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पहले डिपो के नाम पर छल, अब स्टेशन के नाम पर छलावा
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बागेश्वर में रोडवेज स्टेशन के बाहर लगा निर्माणाधीन बस डिपो का बोर्ड। संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : BAGESHWAR
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बागेश्वर। जिले के लोगों के साथ राज्य सरकार ने पहले रोडवेज डिपो के नाम पर छलावा किया। डिपो के बजाय लोगों को बस स्टेशन मिला। अब बस स्टेशन के नाम पर भी छलावा ही हो रहा है। बीते 19 फरवरी को मुख्यमंत्री और परिवहन मंत्री ने बागेश्वर में बस स्टेशन का उद्घाटन किया था। बागेश्वर से हल्द्वानी और भराड़ी के लिए बसों को हरी झंडी दिखाई थी। कहा गया था ये बस रोज बागेश्वर से भराड़ी और हल्द्वानी जाएंगी। ऐसा हुआ नहीं।
बागेश्वर में कांग्रेस शासनकाल में उत्तराखंड परिवहन निगम का डिपो बनाने की घोषणा हुई। डिपो का निर्माण शुरू हुआ। 2.88 करोड़ की लागत से बने भवन को कार्यदायी संस्था पेयजल निर्माण निगम ने चार नवंबर 2019 को उत्तराखंड परिवहन निगम को हस्तांतरित किया। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और परिवहन मंत्री यशपाल आर्य ने 19 फरवरी को बस स्टेशन का उद्घाटन किया। उद्घाटन अवसर पर सीएम और मंत्री ने दो बसों को हरी झंडी दिखाई। एक बस को भराड़ी और दूसरी बस को हल्द्वानी के लिए रवाना किया गया। सीएम के साथ ही मंत्री ने भी मंच से कहा था कि दोनों बसों का संचालन नियमित रूप से होगा लेकिन अमर उजाला की पड़ताल में पता चला कि उद्घाटन के दिन पहली बस को बागेश्वर-हल्द्वानी और अल्मोड़ा से भराड़ी चलने वाली दूसरी बस को बागेश्वर-भराड़ी नाम से हरी झंडी दिखाई गई जबकि इन बसों का संचालन पहले से ही हो रहा था। उद्घाटन के अगले ही दिन से यह बस सेवाएं अल्मोड़ा से भराड़ी और बागेश्वर से दिल्ली के लिए संचालित होने लगी। स्टेशन में इंचार्ज का पद भी सृजित नहीं है। एक वरिष्ठ लिपिक और दो बुजुर्ग चालक तैनात हैं। बुजुर्ग चालकों से रात में चौकीदारी कराई जा रही है।
हस्तांतरण पत्र और बोर्ड में डिपो का उल्लेख
बागेश्वर। सरकार ने भले ही बागेश्वर में बस स्टेशन का शुभारंभ किया हो लेकिन भवन के हस्तांतरण पत्र और भवन निर्माण के समय लगे कार्यदायी संस्था के बोर्ड में भी रोडवेज बस डिपो लिखा है। चार नवंबर 2019 को भवन का हस्तांतरण परिवहन निगम को हुआ। पेयजल निर्माण निगम के परियोजना प्रबंधक हरीश प्रकाश ने परिवहन निगम के मंडलीय प्रबंधक कुमाऊं मंडल काठगोदाम को लिखे हस्तांतरण पत्र में भी डिपो का उल्लेख किया है।
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पांच बस देने की घोषणा भी कोरी
बागेश्वर। स्टेशन के उद्घाटन के दिन परिवहन मंत्री यशपाल आर्य ने स्टेशन को पांच बस देने का वादा किया था, यह वादा भी कोरा साबित हुआ है। मंत्री ने कहा था कि स्टेशन को पांच बसें दी जाएंगी। इस घोषणा पर तब भी सवाल उठे थे। लोगों का कहना था कि बसें स्टेशन को नहीं बल्कि डिपो को दी जाती हैं।
स्टेशन को डिपो का दर्जा दिलाने के लिए प्रयास किया जा रहा है। बागेश्वर स्टेशन को जब पांच नई बस मिलेंगी, तब भराड़ी और हल्द्वानी के लिए बस सेवाओं का संचालन किया जाएगा।
- चंदन राम दास, विधायक बागेश्वर।
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बागेश्वर में कांग्रेस शासनकाल में उत्तराखंड परिवहन निगम का डिपो बनाने की घोषणा हुई। डिपो का निर्माण शुरू हुआ। 2.88 करोड़ की लागत से बने भवन को कार्यदायी संस्था पेयजल निर्माण निगम ने चार नवंबर 2019 को उत्तराखंड परिवहन निगम को हस्तांतरित किया। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और परिवहन मंत्री यशपाल आर्य ने 19 फरवरी को बस स्टेशन का उद्घाटन किया। उद्घाटन अवसर पर सीएम और मंत्री ने दो बसों को हरी झंडी दिखाई। एक बस को भराड़ी और दूसरी बस को हल्द्वानी के लिए रवाना किया गया। सीएम के साथ ही मंत्री ने भी मंच से कहा था कि दोनों बसों का संचालन नियमित रूप से होगा लेकिन अमर उजाला की पड़ताल में पता चला कि उद्घाटन के दिन पहली बस को बागेश्वर-हल्द्वानी और अल्मोड़ा से भराड़ी चलने वाली दूसरी बस को बागेश्वर-भराड़ी नाम से हरी झंडी दिखाई गई जबकि इन बसों का संचालन पहले से ही हो रहा था। उद्घाटन के अगले ही दिन से यह बस सेवाएं अल्मोड़ा से भराड़ी और बागेश्वर से दिल्ली के लिए संचालित होने लगी। स्टेशन में इंचार्ज का पद भी सृजित नहीं है। एक वरिष्ठ लिपिक और दो बुजुर्ग चालक तैनात हैं। बुजुर्ग चालकों से रात में चौकीदारी कराई जा रही है।
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हस्तांतरण पत्र और बोर्ड में डिपो का उल्लेख
बागेश्वर। सरकार ने भले ही बागेश्वर में बस स्टेशन का शुभारंभ किया हो लेकिन भवन के हस्तांतरण पत्र और भवन निर्माण के समय लगे कार्यदायी संस्था के बोर्ड में भी रोडवेज बस डिपो लिखा है। चार नवंबर 2019 को भवन का हस्तांतरण परिवहन निगम को हुआ। पेयजल निर्माण निगम के परियोजना प्रबंधक हरीश प्रकाश ने परिवहन निगम के मंडलीय प्रबंधक कुमाऊं मंडल काठगोदाम को लिखे हस्तांतरण पत्र में भी डिपो का उल्लेख किया है।
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पांच बस देने की घोषणा भी कोरी
बागेश्वर। स्टेशन के उद्घाटन के दिन परिवहन मंत्री यशपाल आर्य ने स्टेशन को पांच बस देने का वादा किया था, यह वादा भी कोरा साबित हुआ है। मंत्री ने कहा था कि स्टेशन को पांच बसें दी जाएंगी। इस घोषणा पर तब भी सवाल उठे थे। लोगों का कहना था कि बसें स्टेशन को नहीं बल्कि डिपो को दी जाती हैं।
स्टेशन को डिपो का दर्जा दिलाने के लिए प्रयास किया जा रहा है। बागेश्वर स्टेशन को जब पांच नई बस मिलेंगी, तब भराड़ी और हल्द्वानी के लिए बस सेवाओं का संचालन किया जाएगा।
- चंदन राम दास, विधायक बागेश्वर।