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बाघ के रूप में दर्शन दिए तो नाम पड़ा ब्याघ्रेश्वर
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बागेश्वर का बागनाथ धाम। संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : BAGESHWAR
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बागेश्वर। अतीत में कत्यूरी शासकों की राजधानी रहे बागेश्वर में भगवान बागनाथ का प्रख्यात धाम है। बागेश्वर में भगवान शंकर ने बाघ के रूप में दर्शन दिए थे। इसलिए प्राचीन काल में इसका नाम ब्याघ्रेश्वर पड़ा। बाद में इसे बागेश्वर कहा जाने लगा।
स्कंद पुराण के मानसखंड में उल्लेख मिलता है कि मुनी वशिष्ठ ब्रह्मा जी के कमंडल से निकली सरयू नदी को ला रहे थे। जैसे ही सरयू गोमती और लुप्त सरस्वती के संगम पर पहुंची तो ब्रह्मकपाली के पास ऋषि मार्कंडेय तपस्या कर रहे थे। ऋषि मार्कंडेय की तपस्या भंग न हो, इसलिए सरयू नीलेश्वर पर्वत के पास रुक गई। देखते ही देखते जलभराव होने लगा। नदी का प्रवाह रुकने से चिंतित ऋषि वशिष्ठ ने भगवान शंकर की आराधना की। वशिष्ठ की आराधना से प्रसन्न भगवान शंकर बाघ और माता पार्वती गाय का रूप धारण कर ब्रह्मकपाली के पास प्रकट हो गए।
शिवरूपी बाघ ने गाय पर झपटने का प्रयास किया। गाय रंभाने लगी। गाय की रंभाने की आवाज सुनकर ऋषि मार्कंडेय मुनि की आंखें खुल गई। वह गाय को बचाने के लिए दौड़े। भगवान शंकर और माता पार्वती अपने मूल स्वरूप में आ गए। मार्कंडेय ऋषि भगवान शंकर और माता पार्वती के चरणों में लोट गए। भगवान शंकर और माता पार्वती ने उन्हें और ऋषि वशिष्ठ को आशीर्वाद दिया। इसके पश्चात सरयू आगे बढ़ने लगी। मंदिर में शिवरात्रि और श्रावण के महीने पूजा का विशेष महत्व है। मंदिर के दर्शनों के लिए देश, विदेश से भक्तजन सालभर पहुंचते हैं।
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महाशिवरात्रि पर मंदिर में पुलिस बल तैनात किया जाए
बागेश्वर। बागनाथ मंदिर प्रबंधन समिति ने महाशिवरात्रि के दिन बागनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए पुलिस बल तैनात करने की मांग की है। एसपी को दिए ज्ञापन में मंदिर प्रबंधन समिति के अध्यक्ष नंदन सिंह रावल ने कहा कि महाशिवरात्रि पर्व में जिले भर से हजारों की संख्या में लोग पूजा अर्चना को आएंगे। सुबह चार बजे से शाम तक श्रद्धालु पूजा अर्चना करेंगे। ऐसे में मंदिर में शांति व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी तरह की असामाजिक गतिविधियों से बचाव के लिए सुरक्षा की जरूरत पड़ेगी। उन्होंने एसपी से सुबह से शाम तक मंदिर में सुरक्षा कर्मियों की तैनाती करने की मांग की।
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स्कंद पुराण के मानसखंड में उल्लेख मिलता है कि मुनी वशिष्ठ ब्रह्मा जी के कमंडल से निकली सरयू नदी को ला रहे थे। जैसे ही सरयू गोमती और लुप्त सरस्वती के संगम पर पहुंची तो ब्रह्मकपाली के पास ऋषि मार्कंडेय तपस्या कर रहे थे। ऋषि मार्कंडेय की तपस्या भंग न हो, इसलिए सरयू नीलेश्वर पर्वत के पास रुक गई। देखते ही देखते जलभराव होने लगा। नदी का प्रवाह रुकने से चिंतित ऋषि वशिष्ठ ने भगवान शंकर की आराधना की। वशिष्ठ की आराधना से प्रसन्न भगवान शंकर बाघ और माता पार्वती गाय का रूप धारण कर ब्रह्मकपाली के पास प्रकट हो गए।
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शिवरूपी बाघ ने गाय पर झपटने का प्रयास किया। गाय रंभाने लगी। गाय की रंभाने की आवाज सुनकर ऋषि मार्कंडेय मुनि की आंखें खुल गई। वह गाय को बचाने के लिए दौड़े। भगवान शंकर और माता पार्वती अपने मूल स्वरूप में आ गए। मार्कंडेय ऋषि भगवान शंकर और माता पार्वती के चरणों में लोट गए। भगवान शंकर और माता पार्वती ने उन्हें और ऋषि वशिष्ठ को आशीर्वाद दिया। इसके पश्चात सरयू आगे बढ़ने लगी। मंदिर में शिवरात्रि और श्रावण के महीने पूजा का विशेष महत्व है। मंदिर के दर्शनों के लिए देश, विदेश से भक्तजन सालभर पहुंचते हैं।
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महाशिवरात्रि पर मंदिर में पुलिस बल तैनात किया जाए
बागेश्वर। बागनाथ मंदिर प्रबंधन समिति ने महाशिवरात्रि के दिन बागनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए पुलिस बल तैनात करने की मांग की है। एसपी को दिए ज्ञापन में मंदिर प्रबंधन समिति के अध्यक्ष नंदन सिंह रावल ने कहा कि महाशिवरात्रि पर्व में जिले भर से हजारों की संख्या में लोग पूजा अर्चना को आएंगे। सुबह चार बजे से शाम तक श्रद्धालु पूजा अर्चना करेंगे। ऐसे में मंदिर में शांति व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी तरह की असामाजिक गतिविधियों से बचाव के लिए सुरक्षा की जरूरत पड़ेगी। उन्होंने एसपी से सुबह से शाम तक मंदिर में सुरक्षा कर्मियों की तैनाती करने की मांग की।