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उत्तराखंड में 6 वर्ष बाद होगी निदेशक की नियुक्ति, कांग्रेस को एक और झटका 

Sun, 10 Apr 2016 11:47 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 10 Apr 2016 11:47 PM IST
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 Appointment of Director in uttarakhand.
किशोर उपाध्याय और हरीश रावत - फोटो : file photo

प्रदेश में राज्यपाल शासन लगने के बाद सैनिक कल्याण निदेशक की नियुक्ति पर सियासी खींचतान खत्म होने का आसार हैं। 6 वर्ष से रिक्त पड़े निदेशक पद के लिए लगभग 20 ब्रिगेडियर और कर्नल रैंक के अधिकारियों का पैनल तैयार किया है। 

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गौरतलब है कि निदेशक की नियुक्ति पर केंद्रीय सैनिक कल्याण बोर्ड की लगातार आपत्ति पर जब बात नहीं बनी तो रक्षा मंत्री मनोहर परिकर ने पूर्व सीएम हरीश रावत को पत्र लिखकर चिंता जताई थी। 
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प्रदेश में वर्ष 2010 से सैनिक कल्याण निदेशक की तैनात नहीं है। कांग्रेस सरकार में दो बार प्रक्रिया शुरू हुई लेकिन मनचाहे अफसर को नियुक्ति नहीं कर पाने से प्रक्रिया को निरस्त कर दिया। 
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मौजूदा नियमावली के अनुरूप होगी नियुक्ति
रक्षा मंत्री के स्तर से दखल के बाद सरकार ने निदेशक पद के लिए चयन नियमावली ही बदल दी। फिलहाल मौजूदा नियमावली के अनुरूप ब्रिगेडियर रैंक से रिटायर्ड अधिकारी के अलावा कर्नल रैंक के अधिकारी को भी निदेशक नियुक्त किया जा सकता है।

इसके लिए सैनिक कल्याण निदेशालय को केंद्रीय सैनिक बोर्ड से 20 अधिकारियों का पैनल भेजा गया है। इसके अलावा जिला सैनिक कल्याण अधिकारी पद के लिए भी कर्नल रैंक से रिटायर्ड 40 अधिकारियों का आवेदन पहुंचे हैं। अब राज्यपाल के स्तर से रिक्त पदों के चयन पर कार्यवाही तय की जाएगी।

कांग्रेस के बढ़ते दखल को लगा एक और झटका
राष्ट्रपति शासन से सैनिक कल्याण महकमे में कांग्रेस सरकार के बढ़ते दखल को झटका लगा है। केंद्र की गाइडलाइन दरकिनार कर लेफ्टिनेंट जनरल गंभीर सिंह नेगी की अध्यक्षता में जिस उत्तराखंड राज्य सैनिक कल्याण समिति का गठन कर दिया था वह भंग हो गई है। 

अब केवल राज्य सैनिक बोर्ड ही प्रदेश में विद्यमान है जिसके राज्यपाल अध्यक्ष है। गौरतलब है कि प्र्रदेश सरकार ने राज्य सैनिक बोर्ड का ढांचा अपनी मर्जी से बदल दिया था, जिसको लेकर केंद्रीय सैनिक बोर्ड की सख्त आपत्ति के बाद सरकार बैकफुट पर आई। 


हालांकि सरकार ने एक समिति का गठन कर दिया जिसकी अध्यक्षता लेफ्टिनेंट जनरल गंभीर सिंह नेगी को दी गई, लेकिन राष्ट्रपति शासन लागू होने के बाद दर्जाधारियों की नियुक्तियां समाप्त होने से अब समिति आकार लेने से पहले ही भंग हो गई। 

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