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पैराग्लाइडिंग की संभावनाएं अपार, स्थलों को विकास की दरकार
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बागेश्वर के जौलकांडे से उड़ान भरता पैराग्लाइडर। फाइल फोटो
- फोटो : BAGESHWAR
बागेश्वर। जिले में साहसिक पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं, विश्व प्रसिद्ध पिंडारी ग्लेशियर ट्रैक करने के लिए हर साल यहां देश और विदेश से पर्यटक पहुंचते हैं। राज्य सरकार ने पिंडारी को इस साल ट्रैक ऑफ द ईयर घोषित किया है। साहसिक पर्यटन की संभावनाओं को देखते हुए पैराग्लाइडिंग की शुरुआत और इससे रोजगार उम्मीद की किरण हो सकते हैं। बागेश्वर और कपकोट के पांच स्थानों से पैराग्लाइडर सफल उड़ान भी भर चुके हैं।
जिले में विश्व प्रसिद्ध पिंडारी और कफनी ग्लेशियर हैं। बागेश्वर से होकर सरयू और गोमती भी गुजरती हैं। राफ्टिंग और पैराग्लाइडिंग के लिए सभी जरूरी चीजें यहां मौजूद है लेकिन प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से इस दिशा में कुछ खास काम नहीं किया है। मालता, जौलकांडे, नैल और कपकोट के दुलम, जालेख में पैराग्लाइडिंग का सफल परीक्षण भी हो चुका है। इस दिशा में आगे प्रयास किए जाने की जरूरत है ताकि साहसिक पर्यटन के नए क्षेत्र के रूप में जिले को पहचान मिले। (शंकर पांडेय)
पैराग्लाइडिंग का हब बन सकता है बागेश्वर: जगदीश
बागेश्वर। पूर्व सैनिक और फ्लाई हिमालया एडवेंचर नोड के पैराग्लाइडर जगदीश जोशी ने जिले के पांचों स्थानों से पैराग्लाइडिंग की है। उनका कहना है कि पैराग्लाइडिंग के प्रति पर्यटकों में काफी दीवानगी रहती है। पहाड़ों की सैर पर आने वाले लोग यहां की खूबसूरती का लुत्फ उठाने के साथ रोमांच का भी आनंद उठाना चाहते हैं। ऐसे में जिले में पैराग्लाइडिंग को बढ़वा देने के साथ ही प्रशिक्षण केंद्र भी खुलवाए जाएं तो पर्यटन और रोजगार को बढ़ाने में मदद मिलेगी।
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कोट
जिले में पैराग्लाडिंग स्थलों के विकास के लिए जमीन तलाशी जाएगी। फिलहाल नवंबर में विभाग की ओर से प्रशिक्षण शिविर का आयोजन कराने की योजना है। प्रशिक्षण दुलम में कराया जाएगा। शिविर में 25 से 30 प्रतिभागियों को शामिल कराया जाएगा। निकट भविष्य में पैराग्लाइडिंग को बढ़ाने के लिए ठोस कार्य किए जाएंगे।
कीर्ति चंद्र आर्या, जिला पर्यटन अधिकारी बागेश्वर
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जिले में विश्व प्रसिद्ध पिंडारी और कफनी ग्लेशियर हैं। बागेश्वर से होकर सरयू और गोमती भी गुजरती हैं। राफ्टिंग और पैराग्लाइडिंग के लिए सभी जरूरी चीजें यहां मौजूद है लेकिन प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से इस दिशा में कुछ खास काम नहीं किया है। मालता, जौलकांडे, नैल और कपकोट के दुलम, जालेख में पैराग्लाइडिंग का सफल परीक्षण भी हो चुका है। इस दिशा में आगे प्रयास किए जाने की जरूरत है ताकि साहसिक पर्यटन के नए क्षेत्र के रूप में जिले को पहचान मिले। (शंकर पांडेय)
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पैराग्लाइडिंग का हब बन सकता है बागेश्वर: जगदीश
बागेश्वर। पूर्व सैनिक और फ्लाई हिमालया एडवेंचर नोड के पैराग्लाइडर जगदीश जोशी ने जिले के पांचों स्थानों से पैराग्लाइडिंग की है। उनका कहना है कि पैराग्लाइडिंग के प्रति पर्यटकों में काफी दीवानगी रहती है। पहाड़ों की सैर पर आने वाले लोग यहां की खूबसूरती का लुत्फ उठाने के साथ रोमांच का भी आनंद उठाना चाहते हैं। ऐसे में जिले में पैराग्लाइडिंग को बढ़वा देने के साथ ही प्रशिक्षण केंद्र भी खुलवाए जाएं तो पर्यटन और रोजगार को बढ़ाने में मदद मिलेगी।
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कोट
जिले में पैराग्लाडिंग स्थलों के विकास के लिए जमीन तलाशी जाएगी। फिलहाल नवंबर में विभाग की ओर से प्रशिक्षण शिविर का आयोजन कराने की योजना है। प्रशिक्षण दुलम में कराया जाएगा। शिविर में 25 से 30 प्रतिभागियों को शामिल कराया जाएगा। निकट भविष्य में पैराग्लाइडिंग को बढ़ाने के लिए ठोस कार्य किए जाएंगे।
कीर्ति चंद्र आर्या, जिला पर्यटन अधिकारी बागेश्वर