुखद है। कृषि कार्य करने वाले गोकुल सिंह का कहना था कि उनके पिता काफी साहसी थे।
इसके पश्चात सेना की मशाल सूपी गांव पहुंची। वीरचक्र विजेता स्वर्गीय खड़क सिंह के वीरांगना पानुली देवी को स्वर्णिम विजय मशाल सौंपी। वीरांगना पानुली देवी और परिजन काफी खुश दिखाई दे रहे थे। उनका कहना था कि उनके पति ने देश की रक्षा के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी थी। उनकी शहादत पर आज भी गुमान होता है। उन्होंने भारतीय सेना के सम्मान की परंपरा की सराहना की और कहा कि आज उन्हें युद्धकाल की याद आ गई। (संवाद)

कपकोट के परमटी में वीरचक्र विजेता स्वर्गीय नंदन सिंह के चित्र के पास रखी स्वर्णिम विजय मशाल। संव?- फोटो : BAGESHWAR

बागेश्वर में सैन्य अधिकारियों को स्वर्णिम विजय मशाल सौंपते जिलाधिकारी विनीत कुमार। संवाद न्यू?- फोटो : BAGESHWAR