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जंगलों में लगातार बढ़ रही आग की घटनाएं
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बागेश्वर नगर में जंगलों की आग से छाई धुंध। संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : BAGESHWAR
बागेश्वर। इस वर्ष अक्तूबर-नवंबर महीने में जंगल में आग लगने की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही है। जिले में पिछले 26 दिनों में जंगलों में आग लगने की 14 घटनाएं हो चुकी हैं। रविवार को अमसरकोट के जंगल में आग लगने से वन संपदा को भारी नुकसान पहुंचा है।
अक्तूबर और नवंबर में आग से जंगल धधकने की करीब 14 घटनाएं हो चुकी हैं। 14 अक्तूबर को कुकुड़ामाई के जंगल आग से धधके थे। एक दिन बाद वन विभाग की टीम ने जंगल की आग पर काबू पा लिया था। इसके बाद काफलीगैर के जंगल, कठायतबाड़ा के जंगल, सिमार के जंगल, चंडिका मंदिर की पहाड़ी, भुरचुनिया धार, पंद्रहपाली के जंगल और कांडा क्षेत्र के जंगल आग से धधक गए।
चार नवंबर को रात करीब नौ बजे नीलेश्वर की पहाड़ी और मनकोट के जंगलों में आग धधक उठी। वन विभाग की टीम ने कुछ समय बाद स्थानीय लोगों की मदद से आग पर काबू पा लिया। दो दिन बाद छह नवंबर को ठाकुरद्वारा के जंगल आग से धधक गए। ठाकुरद्वारा के जंगल में लगी आग पर काबू पाने के बाद शनिवार रात से अमसरकोट के बिजोरी में जंगल आग से धधक उठे। रविवार को वन विभाग की टीम ने आग पर काबू पा लिया है।
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फायर सीजन में आग की केवल चार घटनाएं
15 फरवरी से 15 जून तक का समय फायर सीजन का होता है। इस बार फायर सीजन में केवल चार घटनाएं हुई, जिसमें 5.25 हेक्टेयर जंगल को आग से नुकसान पहुंचा है। अक्तूबर, नवंबर में 14 घटनाओं में करीब 15 हेक्टेयर जंगल आग की भेंट चढ़ चुका है। वन विभाग के मुताबिक अराजक तत्व जंगल में आग की घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। जंगल में जमा पिरूल भी इसका कारण है।
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अक्तूबर और नवंबर में आग से जंगल धधकने की करीब 14 घटनाएं हो चुकी हैं। 14 अक्तूबर को कुकुड़ामाई के जंगल आग से धधके थे। एक दिन बाद वन विभाग की टीम ने जंगल की आग पर काबू पा लिया था। इसके बाद काफलीगैर के जंगल, कठायतबाड़ा के जंगल, सिमार के जंगल, चंडिका मंदिर की पहाड़ी, भुरचुनिया धार, पंद्रहपाली के जंगल और कांडा क्षेत्र के जंगल आग से धधक गए।
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चार नवंबर को रात करीब नौ बजे नीलेश्वर की पहाड़ी और मनकोट के जंगलों में आग धधक उठी। वन विभाग की टीम ने कुछ समय बाद स्थानीय लोगों की मदद से आग पर काबू पा लिया। दो दिन बाद छह नवंबर को ठाकुरद्वारा के जंगल आग से धधक गए। ठाकुरद्वारा के जंगल में लगी आग पर काबू पाने के बाद शनिवार रात से अमसरकोट के बिजोरी में जंगल आग से धधक उठे। रविवार को वन विभाग की टीम ने आग पर काबू पा लिया है।
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फायर सीजन में आग की केवल चार घटनाएं
15 फरवरी से 15 जून तक का समय फायर सीजन का होता है। इस बार फायर सीजन में केवल चार घटनाएं हुई, जिसमें 5.25 हेक्टेयर जंगल को आग से नुकसान पहुंचा है। अक्तूबर, नवंबर में 14 घटनाओं में करीब 15 हेक्टेयर जंगल आग की भेंट चढ़ चुका है। वन विभाग के मुताबिक अराजक तत्व जंगल में आग की घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। जंगल में जमा पिरूल भी इसका कारण है।