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26 साल बाद भी जिला पूर्ति विभाग के खाद्यान्न गोदामों के भवन नहीं बने
Updated Thu, 13 Dec 2018 11:17 PM IST
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बागेश्वर। जिला मुख्यालय में जिला पूर्ति विभाग की हालत काफी खराब है। जिला पूर्ति विभाग के जिले में कुल 17 खाद्यान्न गोदाम हैं। इनमें से सात खाद्यान्न गोदाम आज भी किराये के भवन में चल रहे हैं । इसके अलावा विभाग में कर्मचारियों के भी कई पद रिक्त हैं। इसके अलावा पूर्ति निरीक्षक, क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी, पूर्ति लिपिक समेत अन्य कर्मचारियों के भी कई पद खाली चल रहे हैं।
1993 से जिले के हरसिला, भराड़ी, लीची, बड़ियाकोट, कर्मी, तलाई, बासम के राजकीय खाद्यान्न गोदाम किराये के भवनों में संचालित हो रहे हैं। 26 साल बाद भी इनके भवन नहीं बन पाए हैं। किराये के इन भवनों में काफी सीलन रहती है। बरसात के दिनों में सीलन के कारण गोदामों में रखा गया राशन खराब हो जाता है। जिससे विभाग को आर्थिक नुकसान हो जाता है। इसके अलावा जिले में पूर्ति विभाग स्टाफ की कमी से जूझ रहा है। विभाग में पूर्ति निरीक्षकों के 20 पद स्वीकृत हैं। जिसमें से 17 पद खाली चल रहे हैं।
क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी के तीन पद स्वीकृत हैं। जिसके सापेक्ष दो पद खाली चल रहे हैं। पूर्ति लिपिक के कुल 11 पद स्वीकृत हैं। जिसमें से आठ कार्यरत हैं और तीन खाली चल रहे हैं। पल्लेदार के 19 स्वीकृत पदों के सापेक्ष 11 कार्यरत हैं जबकि आठ पद खाली हैं। वरिष्ठ सहायक, लेखाकार के एक-एक पद रिक्त हैं। कर्मचारियों की कमी के कारण कामकाज पर विपरीत असर पड़ रहा है।
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इनसेट
एक पूर्ति निरीक्षक के जिम्मे हैं दो से चार गोदाम
बागेश्वर। जिला पूर्ति विभाग में पूर्ति निरीक्षकों की भारी कमी के कारण काम पर व्यापक असर पड़ रहा है। स्थिति यह है कि एक पूर्ति निरीक्षक के जिम्मे दो से चार खाद्यान्न गोदामों का कार्यभार है। पूर्ति निरीक्षकों के पास एक से अधिक गोदामों का कार्यभार होने के कारण उनमें असंतोष है।
कोट
विभाग में पूर्ति निरीक्षक, क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी, पूर्ति लिपिक समेत कई पद खाली चल रहे हैं। यह पद शासन स्तर से भरे जाते हैं। जिले सात खाद्यान्न गोदाम किराये के भवनों में संचालित हो रहे हैं। इस संबंध में जानकारी समय-समय पर शासन को भेजी जाती है।
अरुण कुमार वर्मा, जिला पूर्ति अधिकारी बागेश्वर।
1993 से जिले के हरसिला, भराड़ी, लीची, बड़ियाकोट, कर्मी, तलाई, बासम के राजकीय खाद्यान्न गोदाम किराये के भवनों में संचालित हो रहे हैं। 26 साल बाद भी इनके भवन नहीं बन पाए हैं। किराये के इन भवनों में काफी सीलन रहती है। बरसात के दिनों में सीलन के कारण गोदामों में रखा गया राशन खराब हो जाता है। जिससे विभाग को आर्थिक नुकसान हो जाता है। इसके अलावा जिले में पूर्ति विभाग स्टाफ की कमी से जूझ रहा है। विभाग में पूर्ति निरीक्षकों के 20 पद स्वीकृत हैं। जिसमें से 17 पद खाली चल रहे हैं।
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क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी के तीन पद स्वीकृत हैं। जिसके सापेक्ष दो पद खाली चल रहे हैं। पूर्ति लिपिक के कुल 11 पद स्वीकृत हैं। जिसमें से आठ कार्यरत हैं और तीन खाली चल रहे हैं। पल्लेदार के 19 स्वीकृत पदों के सापेक्ष 11 कार्यरत हैं जबकि आठ पद खाली हैं। वरिष्ठ सहायक, लेखाकार के एक-एक पद रिक्त हैं। कर्मचारियों की कमी के कारण कामकाज पर विपरीत असर पड़ रहा है।
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इनसेट
एक पूर्ति निरीक्षक के जिम्मे हैं दो से चार गोदाम
बागेश्वर। जिला पूर्ति विभाग में पूर्ति निरीक्षकों की भारी कमी के कारण काम पर व्यापक असर पड़ रहा है। स्थिति यह है कि एक पूर्ति निरीक्षक के जिम्मे दो से चार खाद्यान्न गोदामों का कार्यभार है। पूर्ति निरीक्षकों के पास एक से अधिक गोदामों का कार्यभार होने के कारण उनमें असंतोष है।
कोट
विभाग में पूर्ति निरीक्षक, क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी, पूर्ति लिपिक समेत कई पद खाली चल रहे हैं। यह पद शासन स्तर से भरे जाते हैं। जिले सात खाद्यान्न गोदाम किराये के भवनों में संचालित हो रहे हैं। इस संबंध में जानकारी समय-समय पर शासन को भेजी जाती है।
अरुण कुमार वर्मा, जिला पूर्ति अधिकारी बागेश्वर।