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कस्तूरा अनुसंधान केंद्र में तीन साल से प्रजनन का काम बंद
भक्त दर्शन पांडेय, बागेश्वर।
Updated Wed, 31 Jan 2018 10:46 PM IST
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musk deer
- फोटो : amar ujala
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कुमाऊं के एकमात्र कस्तूरा मृग अनुसंधान केंद्र में तीन वर्षों से प्रजनन का कार्य बंद है। प्रजनन नहीं होने से इस केंद्र में अब कस्तूरा मृगों की संख्या घटकर 16 रह गई है।
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स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से 1974 में जिले के महरूड़ी धरमघर में कस्तूरा मृग अनुसंधान केंद्र स्थापित किया गया था। इस केंद्र का उद्देश्य कस्तूरा मृगों का प्रजनन कराकर उनकी संख्या बढ़ाना और नर मृगों से कस्तूरी निकालकर आयुर्वेदिक यूनानी दवाएं बनाने के लिए देश भर के शोध संस्थानों को उपलब्ध कराना था।
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कस्तूरी को भेषज विज्ञान के पटियाला, कोलकाता,ग्वालियर और केरल स्थित अनुसंधान केंद्रों को भेजा जाता था। 2004 में आयुष मंत्रालय ने इस केंद्र को बंद कर वन विभाग को सौंपने के निर्देश दिए थे। 13 साल बीतने के बाद भी केंद्र हस्तांतरित नहीं हुआ है।
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कस्तूरी मृगों को नैनीताल स्थित चड़ियाघर में भेजने की प्रक्रिया भी आगे नहीं बढ़ सकी। इस बीच राज्य के वन्य जंतु प्रतिपालक की ओर से 2010 में कस्तूरी निकालने पर रोक लगा दी गई। इससे हर साल लगभग एक करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। इसके बाद 2015 में वन विभाग ने कस्तूरी मृगों के प्रजनन पर भी रोक लगा दी।
अब तीन वर्षों से प्रजनन का कार्य बंद है। प्रजनन नहीं होने से कस्तूरी मृगों की संख्या में बढ़ोत्तरी नहीं हो पा रही है। पिछले साल तीन कस्तूरी मृगों की मौत के बाद संस्थान में मात्र 16 कस्तूरा रह गए हैं। इनमें नौ नर और सात मादा कस्तूरी मृग शामिल हैं। आयुष मंत्रालय और वन विभाग में तालमेल की कमी के कारण कस्तूरी मृगों को नैनीताल जू में भेजने की प्रक्रिया भी ठंडे बस्ते में है।
नर कस्तूरी मृगों की नाभि में पाई जाती है कस्तूरी
कस्तूरी नर मृगों की नाभि में पाई जाती है। कस्तूरी जुलाई से अगस्त में तैयार होती है। इसे सितंबर-अक्तूबर में निकाला जाता है। कस्तूरी निकालने की प्रक्रिया वन और पशु चिकित्सा विभाग के सलाहकारों सहित चार सदस्यीय टीम की देखरेख में होती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक ग्राम कस्तूरी की कीमत 80 हजार रुपये हैं। एक नर कस्तूरी से 15 से 20 ग्राम कस्तूरी निकल सकती है।
अनुसंधान केंद्र में 2015 से कस्तूरी मृगों में प्रजनन नहीं कराया जा रहा है। इस केंद्र को नैनीताल जू को हस्तांतरण करने की कार्रवाई उच्च स्तर पर चल रही है। उच्चाधिकारी स्तर से दिशा निर्देशों के अनुसार ही कार्य किया जाएगा। - डॉ. ललित मोहन नयाल, प्रभारी कस्तूरा मृग अनुसंधान केंद्र धरमघर, बागेश्वर।