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गौरेया दिवस पर पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग में हुई गोष्ठी
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रानीखेत में राजेंद्र पंत के आवास पर घौंसले में संरक्षित गौरेया। संवाद
- फोटो : RANIKHET
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अल्मोड़ा। विश्व गौरेया दिवस पर एसएसजे विवि के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग में एक गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि मोबाइल टावरों से निकलने वाले रेडिएशन, परंपरागत मकानों के उजड़ने, मानवीय हस्तक्षेप, जलवायु परिवर्तन आदि कारणों से गौरैया (गिना) की संख्या निरंतर घर रही है। गोष्ठी में गौरेया संरक्षण के लिए आगे आने का संकल्प भी लिया गया।
गोष्ठी में विभाग के प्रभारी डॉ. ललित जोशी ‘योगी’ ने कहा कि पहाड़ी जनजीवन में गौरैया लोगों के घरों में साथ-साथ रहती है। अब गांवों से पलायन हो रहा है जिससे गांवों में मकान वीरान हो रहे हैं। कृषि भूमि बंजर पड़ी है ऐसे में गिना भी नहीं दिखाई देती। गौरैया को बचाने के लिए हमें प्रकृति के साथ अच्छा व्यवहार अपनाना पड़ेगा।
छात्रा स्वाति तिवारी ने कहा कि पर्वतीय अंचलों के परंपरागत मकानों में रहने वाली गौरैया को बचाने के लिए हमें अपने घरों में उसके लिए घोंसले बनाने होंगे। छात्रा रोशनी बिष्ट ने कहा कि गौरैया के साथ मानव का संबंध काफी गहरा है। छात्रा दिव्या नैनवाल ने कहा कि गौरैया के विलुप्त होने की मुख्य वजह आधुनिकीकरण है। छात्रा ज्योति नैनवाल ने कहा कि मोबाइल टॉवरों से निकलने वाली इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगों में वृद्धि से गौरैया एक तय सीमा तक ही शोर बर्दाश्त कर पाती हैं। शहरों में गाड़ियों और अन्य वजहों से लगातार बढ़ता शोर और अनाजों के रखरखाव के तरीकों में बदलाव के कारण भी गौरैया विलुप्त हो रही है।
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सभी को मिलकर करने होंगे प्रयास : कुलपति
अल्मोड़ा। एसएसजे विश्वविद्यालय, अल्मोड़ा के कुलपति प्रो. नरेंद्र सिंह भंडारी ने गौरैया संरक्षण के लिए सामूहिक भागीदारी पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण जनजीवन में यह चिड़िया हमारी हिस्सेदार है। शहरों में भी इस दिशा में सोचना होगा। संवाद
कैंट कॉलोनी के राजेंद्र भी कर रहे हैं संरक्षण
रानीखेत (अल्मोड़ा)। कैंट कॉलोनी निवासी राजेंद्र पंत पिछले 15 सालों से गौरेया संरक्षण में जुटे हुए हैं। उनके संरक्षण के लिए उन्होंने अपने कमरे के आसपास छह से अधिक घौंसले स्थापित किए हैं। अपने निजी प्रयासों से उन्हें दाना पानी डालते हैं। अब उनके घर के आसपास खासी संख्या में चिड़िया दिखाई देती हैं। गौरेया ने भी कई घौंसले बनाए हैं। पंत ने चिड़िया के लिए अपने आंगन में मिट्टी के बर्तनों में दाना-पानी की व्यवस्था की है। उन्होंने अन्य लोगों से भी गौरेया के संरक्षण के लिए आगे आने का आह्वान किया है। संवाद
स्कूल के बच्चों ने घरों में रखा दाना-पानी
