शोध: अल्मोड़ा के बागानों की चाय की दो किस्में ग्रीन टी के मानकों पर फिट, पत्तियों में थियानिन की मात्रा कम
चाय बागानों में उगाई जाने वाली एवी2 और टैगडा 78 चाय की किस्में ग्रीन टी के लिए उपयुक्त पाई गईं हैं। उत्तराखंड टी बोर्ड अल्मोड़ा के वैज्ञानिकों ने शोध में पाया कि चाय की दोनों किस्मों की पत्तियों में थियानिन की मात्रा एक मिलीग्राम से भी कम है।
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अल्मोड़ा जिले के चाय बागानों में उगाई जाने वाली एवी2 और टैगडा 78 चाय की किस्में ग्रीन टी के लिए उपयुक्त पाई गईं हैं। उत्तराखंड टी बोर्ड अल्मोड़ा के वैज्ञानिकों ने शोध में पाया कि चाय की दोनों किस्मों की पत्तियों में थियानिन की मात्रा एक मिलीग्राम से भी कम है, जबकि पॉलीफिनॉल की मात्रा लगभग 15 मिलीग्राम है, जो ग्रीन टी के लिए एक सही अनुपात है। वैज्ञानिकों ने अपने निष्कर्ष के आधार पर चाय की इन दोनों किस्मों को ग्रीन टी के लिए उपयुक्त पाया है।
अल्मोड़ा जिले के ताकुला, चौखुटिया, स्याल्दे, हवालबाग, भैंसियाछाना और धौलादेवी ब्लॉक में टी बोर्ड के सहयोग से चाय के छह बागान स्थापित किए गए हैं। वर्तमान में 150 हेक्टेयर भूमि पर बने इन बागानों से चाय का उत्पादन हो रहा है। यहां वर्तमान में एवी2, टैगडा 78, टीएस520, ऑर्थोडॉक्स चाय का उत्पादन होता है।
क्या है थियानिन और पॉलीफिनॉल
ग्रीन टी में मौजूद थियानिन और पॉलीफिनॉल दो प्रमुख बायोएक्टिव यौगिक हैं। थियानिन एक अमीनो एसिड है, जो मानसिक शांति, एकाग्रता और तनाव को कम करता है। पॉलीफिनॉल एक एंटीऑक्सीडेंट है। इसका सेवन फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाता है। इसे कैटेचिन्स भी कहा जाता है। यह हृदय स्वास्थ्य, कैंसर से सुरक्षा, वजन घटाने और प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत बनाता है।
एक लाख किलो से अधिक उत्पादन
टी बोर्ड अल्मोड़ा ने बीते वर्ष 1.25 लाख किलो ऑर्थोडॉक्स और ग्रीन टी का उत्पादन किया। वर्ष 2023 में एक लाख आठ हजार, 2022 में एक लाख किलो का उत्पादन हुआ।
जिले के बागानों में एवी2 और टैगडा 78 चाय का उत्पादन किया जाता है। शोध के दौरान दोनों की पत्तियों में थियानिन और पॉलीफिनॉल की सटीक मात्रा पाई गई जो ग्रीन टी के लिए पूरी तरह उपयुक्त है। उम्मीद है कि अल्मोड़ा की चाय को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी। - डॉ. भुपेन डैका, विशेषज्ञ उत्तराखंड टी बोर्ड, अल्मोड़ा