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...तो इसलिए हरीश रावत के हाथ से गई CM की कुर्सी

Mon, 28 Mar 2016 10:59 AM IST
मुनीश रियाल/ अमर उजाल, हरिद्वार
मुनीश रियाल/ अमर उजाल, हरिद्वार Updated Mon, 28 Mar 2016 10:59 AM IST
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astrologer view in uttarakhand politics
हरीश रावत - फोटो : ANI

अंकों का खेल भी महान होता है। किसी पर नौ, 13, 27 का अंक खूब फबता है और किसी पर भारी पड़ता है।

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ऐसा ही कुछ उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के साथ भी हुआ। नौ का अंक उनके लिए कहीं से अच्छा नहीं रहा। बजट सत्र शुरू हुआ 9 मार्च को, कांग्रेस के बागी विधायक 9 थे।

सरकार अल्पमत में आई 18 मार्च को, यानी टोटल 1+8=9, सदन में बीजेपी के विधायक थे 27, यानी 2+7=9, प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लागू 27 मार्च को यानी 2+7=9, राज्य बनने की तारीख थी 9, प्रदेश में धारा 144 लागू, यानी 1+4+4=9, अगला मुख्यमंत्री 9 वां होगा।

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शनिदेव हुए वक्री, कराई राजनैतिक उथल-पुथल

astrologer view in uttarakhand politics
ग्रह नक्षत्र - फोटो : concept photo

25 मार्च को शनिदेव वक्री हो गए हैं, जो कि 12 अगस्त तक वक्री रहेंगे। शनिदेव के शत्रु राशि (वृश्चिक) पर वक्री होने से उत्तराखंड की राजनीति में भूचाल आ गया है। फिलहाल दस से बारह अगस्त तक  ऐसी ही उथल-पुथल रहेगी। शनि का वक्री होना केंद्र सरकार के लिए भी अच्छा नहीं माना जा रहा है।

शनि इस समय मंगल के साथ हैं, जो कि उत्तराखंड की राशि मीन को पांचवीं दृष्टि से देख रहे हैं। शनि का सातवीं, पांचवीं और नौवीं दृष्टि से देखना अच्छा नहीं माना जाता है। शनिदेव का यह रूप राजनैतिक उथल-पुथल एवं महंगाई बढ़ाने में कारक माना जाता है। इसके साथ ही प्राकृतिक आपदाएं भी बढ़ सकती हैं।

उत्तराखंड गठन के दिन एवं समय के हिसाब से ज्योतिषि इस राज्य की राशि मीन बताते हैं। मीन राशि पर इस समय शनि की पूर्ण दृष्टि पड़ रही है। 25 मार्च से शनि वक्री हो गए हैं यानी उल्टी चाल चलने में चल रहे हैं। किसी भी ग्रह की उल्टी चाल अच्छी नहीं मानी जाती है। मीन राशि को अब शनि उल्टी दृष्टि से देखे रहे हैं। शनि इस समय वृश्चिक राशि पर हैं।

इस राशि में ही शनि अब वक्री होकर संचार कर रहे हैं। 8 जनवरी 2016 से 9 मई 2016 तक गुरु भी वक्री चल रहे हैं। जो कि उत्तराखंड की सरकार के लिए प्रतिष्ठा एवं क्षतिकारक माना जा रहा था। शनि की वक्री चाल के चलते ही यह उथल-पुथल हुई है, इससे दस से बारह अगस्त तक राहत मिलती नहीं दिख रही है।

डॉ. आचार्य सुशांत राज के अनुसार ऐसे में बेमौसम वर्षा, भ्रष्टाचार, खाद्यान्न आदि वस्तुओं की कमी होती है। देश के किसी प्रमुख राजनैतिक नेता के अपदस्थ, सत्ता परिवर्तन या मृत्यु के भी योग हैं। पश्चिमी देशों में हिंसा होगी।

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