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बागेश्वर में ट्राउट मछली पालन से आत्मनिर्भर बन रहे लोग
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कपकोट के जगथाना में तालाब से निकाली गई मछली के साथ चंदन दानू। विज्ञप्ति
- फोटो : BAGESHWAR
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बागेश्वर। कमाई बढ़ने के साथ ही किसानों को मत्स्य पालन रास आने लगा है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत कपकोट में ट्राउट मछली के पालन से मत्स्य पालक आत्मनिर्भर बन रहे हैं। जिले में पहली बार ट्राउट मत्स्य पालन की शुरूआत की गई है। जिले में प्रतिवर्ष 120 मीट्रिक टन मत्स्य उत्पादन हो रहा है। करीब चार सौ लोग इस व्यवसाय से जुड़े हैं।
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत चार समितियों के 65 लाभार्थी क्लस्टर आधार पर ट्राउट प्रजाति की मछली का पालन कर आर्थिकी सुधार रहे हैं। जगथाना, चचई और लीती में करीब 20 नाली भूमि में ट्राउट प्रजाति की मछली का उत्पादन किया जा रहा है। इससे किसानों की आर्थिकी सुधरने के साथ ही वह आत्मनिर्भर भी बन रहे हैं।
वित्तीय वर्ष 20-21 में 65 लोगों ने योजना के लिए आवेदन किया था, जिन्हें समितियों में गठित कर विभाग की ओर से लाभान्वित किया गया। मत्स्य विभाग को योजना के तहत पिछले वित्तीय वर्ष में 30 लाख रुपये मिले। इसका उपयोग ट्राउट मत्स्य पालन में किया गया। लाभार्थियों को 50 प्रतिशत अनुदान पर योजना का लाभ मिल रहा है। वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए पांच समितियों का चयन किया गया है। इसके लिए फिलहाल वित्तीय सहायता विभाग को नहीं मिली। इस कारण किसानों को इस वर्ष योजना का लाभ अभी नहीं मिल पाया है।
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कम तापमान में होता है ट्राउट का पालन
बागेश्वर। मत्स्य अधिकारी मनोज मियान ने बताया कि ट्राउट प्रजाति की मछली के पालन के लिए कम तापमान की जरूरत है। इसके लिए कम से कम 10-15 डिग्री तापमान वाले स्थानों को चुना जाता है। ठंडे तापमान के कारण कपकोट के जगथाना, लीती, चचई में किसान ट्राउट मछली का उत्पादन कर रहे हैं।
पहले सीजन में 10 लाख मुनाफा
बागेश्वर। जिले में पहली बार ट्राउट प्रजाति की मछली का पालन किया गया है। बाजार में ट्राउट मछली की कीमत 1000-1200 रुपये प्रति किलो है। कपकोट में इस मछली के उत्पादन से किसानों ने पहले सीजन में 10 लाख का मुनाफा कमाया। कपकोट, बागेश्वर में ही यह मछली आसानी से बिक जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार दिल के मरीजों के लिए ट्राउट फायदेमंद है।
मत्स्य कार्यालय से निशुल्क मिलते हैं मत्स्य बीज
बागेश्वर। वरिष्ठ मत्स्य निरीक्षक मनोज मियान ने बताया कि मछली पालक कार्यालय में मछली बीज के लिए फोन से भी मांग भेज सकते हैं। कार्यालय आकर भी बीज की डिमांड दे सकते हैं। मांग के आधार पर मछली के बीज मंगाकर मछली पालकों को निशुल्क दिए जाते हैं।
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत जिले में पहली बार ट्राउट प्रजाति की मछली का उत्पादन किया गया है। पहले सीजन में लाभार्थियों ने ट्राउट मछली के उत्पादन से 10 लाख का मुनाफा कमाया। वित्तीय वर्ष 21-22 के लिए पांच समितियों का चयन किया गया है। बजट मिलते ही किसानों को लाभान्वित किया जाएगा।
- मनोज मियान, जिला मत्स्य अधिकारी।
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प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत चार समितियों के 65 लाभार्थी क्लस्टर आधार पर ट्राउट प्रजाति की मछली का पालन कर आर्थिकी सुधार रहे हैं। जगथाना, चचई और लीती में करीब 20 नाली भूमि में ट्राउट प्रजाति की मछली का उत्पादन किया जा रहा है। इससे किसानों की आर्थिकी सुधरने के साथ ही वह आत्मनिर्भर भी बन रहे हैं।
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वित्तीय वर्ष 20-21 में 65 लोगों ने योजना के लिए आवेदन किया था, जिन्हें समितियों में गठित कर विभाग की ओर से लाभान्वित किया गया। मत्स्य विभाग को योजना के तहत पिछले वित्तीय वर्ष में 30 लाख रुपये मिले। इसका उपयोग ट्राउट मत्स्य पालन में किया गया। लाभार्थियों को 50 प्रतिशत अनुदान पर योजना का लाभ मिल रहा है। वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए पांच समितियों का चयन किया गया है। इसके लिए फिलहाल वित्तीय सहायता विभाग को नहीं मिली। इस कारण किसानों को इस वर्ष योजना का लाभ अभी नहीं मिल पाया है।
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कम तापमान में होता है ट्राउट का पालन
बागेश्वर। मत्स्य अधिकारी मनोज मियान ने बताया कि ट्राउट प्रजाति की मछली के पालन के लिए कम तापमान की जरूरत है। इसके लिए कम से कम 10-15 डिग्री तापमान वाले स्थानों को चुना जाता है। ठंडे तापमान के कारण कपकोट के जगथाना, लीती, चचई में किसान ट्राउट मछली का उत्पादन कर रहे हैं।
पहले सीजन में 10 लाख मुनाफा
बागेश्वर। जिले में पहली बार ट्राउट प्रजाति की मछली का पालन किया गया है। बाजार में ट्राउट मछली की कीमत 1000-1200 रुपये प्रति किलो है। कपकोट में इस मछली के उत्पादन से किसानों ने पहले सीजन में 10 लाख का मुनाफा कमाया। कपकोट, बागेश्वर में ही यह मछली आसानी से बिक जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार दिल के मरीजों के लिए ट्राउट फायदेमंद है।
मत्स्य कार्यालय से निशुल्क मिलते हैं मत्स्य बीज
बागेश्वर। वरिष्ठ मत्स्य निरीक्षक मनोज मियान ने बताया कि मछली पालक कार्यालय में मछली बीज के लिए फोन से भी मांग भेज सकते हैं। कार्यालय आकर भी बीज की डिमांड दे सकते हैं। मांग के आधार पर मछली के बीज मंगाकर मछली पालकों को निशुल्क दिए जाते हैं।
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत जिले में पहली बार ट्राउट प्रजाति की मछली का उत्पादन किया गया है। पहले सीजन में लाभार्थियों ने ट्राउट मछली के उत्पादन से 10 लाख का मुनाफा कमाया। वित्तीय वर्ष 21-22 के लिए पांच समितियों का चयन किया गया है। बजट मिलते ही किसानों को लाभान्वित किया जाएगा।
- मनोज मियान, जिला मत्स्य अधिकारी।