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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Bageshwar News ›   19 years later could not become district jail

19 बरस बाद भी नहीं बन सकी जिला जेल

Thu, 08 Sep 2016 11:18 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, बागेश्वर
अमर उजाला ब्यूरो, बागेश्वर Updated Thu, 08 Sep 2016 11:18 PM IST
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जिला बनने के 19 बरस बाद भी यहां जिला जेल नहीं बन सकी है। जिले के कैदियों को यहां से 75 किमी दूर वाहन के जरिए अल्मोड़ा ले जाना पड़ता है। सड़क के जंगल के बीचों बीच होने से मुल्जिमों को ले जाना अत्यंत जोखिम भरा है। वाहन के खराब होने और अन्य कारणों से कैदी कई बार कोर्ट में समय पर पेश नहीं हो पाते हैं।
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मालूम हो कि जिले की स्थापना 15 सितंबर 1997 को हुई थी। यहां कलक्ट्रेट, जजी, पुलिस लाइन आदि का निर्माण तो हो चुका है लेकिन आज तक जिला जेल नहीं बन सकी है। कैदियों को आज भी पहले की तरह ही अल्मोड़ा जेल ही ले जाना पड़ता है। यहां से अल्मोड़ा जेल की दूरी वाया ताकुला 75 किमी है। सड़क अधिकतर सुनसान और घनघोर जंगल के बीच से होकर गुजरती है।
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बरसात और बर्फवारी के कारण वाहन कई बार आधे रास्ते से ही लौट जाता है। अल्मोड़ा से बागेश्वर की दूरी काफी अधिक होने के कारण मुल्जिम समय पर न्यायालय में पेश नहीं हो पाते हैं। वापस अल्मोड़ा जेल जाने में मुल्जिमों को वहां दाखिल करने में भी काफी देर हो जाती है। कई बार एक या दो कैदी होने की स्थिति में शाम चार बजे बाद अल्मोड़ा के लिए यात्री वाहन मिलना भी संभव नहीं हो पाता है।
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ऐसी स्थिति में पुलिस कर्मियों को अपने खर्चे से निजी वाहन करना पड़ता है या फिर नजदीक के थाना कोतवाली में मुल्जिम का दाखिला करना पड़ता है। दूसरे दिन उपलब्ध वाहन के जरिए मुल्जिम को अल्मोड़ा ले जाना पड़ता है। यहां जेल बनने पर जहां मुल्जिम ड्यूटी में लगाए गए कर्मियों का टीएडीए कम होता वहीं वाहन पर आने वाला डीजल और पेट्रोल खर्च भी काफी कम हो जाता जबकि अप्रिय घटना होने की आशंका भी नहीं रहती। 
 
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