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भाषा के संरक्षण को बने कुमाऊंनी भाषा अकादमी
Updated Fri, 21 Sep 2018 11:13 PM IST
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बागेश्वर। तहसील सभागार में आयोजित कुमाऊंनी भाषा सम्मेलन में भाषा के संरक्षण के लिए आठवीं अनुसूची में शामिल करने के साथ ही कुमाऊंनी भाषा अकादमी बनाने की पुरजोर मांग की गई। सम्मेलन में कुमाऊंनी काव्य पाठ भी किया गया।
सम्मेलन के मुख्य वक्ता पहरू के संपादक डॉ. हयात सिंह रावत ने कहा कि प्राइमरी से लेकर एमए तक की कक्षाओं में कुमाऊंनी को अनिवार्य बनाया जाना चाहिए।
अध्यक्षता करते हुए बार एशोसिएसन के अध्यक्ष गोविंद भंडारी ने कहा कि सरकारी स्तर पर भी इसमें प्रयास किए जाने की आवश्यकता है। सम्मेलन में कवियों ने कुमाऊंनी में काव्य पाठ किया। वहां डॉ. केवलानंद कांडपाल, डॉ. हेम चंद्र जोशी, डॉ. पिंकी पांडे, डॉ. नेहा पालनी, प्रमोद तिवारी, वृक्ष प्रेमी किशन सिंह मलड़ा, गंगा सिंह पांगती, केशवानंद जोशी, लक्ष्मण गिरि गोस्वामी, नंदन प्रसाद, रमेश पर्वतीय, गोपाल सिंह बोरा, नीमा दफौटी, विशन टंगड़िया आदि थे। संचालन डॉ. गोपाल कृष्ण जोशी ने किया।
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सम्मेलन के मुख्य वक्ता पहरू के संपादक डॉ. हयात सिंह रावत ने कहा कि प्राइमरी से लेकर एमए तक की कक्षाओं में कुमाऊंनी को अनिवार्य बनाया जाना चाहिए।
अध्यक्षता करते हुए बार एशोसिएसन के अध्यक्ष गोविंद भंडारी ने कहा कि सरकारी स्तर पर भी इसमें प्रयास किए जाने की आवश्यकता है। सम्मेलन में कवियों ने कुमाऊंनी में काव्य पाठ किया। वहां डॉ. केवलानंद कांडपाल, डॉ. हेम चंद्र जोशी, डॉ. पिंकी पांडे, डॉ. नेहा पालनी, प्रमोद तिवारी, वृक्ष प्रेमी किशन सिंह मलड़ा, गंगा सिंह पांगती, केशवानंद जोशी, लक्ष्मण गिरि गोस्वामी, नंदन प्रसाद, रमेश पर्वतीय, गोपाल सिंह बोरा, नीमा दफौटी, विशन टंगड़िया आदि थे। संचालन डॉ. गोपाल कृष्ण जोशी ने किया।
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