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Bageshwar News: बारिश नहीं होने से चैती धान की बुवाई नहीं कर पा रहे काश्तकार
Mon, 08 Apr 2024 11:39 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
Updated Mon, 08 Apr 2024 11:39 PM IST
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गरुड़ (बागेश्वर)। लंबे समय से बारिश नहीं होने के कारण जिले में सिंचित और असिंचित क्षेत्र के काश्तकार चैती धान (चैत माह में उगाया जाने वाला धान) की बुवाई नहीं कर पा रहे हैं। बारिश ना होने के कारण बुवाई प्रभावित हो रही है। पहाड़ में सिंचाई का साधन नहीं होने के कारण किसान केवल बारिश पर ही निर्भर रहते हैं, ऐसे में बारिश नहीं हुई तो किसान बुवाई नहीं कर पाएंगे। उड़खुली गांव के किसान हिम्मत राम, लोहारचौरा गांव निवासी धनराज दानू, रतमटिया गांव निवासी मनोज बिष्ट ने बताया गांव के किसान आज भी चैती धान की खेती करते हैं। चैती धान के चावल की बाजार में दिन प्रतिदिन मांग बढ़ रही है।
उगाई जाती हैं धान की ये प्रजाति
सिंचित और असिंचित दोनों क्षेत्र में मार्च से अप्रैल में पुराना धान की बुवाई होती है। गरुड़ ब्लॉक के काश्तकार इस धान की काफी मात्रा में बुवाई करते हैं। जिले में कुल 15 हजार हेक्टेयर में धान की फसल की खेती होती है। इसमें गरुड़ ब्लॉक में सर्वाधिक धान होता है। सिंचित भूमि में बीएल 85,65 प्रजाति धान की खेती होती है। जबकि असिंचित भूमि में बीएल 207 की फसल होती है।
जिला कृषि अधिकारी सुरेंद्र कुमार ने बताया कि जिले के असिंचित क्षेत्र में अधिकांश काश्तकार चैती धान पैदा करते है। चैती धान की समय पर बुआई जरूरी है। इसलिए इस प्रजाति की बुवाई चैत माह में जरूरी है। यह प्रजाति देर में पक कर तैयार होती है। काश्तकारों को बारिश होते ही इस धान की बुवाई कर देसी चाहिए। देर में बुवाई होने से उत्पादन कम होगा।
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उगाई जाती हैं धान की ये प्रजाति
सिंचित और असिंचित दोनों क्षेत्र में मार्च से अप्रैल में पुराना धान की बुवाई होती है। गरुड़ ब्लॉक के काश्तकार इस धान की काफी मात्रा में बुवाई करते हैं। जिले में कुल 15 हजार हेक्टेयर में धान की फसल की खेती होती है। इसमें गरुड़ ब्लॉक में सर्वाधिक धान होता है। सिंचित भूमि में बीएल 85,65 प्रजाति धान की खेती होती है। जबकि असिंचित भूमि में बीएल 207 की फसल होती है।
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जिला कृषि अधिकारी सुरेंद्र कुमार ने बताया कि जिले के असिंचित क्षेत्र में अधिकांश काश्तकार चैती धान पैदा करते है। चैती धान की समय पर बुआई जरूरी है। इसलिए इस प्रजाति की बुवाई चैत माह में जरूरी है। यह प्रजाति देर में पक कर तैयार होती है। काश्तकारों को बारिश होते ही इस धान की बुवाई कर देसी चाहिए। देर में बुवाई होने से उत्पादन कम होगा।
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