द्वाराहाट (अल्मोड़ा)। राजकीय इंटर कॉलेज बटुलिया में विश्व गौरैया दिवस मनाया गया। बच्चों ने जहां विद्यालय में गौरैया के लिए घौंसले लगाए और दाना-पानी दिया। यूथ इको क्लब प्रभारी विद्यालय के शिक्षक जमुना प्रसाद तिवारी 2017 से गौरेया के संरक्षण में जुटे हैं। उनकी प्रेरणा से स्कूल की छात्र-छात्राएं और अन्य लोग भी गौरैया के संरक्षण के प्रयास में लगे हैं। कंटर मैन के नाम से प्रसिद्ध जमुना प्रसाद तिवारी एक दशक से गौरेया संरक्षण के लिए जागरूकता अभियान चलाये हुए हैं। संवाद
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गोष्ठी में विभाग के प्रभारी डॉ. ललित जोशी ‘योगी’ ने कहा कि पहाड़ी जनजीवन में गौरैया लोगों के घरों में साथ-साथ रहती है। अब गांवों से पलायन हो रहा है जिससे गांवों में मकान वीरान हो रहे हैं। कृषि भूमि बंजर पड़ी है ऐसे में गिना भी नहीं दिखाई देती। गौरैया को बचाने के लिए हमें प्रकृति के साथ अच्छा व्यवहार अपनाना पड़ेगा।
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छात्रा स्वाति तिवारी ने कहा कि पर्वतीय अंचलों के परंपरागत मकानों में रहने वाली गौरैया को बचाने के लिए हमें अपने घरों में उसके लिए घोंसले बनाने होंगे। छात्रा रोशनी बिष्ट ने कहा कि गौरैया के साथ मानव का संबंध काफी गहरा है। छात्रा दिव्या नैनवाल ने कहा कि गौरैया के विलुप्त होने की मुख्य वजह आधुनिकीकरण है। छात्रा ज्योति नैनवाल ने कहा कि मोबाइल टॉवरों से निकलने वाली इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगों में वृद्धि से गौरैया एक तय सीमा तक ही शोर बर्दाश्त कर पाती हैं। शहरों में गाड़ियों और अन्य वजहों से लगातार बढ़ता शोर और अनाजों के रखरखाव के तरीकों में बदलाव के कारण भी गौरैया विलुप्त हो रही है।
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सभी को मिलकर करने होंगे प्रयास : कुलपति
अल्मोड़ा। एसएसजे विश्वविद्यालय, अल्मोड़ा के कुलपति प्रो. नरेंद्र सिंह भंडारी ने गौरैया संरक्षण के लिए सामूहिक भागीदारी पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण जनजीवन में यह चिड़िया हमारी हिस्सेदार है। शहरों में भी इस दिशा में सोचना होगा। संवाद
कैंट कॉलोनी के राजेंद्र भी कर रहे हैं संरक्षण
रानीखेत (अल्मोड़ा)। कैंट कॉलोनी निवासी राजेंद्र पंत पिछले 15 सालों से गौरेया संरक्षण में जुटे हुए हैं। उनके संरक्षण के लिए उन्होंने अपने कमरे के आसपास छह से अधिक घौंसले स्थापित किए हैं। अपने निजी प्रयासों से उन्हें दाना पानी डालते हैं। अब उनके घर के आसपास खासी संख्या में चिड़िया दिखाई देती हैं। गौरेया ने भी कई घौंसले बनाए हैं। पंत ने चिड़िया के लिए अपने आंगन में मिट्टी के बर्तनों में दाना-पानी की व्यवस्था की है। उन्होंने अन्य लोगों से भी गौरेया के संरक्षण के लिए आगे आने का आह्वान किया है। संवाद
स्कूल के बच्चों ने घरों में रखा दाना-पानी
द्वाराहाट (अल्मोड़ा)। राजकीय इंटर कॉलेज बटुलिया में विश्व गौरैया दिवस मनाया गया। बच्चों ने जहां विद्यालय में गौरैया के लिए घौंसले लगाए और दाना-पानी दिया। यूथ इको क्लब प्रभारी विद्यालय के शिक्षक जमुना प्रसाद तिवारी 2017 से गौरेया के संरक्षण में जुटे हैं। उनकी प्रेरणा से स्कूल की छात्र-छात्राएं और अन्य लोग भी गौरैया के संरक्षण के प्रयास में लगे हैं। कंटर मैन के नाम से प्रसिद्ध जमुना प्रसाद तिवारी एक दशक से गौरेया संरक्षण के लिए जागरूकता अभियान चलाये हुए हैं। संवाद