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बुजुर्गों ने संभाली है ईड़ा में आमरण अनशन की कमान
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ईड़ा में आमरण अनशन पर बैठे 75 वर्षीय बुजुर्ग। संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : RANIKHET
द्वाराहाट (अल्मोड़ा)। ईड़ा में पानी के लिए आमरण अनशन 16वें दिन में प्रवेश कर गया है। प्रशासन और विभागीय उपेक्षा को लेकर लोगों में गहरी नाराजगी है। वक्ताओं ने कहा कि अनशन करने के बावजूद उनकी समस्याओं की सुध नहीं ली जा रही है। लेकिन जब तक ग्रामीणों की यह मांग पूरी नहीं होती तब तक वह लोग अनशन खत्म नहीं करेंगे। दोनों आमरण अनशनकारियों का स्वास्थ्य खराब होने के कारण प्रशासन ने उन्हें उठा लिया, उनके स्थान पर दो और बुजुर्ग अनशन पर बैठ गए हैं।
16वें दिन भी आमरण अनशनकार में मोहन सिंह और प्रधान कमल सिंह डटे रहे लेकिन सेहत खराब होने के कारण प्रशासन ने उन्हें अनशन से उठा लिया। उनकी जगह 72 वर्षीय केशर सिंह और 62 वर्षीय दिगंबर सिंह आमरण अनशन पर बैठे। अनशन के समर्थन में 102 वर्षीय गोपुली देवी, शांति देवी, कुंती देवी, पुष्पा देवी, भगवती देवी, दीपा देवी, हेमा देवी, सरस्वती देवी, शांति देवी आदि उपवास पर बैठीं।
ईड़ा के ग्राम प्रधान मनोज रावत, हेमंत बिष्ट, विपिन चंद्र आर्या, धरम सिंह, राजेंद्र सिंह, बचे सिंह, अजय बिष्ट, पवन बिष्ट, देवेंद्र बिष्ट, भूपाल बिष्ट, गोपाल राम, शेरी राम, केशर सिंह मोतिमा देवी, राधा देवी, खीमा देवी, महिला मंगल दल ईड़ा की अध्यक्ष तुलसी देवी सहित तमाम लोग वहां समर्थन को पहुंचे थे।
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‘आंदोलन नहीं यह मूलभूत अधिकारों की लड़ाई है’
द्वाराहाट (अल्मोड़ा)। राज्य बनने के 20 साल बाद भी व्यवस्थाओं का पटरी पर नहीं आ पाना दुर्भाग्यपूर्ण है। बिजली, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए भी ग्रामीणों को आमरण अनशन करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि यह आंदोलन नहीं बल्कि मूलभूत अधिकारों की लड़ाई है।
ईड़ा के ग्रामीण सरकारों और विभागों की कार्यप्रणाली से खासे नाराज हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि भले ही एक दिन छोड़कर पानी मिले लेकिन नियमित रूप से मिलना चाहिए। उनका कहना है कि जबसे विभाग ने आश्वस्त किया है तब से छह टैंकर (18 हजार लीटर) पानी दिया गया है। ग्रेविटी से आ रहा पानी एक दिन ईड़ा के तोक बजीना के टैंक में जाएगा। दूसरे दिन ईड़ा के टैंक में और तीसरे दिन बुधीना के टैंक में डाले जाने के बाद ही योजना से उक्त तीनों क्षेत्रों को पानी मिल पाएगा। इस तरह एक की बारी चौथे या पांचवें दिन में आएगी।
प्लास्टिक का पाइप लगाने पर भी रोष
आंदोलनकारियों ने पिछले चार वर्षों में योजना की मरम्मत के नाम पर प्लास्टिक के पाइप लाइन लगाने और उनको भी खुले में रखने पर नाराजगी जताई है। जल संस्थान के सहायक अभियंता आरपी डोभाल ने बताया कि बरसात के वक्त प्लास्टिक के पाइपों से अस्थायी व्यवस्था की गई थी। स्थायी व्यवस्था के लिए वहां कार्य हो रहा है।
- हमें नियमित पानी मिले। चाहे एक दिन छोड़कर ही हो। यह मूलभूत अधिकारों की लड़ाई है। विभाग हमारी फाइल को देहरादून पहुंचा दे। वित्तीय स्वीकृति के लिए हम स्वयं सरकार से लड़ेंगे। - हेमंत बिष्ट
