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वार्ड तीन और सात पर मिलेगा नारी शक्ति का साथ
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लाटरी के माध्यम से महिला आरक्षण की प्रक्रिया पूरी करते कैंट बोर्ड अध्यक्ष, सीईओ और उपाध्यक्ष। अम?
- फोटो : RANIKHET
रानीखेत (अल्मोड़ा)। छावनी परिषद चुनाव के लिए वार्डों के आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया पूरी हो गई है। वार्डों में महिला आरक्षण को लेकर लाटरी प्रक्रिया अपनाई गई। कैंट बोर्ड अध्यक्ष केआरसी कमांडेंट ब्रिगेडियर जीएस राठौर ने लाटरी निकाली। इस बार वार्ड नंबर तीन और सात महिला के लिए आरक्षित हो गई है। आरक्षण प्रक्रिया पूरी होने के बाद संभावित उम्मीदवारों ने अब प्रचार अभियान का भी श्री गणेश कर दिया है।
बता दें कि छावनी परिषद में कुल सात वार्ड हैं। इन्हीं में रोटेशन के आधार पर आरक्षण प्रक्रिया अपनाई जाती है। सोमवार सुबह कैंट बोर्ड अध्यक्ष कुमाऊं रेजीमेंट केंद्र के कमांडेंट ब्रिगेडियर जीएस राठौर की अध्यक्षता में महिला आरक्षित सीट के लिए लाटरी प्रक्रिया शुरू हुई है। चार वार्डों में यह प्रक्रिया अपनाई गई। क्योंकि वार्ड नंबर दो अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित है, जबकि वार्ड नंबर एक और पांच पिछली बार महिला आरक्षित थी, लाटरी प्रक्रिया में इन तीनों वार्डों को नहीं लिया गया। कमांडेंट ने चार वार्डों की लाटरी डब्बे से निकाली और कैंट बोर्ड सीईओ ने लाटरी खोलकर बताया कि वार्ड नंबर तीन और सात इस बार महिला के लिए आरक्षित हो गई है। इस निर्णय का सभी लोगों ने स्वागत किया। इस दौरान छावनी उपाध्यक्ष मोहन नेगी, सभासद विनोद कुमार, पूर्व सभासद उमेश पाठक, व्यापार मंडल अध्यक्ष भगवंत नेगी, ब्लाक प्रमुख हीरा रावत, अतुल जोशी, विनोद भार्गव सहित तमाम लोग मौजूद रहे।
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2007 में बनी कैंट निर्वाचन नामावली
रानीखेत। 2007 में छावनी निर्वाचन नियमावली बनने के बाद आरक्षण की प्रक्रिया लाटरी के माध्यम से ही की जाती है। 2008 और 20015 में भी लाटरी सिस्टम के माध्यम से ही महिला वार्ड आरक्षित हुए थे। 2015 में वार्ड नंबर एक और पांच महिला के लिए आरक्षित थी, जबकि वार्ड नंबर दो अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित की गई है।
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कैंट बोर्ड में आरक्षण की स्थिति
वार्ड एक - सामान्य
वार्ड दो - अनुसूचित जाति
वार्ड तीन - महिला आरक्षित
वार्ड चार - सामान्य
वार्ड पांच - सामान्य
वार्ड छह - सामान्य
वार्ड सात - महिला आरक्षित
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छावनी परिषद में आरक्षण प्रक्रिया के बहिष्कार का ऐलान की निकली हवा
रानीखेत (अल्मोड़ा)। छावनी परिषद चुनाव के लिए वार्डों के आरक्षण प्रक्रिया के बहिष्कार का ऐलान धरा का धरा रह गया। दरअसल, एक दिन पूर्व कुछ जनप्रतिनिधियों और नागरिकों ने सिविल एरिया को नगर पालिका बनाने के लिए चुनाव बहिष्कार का ऐलान करते हुए आरक्षण प्रक्रिया का विरोध करने की अपील की थी। सोमवार सुबह शांतिपूर्ण माहौल में वार्डों का आरक्षण तय हुआ, लेकिन बहिष्कार की चेतावनी देने वाला वहां एक भी व्यक्ति नहीं फटका। अलबत्ता इस पूरे मामले ने अब राजनैतिक रंग अख्तियार कर लिया है।
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चुनाव बहिष्कार के ऐलान ने लिया राजनैतिक रंग
रानीखेत। चुनाव बहिष्कार के ऐलान का मामला अब राजनैतिक रंग लेने लगा है। एक दल विशेष के लोगों ने एक दिन पूर्व बहिष्कार का ऐलान करते हुए दूसरे दल विशेष के जनप्रतिनिधियों पर नगरपालिका के नाम पर राजनीति करने का आरोप लगाया था। इधर अब व्यापार संघ महासचिव ने इसका जवाब दिया है। उनका कहना है कि पिछले पांच वर्षों के भ्रष्टाचार के दाग को छिपाने और मिटाने के लिए कुछ तथाकथित छुटभैये नेता अपने नेताओं के इशारे पर बहिष्कार के आंदोलन को हवा दे रहे हैं। कहा कि पूर्व में भी ऐसे लोगों ने बहिष्कार के नाम पर अपने लोगों को चुनाव लड़ाया। कहा कि छावनी परिषद के खिलाफ आम जनता की किसी भी लड़ाई में यह लोग कभी नहीं कूदे और अब बड़े नेताओं के इशारे पर खोखली राजनीति कर रहे हैं। कहा कि ऐसे लोगों के नेताओं ने नगर पालिका का मुद्दा किसी भी फोरम पर नहीं उठाया। अपनी सरकार रहते नगरपालिका का प्रस्ताव केंद्र को नहीं भेज सके। कहा कि रानीखेत नगरपालिका की राजनीति करने से पहले यदि यह सभी लोग आम जनता के हित में आमरण अनशन पर बैठेंगे तो आम जनता इनकी बातों पर भरोसा कर इनका समर्थन जरूर करेगी।।
