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ओलावृष्टि से फसल तबाह, बीज लायक भी नहीं बचा गेहूं
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कपकोट के लीती में गन्ने की फसल को पहुंचा नुकसान। संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : AMAR UJALA
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बागेश्वर। कपकोट विधानसभा क्षेत्र में विगत दिनों हुई ओलावृष्टि ने किसानों की कमर तोड़ दी है। पकी फसल नष्ट होने से किसानों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है। कई स्थानों पर बीज लायक भी गेहूं नहीं बचा है। जिले में 2400 हेक्टेयर में रबी की फसल होती है। ओलावृष्टि से 670 हेक्टेयर क्षेत्र में फसल प्रभावित हुई है। शुक्रवार को छोड़कर पिछले चार दिन कपकोट क्षेत्र में लगातार ओलावृष्टि हुई। ओलावृष्टि से लीती, सुमगढ़, लोहारखेत, सूपी के साथ ही तमाम गांवों में खेती को जबरदस्त नुकसान हुआ है। गरुड़ के मजकोट में भी ओलावृष्टि से किसानों की कमर टूट गई है। कपकोट के लीती में गन्ने की खेती भी चौपट हो गई है। कपकोट के पूर्व विधायक ललित फर्स्वाण ने ओलावृष्टि से खेती को हुए नुकसान पर चिंता प्रकट करते हुए कहा है कि किसान भारी विपदा में फंस गए हैं। किसानों का वर्षभर खाने के लिए राशन हो जाता था लेकिन इस बार एक महीने के लिए भी राशन नहीं होगा। फर्स्वाण ने क्षति का आंकलन कर किसानों को पर्याप्त मुआवजा देने की मांग की है।
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-:: क्या बोले अफसर ::- "जिलेभर में 15 से 20 प्रतिशत प्रभावित हुई है। गरुड़ के मजकोट में खेती को 55 प्रतिशत नुकसान हुआ है। तमाम क्षेत्रों में नुकसान का आंकलन कर लिया गया है। लीती और गरुड़ क्षेत्र में आंकलन कराया जा रहा है। 670 हेक्टयर क्षेत्रफल में कृषि और 189 हेक्टेयर में उद्यान प्रभावित हुए हैं।" -विजय प्रकाश मौर्य मुख्य कृषि अधिकारी बागेश्वर
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कपकोट के लीती में ओलावृष्टि से गेहूं की फसल को पहुंचा नुकसान। संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : AMAR UJALA
कपकोट के लीती में ओलावृष्टि से गेहूं की फसल को पहुंचा नुकसान। संवाद न्यूज एजेंसी