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Almora News: लोकतंत्र की मजबूती के लिए महिलाओं ने दिखाया जोश
Fri, 25 Jul 2025 12:31 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
Updated Fri, 25 Jul 2025 12:31 AM IST
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मतदान केंद्र के बाहर लाइन लगाकर अपनी बारी का इंतज़ार करती महिलाएं। स्त्रोत- सूचना विभाग
रानीखेत (अल्मोड़ा)। लोकतंत्र के पर्व में महिलाएं भारी बारिश के बावजूद बूथों पर लंबी लाइन के बाद भी वोट डालने के लिए डटी रहीं। रानीखेत में पंचायत चुनाव को लेकर महिलाओं में गजब का उत्साह नजर आया।
लोकतंत्र की मजबूती के लिए तेज बारिश भी महिला मतदाताओं का रास्ता नहीं रोक सकी। सिर पर पन्नी, छाते लेकर महिलाएं कतारों में खड़ी नजर आई। नवयुवतियों, महिलाओं के साथ भी आमाओं ने भी जोश के साथ गांव की सरकार चुनने को वोट दिया। महिला मतदाओं ने कहा कि क्षेत्र के विकास के लिए मतदान करना जरूरी है। इसके लिए हर महिला को अपने वोट की ताकत दिखानी होगी। 62 वर्षीय जानकी देवी ने कहा जब हम घर चला सकते हैं, तो गांव क्यों नहीं। अब महिलाएं सिर्फ रसोई तक सीमित नहीं, पंचायत में उनकी भूमिका अहम है। 22 वर्षीय रजनी ने कहा कि पढ़ाई के साथ जिम्मेदारियों का बोझ है, लेकिन अपने मत का प्रयोग करना भी जरूरी है। बुजुर्ग महिलाओं ने बेटियों और बहुओं को साथ लेकर मतदान केंद्र तक पहुंचकर लोक तंत्र के पर्व को सफल बनाया। मतदान केंद्रों पर महिला मतदाताओं की संख्या पुरुषों से कम नहीं रही। प्रशासन ने भी महिला मतदाताओं की भागीदारी को लेकर सराहना की। अब गांव की चौपालों में सिर्फ पुरुषों की आवाज नहीं, बल्कि महिलाओं की भी सशक्त भागीदारी दिखने लगी है।
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लोकतंत्र की मजबूती के लिए तेज बारिश भी महिला मतदाताओं का रास्ता नहीं रोक सकी। सिर पर पन्नी, छाते लेकर महिलाएं कतारों में खड़ी नजर आई। नवयुवतियों, महिलाओं के साथ भी आमाओं ने भी जोश के साथ गांव की सरकार चुनने को वोट दिया। महिला मतदाओं ने कहा कि क्षेत्र के विकास के लिए मतदान करना जरूरी है। इसके लिए हर महिला को अपने वोट की ताकत दिखानी होगी। 62 वर्षीय जानकी देवी ने कहा जब हम घर चला सकते हैं, तो गांव क्यों नहीं। अब महिलाएं सिर्फ रसोई तक सीमित नहीं, पंचायत में उनकी भूमिका अहम है। 22 वर्षीय रजनी ने कहा कि पढ़ाई के साथ जिम्मेदारियों का बोझ है, लेकिन अपने मत का प्रयोग करना भी जरूरी है। बुजुर्ग महिलाओं ने बेटियों और बहुओं को साथ लेकर मतदान केंद्र तक पहुंचकर लोक तंत्र के पर्व को सफल बनाया। मतदान केंद्रों पर महिला मतदाताओं की संख्या पुरुषों से कम नहीं रही। प्रशासन ने भी महिला मतदाताओं की भागीदारी को लेकर सराहना की। अब गांव की चौपालों में सिर्फ पुरुषों की आवाज नहीं, बल्कि महिलाओं की भी सशक्त भागीदारी दिखने लगी है।
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