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बता दें कि छावनी परिषद में कुल सात वार्ड हैं। इन्हीं में रोटेशन के आधार पर आरक्षण प्रक्रिया अपनाई जाती है। सोमवार सुबह कैंट बोर्ड अध्यक्ष कुमाऊं रेजीमेंट केंद्र के कमांडेंट ब्रिगेडियर जीएस राठौर की अध्यक्षता में महिला आरक्षित सीट के लिए लाटरी प्रक्रिया शुरू हुई है। चार वार्डों में यह प्रक्रिया अपनाई गई। क्योंकि वार्ड नंबर दो अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित है, जबकि वार्ड नंबर एक और पांच पिछली बार महिला आरक्षित थी, लाटरी प्रक्रिया में इन तीनों वार्डों को नहीं लिया गया। कमांडेंट ने चार वार्डों की लाटरी डब्बे से निकाली और कैंट बोर्ड सीईओ ने लाटरी खोलकर बताया कि वार्ड नंबर तीन और सात इस बार महिला के लिए आरक्षित हो गई है। इस निर्णय का सभी लोगों ने स्वागत किया। इस दौरान छावनी उपाध्यक्ष मोहन नेगी, सभासद विनोद कुमार, पूर्व सभासद उमेश पाठक, व्यापार मंडल अध्यक्ष भगवंत नेगी, ब्लाक प्रमुख हीरा रावत, अतुल जोशी, विनोद भार्गव सहित तमाम लोग मौजूद रहे।
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2007 में बनी कैंट निर्वाचन नामावली
रानीखेत। 2007 में छावनी निर्वाचन नियमावली बनने के बाद आरक्षण की प्रक्रिया लाटरी के माध्यम से ही की जाती है। 2008 और 20015 में भी लाटरी सिस्टम के माध्यम से ही महिला वार्ड आरक्षित हुए थे। 2015 में वार्ड नंबर एक और पांच महिला के लिए आरक्षित थी, जबकि वार्ड नंबर दो अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित की गई है।
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कैंट बोर्ड में आरक्षण की स्थिति
वार्ड एक - सामान्य
वार्ड दो - अनुसूचित जाति
वार्ड तीन - महिला आरक्षित
वार्ड चार - सामान्य
वार्ड पांच - सामान्य
वार्ड छह - सामान्य
वार्ड सात - महिला आरक्षित
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छावनी परिषद में आरक्षण प्रक्रिया के बहिष्कार का ऐलान की निकली हवा
रानीखेत (अल्मोड़ा)। छावनी परिषद चुनाव के लिए वार्डों के आरक्षण प्रक्रिया के बहिष्कार का ऐलान धरा का धरा रह गया। दरअसल, एक दिन पूर्व कुछ जनप्रतिनिधियों और नागरिकों ने सिविल एरिया को नगर पालिका बनाने के लिए चुनाव बहिष्कार का ऐलान करते हुए आरक्षण प्रक्रिया का विरोध करने की अपील की थी। सोमवार सुबह शांतिपूर्ण माहौल में वार्डों का आरक्षण तय हुआ, लेकिन बहिष्कार की चेतावनी देने वाला वहां एक भी व्यक्ति नहीं फटका। अलबत्ता इस पूरे मामले ने अब राजनैतिक रंग अख्तियार कर लिया है।
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चुनाव बहिष्कार के ऐलान ने लिया राजनैतिक रंग
रानीखेत। चुनाव बहिष्कार के ऐलान का मामला अब राजनैतिक रंग लेने लगा है। एक दल विशेष के लोगों ने एक दिन पूर्व बहिष्कार का ऐलान करते हुए दूसरे दल विशेष के जनप्रतिनिधियों पर नगरपालिका के नाम पर राजनीति करने का आरोप लगाया था। इधर अब व्यापार संघ महासचिव ने इसका जवाब दिया है। उनका कहना है कि पिछले पांच वर्षों के भ्रष्टाचार के दाग को छिपाने और मिटाने के लिए कुछ तथाकथित छुटभैये नेता अपने नेताओं के इशारे पर बहिष्कार के आंदोलन को हवा दे रहे हैं। कहा कि पूर्व में भी ऐसे लोगों ने बहिष्कार के नाम पर अपने लोगों को चुनाव लड़ाया। कहा कि छावनी परिषद के खिलाफ आम जनता की किसी भी लड़ाई में यह लोग कभी नहीं कूदे और अब बड़े नेताओं के इशारे पर खोखली राजनीति कर रहे हैं। कहा कि ऐसे लोगों के नेताओं ने नगर पालिका का मुद्दा किसी भी फोरम पर नहीं उठाया। अपनी सरकार रहते नगरपालिका का प्रस्ताव केंद्र को नहीं भेज सके। कहा कि रानीखेत नगरपालिका की राजनीति करने से पहले यदि यह सभी लोग आम जनता के हित में आमरण अनशन पर बैठेंगे तो आम जनता इनकी बातों पर भरोसा कर इनका समर्थन जरूर करेगी।।