- जमीनीवार से ईड़ा चौंधार तक गांव को जोड़ने वाली मुख्यमंत्री की घोषणा के तीन वर्षों बाद भी धरातल पर न आने से ग्रामीणों को टैंकरों से मिल सकने वाला पानी नहीं मिल पा रहा है। - विपिन आर्या
-योजना की मरम्मत के नाम पर व्यय की गई राशि तहत प्लास्टिक पाइप लगा कर इतिश्री कर दी। जल संस्थान और जलनिगम के अधिकारी जिम्मेदारी एक-दूसरे पर टाल कर बचते रहते हैं। -दीपक बिष्ट
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16वें दिन भी आमरण अनशनकार में मोहन सिंह और प्रधान कमल सिंह डटे रहे लेकिन सेहत खराब होने के कारण प्रशासन ने उन्हें अनशन से उठा लिया। उनकी जगह 72 वर्षीय केशर सिंह और 62 वर्षीय दिगंबर सिंह आमरण अनशन पर बैठे। अनशन के समर्थन में 102 वर्षीय गोपुली देवी, शांति देवी, कुंती देवी, पुष्पा देवी, भगवती देवी, दीपा देवी, हेमा देवी, सरस्वती देवी, शांति देवी आदि उपवास पर बैठीं।
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ईड़ा के ग्राम प्रधान मनोज रावत, हेमंत बिष्ट, विपिन चंद्र आर्या, धरम सिंह, राजेंद्र सिंह, बचे सिंह, अजय बिष्ट, पवन बिष्ट, देवेंद्र बिष्ट, भूपाल बिष्ट, गोपाल राम, शेरी राम, केशर सिंह मोतिमा देवी, राधा देवी, खीमा देवी, महिला मंगल दल ईड़ा की अध्यक्ष तुलसी देवी सहित तमाम लोग वहां समर्थन को पहुंचे थे।
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‘आंदोलन नहीं यह मूलभूत अधिकारों की लड़ाई है’
द्वाराहाट (अल्मोड़ा)। राज्य बनने के 20 साल बाद भी व्यवस्थाओं का पटरी पर नहीं आ पाना दुर्भाग्यपूर्ण है। बिजली, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए भी ग्रामीणों को आमरण अनशन करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि यह आंदोलन नहीं बल्कि मूलभूत अधिकारों की लड़ाई है।
ईड़ा के ग्रामीण सरकारों और विभागों की कार्यप्रणाली से खासे नाराज हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि भले ही एक दिन छोड़कर पानी मिले लेकिन नियमित रूप से मिलना चाहिए। उनका कहना है कि जबसे विभाग ने आश्वस्त किया है तब से छह टैंकर (18 हजार लीटर) पानी दिया गया है। ग्रेविटी से आ रहा पानी एक दिन ईड़ा के तोक बजीना के टैंक में जाएगा। दूसरे दिन ईड़ा के टैंक में और तीसरे दिन बुधीना के टैंक में डाले जाने के बाद ही योजना से उक्त तीनों क्षेत्रों को पानी मिल पाएगा। इस तरह एक की बारी चौथे या पांचवें दिन में आएगी।
प्लास्टिक का पाइप लगाने पर भी रोष
आंदोलनकारियों ने पिछले चार वर्षों में योजना की मरम्मत के नाम पर प्लास्टिक के पाइप लाइन लगाने और उनको भी खुले में रखने पर नाराजगी जताई है। जल संस्थान के सहायक अभियंता आरपी डोभाल ने बताया कि बरसात के वक्त प्लास्टिक के पाइपों से अस्थायी व्यवस्था की गई थी। स्थायी व्यवस्था के लिए वहां कार्य हो रहा है।
- हमें नियमित पानी मिले। चाहे एक दिन छोड़कर ही हो। यह मूलभूत अधिकारों की लड़ाई है। विभाग हमारी फाइल को देहरादून पहुंचा दे। वित्तीय स्वीकृति के लिए हम स्वयं सरकार से लड़ेंगे। - हेमंत बिष्ट
- जमीनीवार से ईड़ा चौंधार तक गांव को जोड़ने वाली मुख्यमंत्री की घोषणा के तीन वर्षों बाद भी धरातल पर न आने से ग्रामीणों को टैंकरों से मिल सकने वाला पानी नहीं मिल पा रहा है। - विपिन आर्या
-योजना की मरम्मत के नाम पर व्यय की गई राशि तहत प्लास्टिक पाइप लगा कर इतिश्री कर दी। जल संस्थान और जलनिगम के अधिकारी जिम्मेदारी एक-दूसरे पर टाल कर बचते रहते हैं। -दीपक बिष्ट