{"_id":"4d73f374-e201-11e2-8462-d4ae52bc57c2","slug":"badri-kedar-temple-committee-will-dissolve","type":"story","status":"publish","title_hn":"'भंग की जाए बद्री-केदार मंदिर समिति'","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
'भंग की जाए बद्री-केदार मंदिर समिति'
हरिद्वार/ब्यूरो
Updated Mon, 01 Jul 2013 09:19 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भारत साधु समाज ने जगद्गुरु शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती की अध्यक्षता में बैठक कर बद्री-केदार मंदिर समिति को भंग कर पुनर्गठित करने की मांग की है।
विज्ञापन
संतों ने कहा कि परंपराओं के अनुसार नंबूदरी ब्र्र्राह्मण केदारनाथ की पूजा करें और लिंगायत संप्रदाय के रावल को हटाया जाए। केदारनाथ मंदिर का संचालन भविष्य में जगद्गुरु शंकराचार्य को सौंपा जाए।
विज्ञापन
मान मर्यादा की रक्षा की जाए
कनखल स्थित जगद्गुरु शंकराचार्य के मठ में आयोजित बैठक में पूर्व केंद्रीय गृह राज्यमंत्री स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती ने मांग की है कि ब्रिटिश काल में गठित बदरी-केदार मंदिर समिति को भंग कर इसका पुनर्गठन जगद्गुरु के नेतृत्व में किया जाए। समिति में संतों को भी शामिल कर मान-मर्यादा की रक्षा की जाए।
विज्ञापन
उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर समिति राजनीति का अखाड़ा बन गई है। तीर्थ की परंपराओं को ध्वस्त कर रही है।
अनजान लोगों ने रावल को बनाया पुजारी
भारत साधु समाज के संस्थापक महामंत्री स्वामी हरिनारायणनंद ने प्रस्ताव रखा कि केदारनाथ की पूजा नंबूदरी ब्राह्मण ही करे। प्राचीनकाल से आदि शंकराचार्य ने यही व्यवस्था की थी। दुर्भाग्य है कि कालांतर में अनजान लोगों ने लिंगायत संप्रदाय के रावल को मंदिर का पुजारी बना दिया।
उत्तराखंड की पल-पल की अपडेट
फलत: परंपराओं का क्षरण हुआ और रावल शंकराचार्य तक के सामने आ खड़े हुए। एकस्वर से मांग की गई कि मंदिर का समूचा प्रबंध स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती को सौंपा जाए। कई संतों ने उत्तराखंड की प्राकृतिक आपदा के लिए धारी देवी मंदिर डुबाने को जिम्मेदार ठहराया।
धारी देवी प्रतिमा हटाने पर बरसे
महामंडलेश्वर श्यामसुंदर दास, श्रीमहंत रविंद्र पुरी, श्रीमहंत रामानंद पुरी, स्वामी महादेव, स्वामी ऋषिश्वरानंद आदि धारी देवी प्रतिमा हटाने पर जमकर बरसे। भारत साधु समाज की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के प्रस्ताव पर रविवार की बैठक में विचार करते हुए धर्मस्थल को पर्यटन स्थल न बनाने पर बल दिया गया।
बाद में सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित करते हुए देवस्थानों के प्रबंध में शंकराचार्य की भूमिका बढ़ाने पर बल दिया गया।
नए सिरे से विचार करे सरकार
जगद्गुरु शंकराचार्य और बैठक में उपस्थित संतों ने उत्तराखंड में बने सभी बांधों पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया। इस बात पर भी गहरी नाराजगी जताई कि टिहरी बांध की ऊंचाई मनमाने ढंग से बढ़ाई गई है। ऊंचाई बढ़ाकर टिहरी से दिल्ली तक प्रलय का रास्ता खोल दिया है।
संतों ने कहा कि नारायण दत्त तिवारी के मुख्यमंत्रित्व काल में 161 मीटर ऊंचाई स्वीकृत की थी। निर्माण कंपनी ने न जाने किसकी स्वीकृति से ऊंचाई को बढ़ाकर 195 मीटर कर दिया। इसका असर करोड़ों जनता पर पड़ने वाला है। धारीदेवी मंदिर को डुबाने की आवश्यकता भी ऊंचाई बढ़ाने के कारण पड़ी।
समर्थन नहीं करता साधु समाज
संतों ने भविष्य में एक और दैवी आपदा टालने के लिए उत्तराखंड के सभी बांधों पर नए सिरे पर विचार करने की मांग सरकार से की है। प्रस्ताव में कहा गया है कि पुरातत्व विभाग से केदारनाथ मंदिर का निर्माण कराने का समर्थन साधु समाज नहीं करता। मंदिर का निर्माण शंकराचार्य की अगुवाई में शास्त्रों में वर्णित पद्धति के आधार पर होना चाहिए।