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फौजी ललित जोशी, पुष्कर महर, प्रियंका, जितेंद्र तुमक्याल की शानदार प्रस्तुतियां
Bageshwar
Updated Sat, 18 Jan 2014 05:53 AM IST
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बागेश्वर। उत्तरायणी मेले में बृृहस्पतिवार की रात मां नैना सांस्कृतिक कला मंच खटीमा के कार्यक्रम हुए। पुष्कर महर और उनके साथियों ने कुमाऊंनी लोक गीतों और नृत्यों के माध्यम से लोगों का भरपूर मनोरंजन किया।
सांस्कृतिक संध्या की शुरुआत पुष्कर महर ने की। उन्होेंने ‘ओ नंदा-सुनंदा तू दैणी है जाए’ गीत से देवी की स्तुति की। महर ने ‘झन जाए कमला अल्मोड़ा बाजारा’, ‘भल लागुद भानुली तेरो माठूमाठू हिटण वे भल लागुदो’ जैसे गीतों से लोगों का मनोरंजन किया। फौजी ललित मोहन जोशी ने ‘रातों में चांद तारा और रुकमा रुकमणी’ गीत प्रस्तुत किया। उन्होंने ‘टक टका टक कमला’ और मेरी नानी नानी सीमा तुकें प्यार करुंलो’ आदि गीत भी गाए। ‘दूर बड़ी दूर बर्फीलो डाना’ गीत के माध्यम से फौजी जीवन की हकीकत बयां की। बेबी प्रियंका ने ‘धन मेरो पहाड़’ और ‘जेब में रखी छौ फौनटीना आंख में तेरो चश्मा’ गीत प्रस्तुत किए। प्रियंका ने नेपाली गीत ‘तिमरो हमरो माया हे कांछी लागी गयो बागेश्वर मा’ आदि गीतों से लोगों को प्रभावित किया। जितेंद्र तुमक्याल ने ‘खिड़की मां बैठी तूू बाल बनाली, मायला साली कां जाली’ जैसे गीतों से भी लोगों को गुदगुदाया। इस बीच कलाकारों ने मां काली की झांकी भी दिखाई। ‘घनन घनन घंटा बाजे’ गीत के माध्यम से काली मां की महिमा का बखान किया।
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सांस्कृतिक संध्या की शुरुआत पुष्कर महर ने की। उन्होेंने ‘ओ नंदा-सुनंदा तू दैणी है जाए’ गीत से देवी की स्तुति की। महर ने ‘झन जाए कमला अल्मोड़ा बाजारा’, ‘भल लागुद भानुली तेरो माठूमाठू हिटण वे भल लागुदो’ जैसे गीतों से लोगों का मनोरंजन किया। फौजी ललित मोहन जोशी ने ‘रातों में चांद तारा और रुकमा रुकमणी’ गीत प्रस्तुत किया। उन्होंने ‘टक टका टक कमला’ और मेरी नानी नानी सीमा तुकें प्यार करुंलो’ आदि गीत भी गाए। ‘दूर बड़ी दूर बर्फीलो डाना’ गीत के माध्यम से फौजी जीवन की हकीकत बयां की। बेबी प्रियंका ने ‘धन मेरो पहाड़’ और ‘जेब में रखी छौ फौनटीना आंख में तेरो चश्मा’ गीत प्रस्तुत किए। प्रियंका ने नेपाली गीत ‘तिमरो हमरो माया हे कांछी लागी गयो बागेश्वर मा’ आदि गीतों से लोगों को प्रभावित किया। जितेंद्र तुमक्याल ने ‘खिड़की मां बैठी तूू बाल बनाली, मायला साली कां जाली’ जैसे गीतों से भी लोगों को गुदगुदाया। इस बीच कलाकारों ने मां काली की झांकी भी दिखाई। ‘घनन घनन घंटा बाजे’ गीत के माध्यम से काली मां की महिमा का बखान किया।
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