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उद्योगों के क्षेत्र में पिछड़ा है बागेश्वर, मात्र पांच बड़े उद्योग हैं जिले में
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बागेश्वर के झिरौली स्थित मैग्नेसाइट फैक्टरी। संवाद
- फोटो : BAGESHWAR
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बागेश्वर। केंद्र सरकार ने हल्द्वानी में बंद पड़ी एचएमटी फैक्टरी की 45.33 एकड़ जमीन उत्तराखंड सरकार को हस्तांतरित कर दी है। इस जमीन पर मिनी सिडकुल का निर्माण करने की योजना है। बागेश्वर जिले में चार उद्योग चल रहे हैं। दो उद्योग विभिन्न कारणों से बंद हो चुके हैं। सबसे पुराने मैग्नेसाइट फैक्टरी में भी हालात अब पहले जैसे नहीं दिख रहे हैं।
1972 में काफलीगैर तहसील के झिरौली में अल्मोड़ा मैग्नेसाइट फैक्टरी का शुभारंभ हुआ है। फैक्टरी पर करीब 350 परिवारों की आजीविका निर्भर हैं। कंपनी की समिति के अध्यक्ष रवि करायत बताते हैं कि शुरुआत में कंपनी पर 600 से अधिक परिवार निर्भर करते थे। हालांकि बदलते समय के साथ उद्योग भी चुनौतियों से जूझ रहा है।
कंपनी के प्रशासनिक प्रबंधक क्रांति जोशी ने बताया कि कोविड के बाद कंपनी के काफी चुनौतियों से जूझना पड़ रहा है। वर्तमान में 221 कर्मचारी सीधे कंपनी से रोजगार पाते हैं तो करीब 120 कंपनी की समितियों और अन्य माध्यमों से कंपनी से जुड़कर आय अर्जन कर रहे हैं।
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बागेश्वर में बागनाथ पेपर प्रोडक्ट, गरुड़ में हिम ऑर्गेनिक कंपनी, हरि नगरी की चाय फैक्टरी और कौसानी की रुरल बीपीओ पर आधारित कंपनी अन्य उद्योग हैं, जहां क्षेत्र के युवाओं को रोजगार मिल रहा है। हालांकि इन उद्योगों पर भी सीमित संख्या में रोजगार उपलब्ध है।
जिला उद्योग विभाग से मिली जानकारी के अनुसार गरुड़ के छटिया में लीसा फैक्टरी में आग लगने से कामकाज ठप है। करीब पांच साल पहले कठायतबाड़ा में खुला कपड़ा उद्योग भी आग की भेंट चढ़ गया था।
कोट
उद्योग विभाग में 2252 इकाइयां पंजीकृत हैं, जिनमें ज्यादातर रेस्टोरेंट, कैफे आदि हैं। प्रमुख रूप से पांच-छह बड़े उद्योग ही संचालित हो रहे हैं। जहां लोगों को रोजगार मिल रहा है।
-जीपी दुर्गापाल, महाप्रबंधक जिला उद्योग बागेश्वर
कोऑपरेटिव ड्रग फैक्टरी में सिर्फ 15 कर्मचारी
रानीखेत (अल्मोड़ा)। रानीखेत उपमंडल में एकमात्र कोऑपरेटिव ड्रग फैक्टरी लंबे समय से संचालित है। पहले यहां तीन सौ कर्मचारी कार्यरत थे जिनकी संख्या घटकर अब 15 रह चुकी है। ताड़ीखेत में ब्रांज फैक्टरी भी संचालित है जहां डेढ़ सौ से अधिक स्थानीय लोगों को रोजगार मिला हुआ है। जिला उद्योग केंद्र की प्रबंधक मीरा बोहरा ने बताया कि जिले में कुल 2800 सूक्ष्म लघु उद्योग हैं। सभी उद्योग चालू हालत में हैं। संवाद
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1972 में काफलीगैर तहसील के झिरौली में अल्मोड़ा मैग्नेसाइट फैक्टरी का शुभारंभ हुआ है। फैक्टरी पर करीब 350 परिवारों की आजीविका निर्भर हैं। कंपनी की समिति के अध्यक्ष रवि करायत बताते हैं कि शुरुआत में कंपनी पर 600 से अधिक परिवार निर्भर करते थे। हालांकि बदलते समय के साथ उद्योग भी चुनौतियों से जूझ रहा है।
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कंपनी के प्रशासनिक प्रबंधक क्रांति जोशी ने बताया कि कोविड के बाद कंपनी के काफी चुनौतियों से जूझना पड़ रहा है। वर्तमान में 221 कर्मचारी सीधे कंपनी से रोजगार पाते हैं तो करीब 120 कंपनी की समितियों और अन्य माध्यमों से कंपनी से जुड़कर आय अर्जन कर रहे हैं।
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बागेश्वर में बागनाथ पेपर प्रोडक्ट, गरुड़ में हिम ऑर्गेनिक कंपनी, हरि नगरी की चाय फैक्टरी और कौसानी की रुरल बीपीओ पर आधारित कंपनी अन्य उद्योग हैं, जहां क्षेत्र के युवाओं को रोजगार मिल रहा है। हालांकि इन उद्योगों पर भी सीमित संख्या में रोजगार उपलब्ध है।
जिला उद्योग विभाग से मिली जानकारी के अनुसार गरुड़ के छटिया में लीसा फैक्टरी में आग लगने से कामकाज ठप है। करीब पांच साल पहले कठायतबाड़ा में खुला कपड़ा उद्योग भी आग की भेंट चढ़ गया था।
कोट
उद्योग विभाग में 2252 इकाइयां पंजीकृत हैं, जिनमें ज्यादातर रेस्टोरेंट, कैफे आदि हैं। प्रमुख रूप से पांच-छह बड़े उद्योग ही संचालित हो रहे हैं। जहां लोगों को रोजगार मिल रहा है।
-जीपी दुर्गापाल, महाप्रबंधक जिला उद्योग बागेश्वर
कोऑपरेटिव ड्रग फैक्टरी में सिर्फ 15 कर्मचारी
रानीखेत (अल्मोड़ा)। रानीखेत उपमंडल में एकमात्र कोऑपरेटिव ड्रग फैक्टरी लंबे समय से संचालित है। पहले यहां तीन सौ कर्मचारी कार्यरत थे जिनकी संख्या घटकर अब 15 रह चुकी है। ताड़ीखेत में ब्रांज फैक्टरी भी संचालित है जहां डेढ़ सौ से अधिक स्थानीय लोगों को रोजगार मिला हुआ है। जिला उद्योग केंद्र की प्रबंधक मीरा बोहरा ने बताया कि जिले में कुल 2800 सूक्ष्म लघु उद्योग हैं। सभी उद्योग चालू हालत में हैं। संवाद