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मडुवा, मादिरा की उन्नतशील प्रजातियों का प्रदर्शन किया
ब्यूरो, अमर उजाला अल्मोड़ा।
Updated Fri, 02 Sep 2016 10:38 PM IST
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किसानों को दिए खेती के टिप्स
- फोटो : अमर उजाला
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अल्मोड़ा। विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान अल्मोड़ा ने अखिल भारतीय लघु अन्न फसल परियोजना के तहत तिपोला और टूनाकोट गांवों में मडुवा और मादिरा की उन्नतशील प्रजातियों का प्रदर्शन किया। मडुवा में वीएल मडुवा 352, 324, 149 और मादिरा में वीएल मादिरा 172, पीआरजे-01 नामक प्रजातियों को क्रमश: छह और दो हेक्टेयर क्षेत्र में प्रदर्शित किया गया। संस्थान द्वारा मडुवा फसल पर प्रक्षेत्र दिवस का आयोजन किया गया। संस्थान के वैज्ञानिकों की टीम ने फसल का जायजा लिया।
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तिपोला में हुई गोष्ठी में संस्थान के वैज्ञानिकों ने मडुवा की बढ़ती मांग और इसके विशिष्ट औषधीय गुणों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संस्थान ने मडुवा और मादिरा की उच्च उपज देने वाली उन्नत प्रजातियों का विकास किया है। संस्थान ने इस साल 109 काश्तकारों को मडुवा और 20 काश्तकारों को मादिरा की उपरोक्त प्रजातियों का बीज उपलब्ध करवाया है। सभी काश्तकारों ने मेहनत से खेती की और भरपूर उपज हुई। फसल की अवधि के दौरान कार्यक्रम समन्वयक और फसल वैज्ञानिक डा. शैलेज सूद ने लगातार दोनों गांवों का दौरा कर फसल का जायजा लिया।
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संस्थान के निदेशक डा. अरुणव पट्टनायक ने काश्तकारों से उन्नत प्रजातियों का बीज लगाकर अधिक उत्पादन करने का आह्वान किया। फसल सुधार विभागाध्यक्ष डा. लक्ष्मीकांत ने बताया कि एक प्रजाति की अच्छी बालियों को खेत से अलग से काटकर बीज के लिए रखा जा सकता है। डा. बीएम पांडे ने किसानों से इन प्रदर्शनों के बारे में राय मांगी। दोनों गांवों के प्रधान श्याम सिंह और हीरा सिंह ने अपने अनुभव वैज्ञानिकों के साथ साझा किए। भीम सिंह ने प्रजातियों के उत्पादन क्षमता की सराहना की। कार्यक्रम में संस्था के जीएस बिष्ट, आनंद सिंह आदि मौजूद थे।
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अल्मोड़ा। कार्यक्रम में मडुवा और मादिरा की मडाई और गहाई को सरल बनाने के लिए संस्थान द्वारा विकसित मडुवा, मादिरा थ्रैशर, हल, दनेला का प्रदर्शन भी किया गया। तकनीकी अधिकारी शिव सिंह ने विवेक मडुवा थ्रैशर से मडुवा की मडाई का प्रदर्शन किया। उन्होंने बताया कि थ्रैशर के उपयोग से काश्तकार मडुवा की मड़ाई आसानी से कम खर्च में कर सकते हैं। संस्थान के कार्मिकों ने मडुवा की नमकीन और सोयाबीन का पनीर बनाने की तकनीक का भी प्रदर्शन किया।