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पहचान के संकट से जूझ रही जोगाबाड़ी की गुफा
अमर उजाला ब्यूरो, बागेश्वर
Updated Sun, 19 Feb 2017 10:09 PM IST
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जोगाबाड़ी गुफा
- फोटो : अमर उजाला
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कांडा के समीप जोगाबाड़ी की खूबसूरत प्राकृतिक गुफा पर्यटन से नहीं जुड़ सकी। इसके अंदर बहता सुंदर झरना, छोटी सी झील और वहां बनी मन मोहक आकृतियां प्रकृति की अनूठी धरोहरें हैं। इसके विकास के लिए पर्यटन विभाग ने तीन साल पूर्व 45 लाख का प्रस्ताव भेजा था।
कांडा बाजार से लगभग तीन किमी नीचे जोगाबाड़ी की इस गुफा से बाहर की दुनिया बेखबर है। गुफा का प्रवेश द्वार अत्यधिक संकरा होने के कारण पेट के बल घिसटकर जाना पड़ता है, किंतु अंदर की दुनिया विलक्षण है। इस गुफा की लंबाई लगभग दस मीटर, चौड़ाई छह मीटर तथा ऊंचाई तकरीबन सात फीट है। गुफा के अंदरूनी छोर से एक झरना बहता है। इससे गुफा हमेशा ही झील की तरह लबालब भरी रहती है। गर्मियों में भी यहां दो फीट तक पानी रहता है। झरने का यह पानी नाले से होता हुआ भद्रकाली नदी में मिल जाता है।
इस गुफा में सबसे हैरत में डालने वाली चीजें सफेद और कुछ अन्य रंगों की चट्टानों पर बनी आकृतियां हैं। गुफा की दीवारों से लेकर छत तक ऐसी दर्जनों आकृतियों से भरी पड़ी है। चार साल पहले इस गुफा को खोजने वाले सामाजिक कार्यकर्ता अर्जुन माजिला ने बताया कि इस स्थल के विकास को लगातार मांग की जा रही है। लेकिन अभी तक इस मामले में कुछ नहीं हुआ है। पर्यटन विभाग की ओर से शासन को भेजा गया 45 लाख का प्रस्ताव अभी भी ठंडे बस्ते में पड़ा है।
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कांडा बाजार से लगभग तीन किमी नीचे जोगाबाड़ी की इस गुफा से बाहर की दुनिया बेखबर है। गुफा का प्रवेश द्वार अत्यधिक संकरा होने के कारण पेट के बल घिसटकर जाना पड़ता है, किंतु अंदर की दुनिया विलक्षण है। इस गुफा की लंबाई लगभग दस मीटर, चौड़ाई छह मीटर तथा ऊंचाई तकरीबन सात फीट है। गुफा के अंदरूनी छोर से एक झरना बहता है। इससे गुफा हमेशा ही झील की तरह लबालब भरी रहती है। गर्मियों में भी यहां दो फीट तक पानी रहता है। झरने का यह पानी नाले से होता हुआ भद्रकाली नदी में मिल जाता है।
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इस गुफा में सबसे हैरत में डालने वाली चीजें सफेद और कुछ अन्य रंगों की चट्टानों पर बनी आकृतियां हैं। गुफा की दीवारों से लेकर छत तक ऐसी दर्जनों आकृतियों से भरी पड़ी है। चार साल पहले इस गुफा को खोजने वाले सामाजिक कार्यकर्ता अर्जुन माजिला ने बताया कि इस स्थल के विकास को लगातार मांग की जा रही है। लेकिन अभी तक इस मामले में कुछ नहीं हुआ है। पर्यटन विभाग की ओर से शासन को भेजा गया 45 लाख का प्रस्ताव अभी भी ठंडे बस्ते में पड़ा है।
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