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Bageshwar News: 45 दिन के भीतर सवा लाख वापस लौटाने का आदेश
Thu, 22 May 2025 11:46 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
Updated Thu, 22 May 2025 11:46 PM IST
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बागेश्वर। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने उपभोक्ता से अग्रिम भुगतान लेकर मांग अनुरूप सेवा नहीं देने के मामले की सुनवाई करते हुए विपक्षी कंपनी को ली गई रकम 45 दिन में लौटाने का आदेश सुनाया। निर्धारित तिथि में रुपये नहीं लौटाने पर कंपनी को परिवाद दायर करने की तिथि से आठ प्रतिशत साधारण वार्षिक ब्याज के साथ भुगतान करना होगा।
भाटनीकोट निवासी शिकायतकर्ता देवेश खेतवाल ने वर्ष 2021 में मिनरल वाटर प्लांट लगाने की योजना बनाई। इसके लिए उन्हें 316 ग्रेड जिंदल स्टीनलेस स्टील के पाइप की जरूरत थी। उन्होंने ऑनलाइन वेबसाइट पर कंपनियों से कोटेशन मांगे। मैटल किंग कांदीवली, गिरगांव मुंबई की ओर से उन्हें फोन किया गया।
बातचीत के बाद कंपनी ने कोटेशन और सैंपल के रूप में जिंदल कंपनी के चार पाइप भेजे जिनका भुगतान शिकायतकर्ता ने कर दिया और साथ में पाइप की कंपनी जांचने के लिए टेस्टिंग सर्टिफिकेट भेजने को कहा। कंपनी की ओर से बड़ी मात्रा में डिमांड करने के बाद टेस्टिंग सर्टिफिकेट भेजने की बात कही।
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शिकायतकर्ता ने कंपनी को दो किश्तों में 26 सितंबर 2021 को 25,000 और 28 सितंबर 2021 को 1,00,000 रुपये समेत 1,25,000 रुपये का अग्रिम भुगतान नेफ्ट के माध्यम से किया। विपक्षी कंपनी की ओर से मांग के अनुरूप जिंदल स्टील से बने स्टेनलेस पाइप की बजाय किसी अन्य कंपनी के बनाए 316 पाइप भेजने की बात कही जाने लगी।
मांग और गुणवत्ता के अनुरूप पाइप नहीं दिए जाने पर शिकायतकर्ता ने रुपये वापस लौटाने की मांग की जिसे विपक्षी कंपनी अनदेखा करने लगी। शिकातयकर्ता ने 23 अगस्त 2022 को आयोग में परिवाद प्रस्तुत किया।
आयोग के अध्यक्ष रमेश कुमार जायसल, सदस्य, रमेश चंद्र सनवाल और हंसी रौतेला ने मामले की सुनवाई करते हुए शिकायतकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाया। आयोग ने दोनों पक्षों को अपना-अपना वाद व्यय स्वयं वहन करने का भी आदेश दिया।
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भाटनीकोट निवासी शिकायतकर्ता देवेश खेतवाल ने वर्ष 2021 में मिनरल वाटर प्लांट लगाने की योजना बनाई। इसके लिए उन्हें 316 ग्रेड जिंदल स्टीनलेस स्टील के पाइप की जरूरत थी। उन्होंने ऑनलाइन वेबसाइट पर कंपनियों से कोटेशन मांगे। मैटल किंग कांदीवली, गिरगांव मुंबई की ओर से उन्हें फोन किया गया।
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बातचीत के बाद कंपनी ने कोटेशन और सैंपल के रूप में जिंदल कंपनी के चार पाइप भेजे जिनका भुगतान शिकायतकर्ता ने कर दिया और साथ में पाइप की कंपनी जांचने के लिए टेस्टिंग सर्टिफिकेट भेजने को कहा। कंपनी की ओर से बड़ी मात्रा में डिमांड करने के बाद टेस्टिंग सर्टिफिकेट भेजने की बात कही।
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शिकायतकर्ता ने कंपनी को दो किश्तों में 26 सितंबर 2021 को 25,000 और 28 सितंबर 2021 को 1,00,000 रुपये समेत 1,25,000 रुपये का अग्रिम भुगतान नेफ्ट के माध्यम से किया। विपक्षी कंपनी की ओर से मांग के अनुरूप जिंदल स्टील से बने स्टेनलेस पाइप की बजाय किसी अन्य कंपनी के बनाए 316 पाइप भेजने की बात कही जाने लगी।
मांग और गुणवत्ता के अनुरूप पाइप नहीं दिए जाने पर शिकायतकर्ता ने रुपये वापस लौटाने की मांग की जिसे विपक्षी कंपनी अनदेखा करने लगी। शिकातयकर्ता ने 23 अगस्त 2022 को आयोग में परिवाद प्रस्तुत किया।
आयोग के अध्यक्ष रमेश कुमार जायसल, सदस्य, रमेश चंद्र सनवाल और हंसी रौतेला ने मामले की सुनवाई करते हुए शिकायतकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाया। आयोग ने दोनों पक्षों को अपना-अपना वाद व्यय स्वयं वहन करने का भी आदेश दिया।