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पिथौरागढ़ से बागेश्वर पहुंची छड़ी यात्रा का हुआ भव्य स्वागत
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बागेश्वर के बागनाथ मंदिर में पहुंचे पवित्र छड़ी यात्रा के यात्री। संवाद
- फोटो : BAGESHWAR
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बागेश्वर। पंच दशनाम जूना अखाड़ा की पवित्र छड़ी यात्रा पिथौरागढ़ से बागेश्वर पहुंची। जिले के बागनाथ मंदिर में यात्रा का भव्य स्वागत हुआ। यात्रियों ने भगवान शिव का जलाभिषेक कर पूजा अर्चना की। एक नवंबर को हरिद्वार के मायादेवी मंदिर में यात्रा का समापन होगा।
मान्यता है कि पवित्र छड़ी यात्रा की शुरुआत करीब ढाई हजार साल पहले की थी। इस वर्ष यात्रा का शुभारंभ विगत 24 सितंबर को हरिद्वार से हुआ था। यात्रा हरिद्वार से बागेश्वर आई थी और 25 सितंबर को हरिद्वार रवाना हो गई थी। 26 सितंबर से छह अक्तूबर तक यात्रा हरिद्वार के सभी अखाड़ों में गई। सात, आठ अक्तूबर को हरिद्वार के विभिन्न मंदिरों में भ्रमण के बाद यात्रा नौ अक्तूबर को ऋषिकेश पहुंची। यहां से विभिन्न जिलों का भ्रमण कर छड़ी यात्रा 21 अक्तूबर को कौसानी आई।
22 अक्तूबर को गरुड़, बैजनाथ होते हुए बागेश्वर पहुंची थी। बागेश्वर से 23 अक्तूबर को जागेश्वर होते हुए पिथौरागढ़ रवाना हुई थी। अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ के विभिन्न धार्मिक स्थलों का भ्रमण कर यात्रा शनिवार को बागेश्वर लौटी। बागेश्वर से यात्रा बिनसर महादेव रानीखेत रवाना होगी। वहां पर महंत शंकर गिरी महाराज, छड़ी महंत पुष्कर गिरी, महामंडलेश्वर कपिल पुरी महाराज, छड़ी महंत शिवदत्त गिरी, मंत्री मोहन भारती महाराज आदि मौजूद रहे।
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मान्यता है कि पवित्र छड़ी यात्रा की शुरुआत करीब ढाई हजार साल पहले की थी। इस वर्ष यात्रा का शुभारंभ विगत 24 सितंबर को हरिद्वार से हुआ था। यात्रा हरिद्वार से बागेश्वर आई थी और 25 सितंबर को हरिद्वार रवाना हो गई थी। 26 सितंबर से छह अक्तूबर तक यात्रा हरिद्वार के सभी अखाड़ों में गई। सात, आठ अक्तूबर को हरिद्वार के विभिन्न मंदिरों में भ्रमण के बाद यात्रा नौ अक्तूबर को ऋषिकेश पहुंची। यहां से विभिन्न जिलों का भ्रमण कर छड़ी यात्रा 21 अक्तूबर को कौसानी आई।
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22 अक्तूबर को गरुड़, बैजनाथ होते हुए बागेश्वर पहुंची थी। बागेश्वर से 23 अक्तूबर को जागेश्वर होते हुए पिथौरागढ़ रवाना हुई थी। अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ के विभिन्न धार्मिक स्थलों का भ्रमण कर यात्रा शनिवार को बागेश्वर लौटी। बागेश्वर से यात्रा बिनसर महादेव रानीखेत रवाना होगी। वहां पर महंत शंकर गिरी महाराज, छड़ी महंत पुष्कर गिरी, महामंडलेश्वर कपिल पुरी महाराज, छड़ी महंत शिवदत्त गिरी, मंत्री मोहन भारती महाराज आदि मौजूद रहे।
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