फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Almora News ›   Tiger, school, forest.

Almora News: बाघ की दहशत के बीच खुलेंगे स्कूल, बच्चों की सुरक्षा पर अभिभावकों में आक्रोश

Mon, 17 Aug 2026 12:45 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा Updated Mon, 17 Aug 2026 12:45 AM IST
विज्ञापन
Tiger, school, forest.
मौलेखाल(अल्मोड़ा)। सल्ट विकासखंड के तड़म, बौरड़ा और डभरा-सौराल क्षेत्र में लगातार बाघ के हमलों में कई लोग घायल हो गए। इसके बाद भी स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर वन विभाग की ओर से ठोस व्यवस्था नहीं की गई जिससे अभिभावकों में आक्रोश है। दहशत के चलते बंद विद्यालयों को अब दोबारा खोलने का निर्णय लिया गया है लेकिन बच्चों को बाघ की दहशत के बीच अपनी जिम्मेदारी पर स्कूल भेजना अभिभावकों की मजबूरी बन गया है। शिक्षकों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी हुई है।
विज्ञापन

तड़म क्षेत्र में बाघ की मौजूदगी को देखते हुए राजकीय प्राथमिक विद्यालय घजीरा, राजकीय जूनियर हाईस्कूल घजीरा और राजकीय प्राथमिक विद्यालय बौरड़ा को बंद कर दिया गया था। प्रभावित बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई कराने पर एसएमसी अध्यक्ष व अभिभावकों की सहमति बनी थी।
विज्ञापन

इन विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों को अन्य विद्यालयों में अटैच किया गया था। 15 अगस्त को भी संबंधित शिक्षकों ने अटैच विद्यालयों में उपस्थित होकर ध्वजारोहण किया। अब खंड शिक्षा अधिकारी की ओर से तड़म क्षेत्र के सभी विद्यालय खोलने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। सोमवार से सभी विद्यालय विधिवत समय पर खोले जाएंगे और शिक्षकों को भी अपनी जान जोखिम में डालकर विद्यालय आना पड़ेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

डभरा-सौराल में 18 अगस्त से खुलेंगे स्कूल

बाघ के हमले के बाद राजकीय प्राथमिक विद्यालय डभरा-सौराल और राजकीय आदर्श उच्च प्राथमिक विद्यालय डभरा-सौराल को 14 अगस्त तक बंद रखने का निर्णय लिया गया था। 14 अगस्त को अभिभावकों के साथ हुई बैठक में 18 अगस्त से दोनों विद्यालयों को खोलने का फैसला लिया गया।
अभिभावकों का कहना है कि विद्यालय लंबे समय तक बंद रहने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, लेकिन दूसरी ओर वन विभाग बच्चों को सुरक्षा देने में नाकाम साबित हुआ है। ऐसे में अब उन्हें बाघ की दहशत के बीच अपनी जिम्मेदारी पर बच्चों को विद्यालय लाने-ले जाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
अभिभावकों ने बताया कि तीन अगस्त को घोड़ीधार में हुई घटना के बाद वन विभाग ने बच्चों को सुरक्षित विद्यालय पहुंचाने और वापस घर छोड़ने की जिम्मेदारी लेने का आश्वासन दिया था लेकिन अब तक ठोस व्यवस्था नहीं की। चेतावनी दी कि भविष्य में यदि किसी बच्चे, अभिभावक या शिक्षक के साथ कोई अप्रिय घटना होती है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी वन विभाग की होगी।
ग्रामीणों का कहना है कि एक ओर वन विभाग बाघ की निगरानी और रेस्क्यू के लिए तमाम संसाधन लगाए जाने की बात कर रहा है, वहीं दूसरी ओर स्कूल जाने वाले छोटे बच्चों की सुरक्षा के लिए कोई प्रभावी व्यवस्था नजर नहीं आ रही है।
पलायन करने को मजबूर ग्रामीण -

घोड़ीधार की घटना को 13 दिन बीत जाने के बावजूद वन विभाग के हाथ खाली हैं, वन विभाग स्कूली बच्चों को सुरक्षा मुहैया नहीं कर पाया है, इधर बौरङा की घटना को भी लगभग साढ़े तीन महीने बीत चुके हैं जिस कारण भौनखाल इंटर कॉलेज जाने वाले सभी 18 बच्चे महीनों से घर में बैठे हैं, जिसका असर दिखाई देने लगा है अब ग्रामीणों ने गांव छोड़ना शुरू कर दिया है। बीते 13 दिनों में 3 परिवार गांव छोड़ शहरी क्षेत्रों में पलायन कर चुके हैं।

-


- 14 अगस्त को अभिभावकों के साथ विद्यालय में बैठक रखी गई थी, जिसमें 18 अगस्त से विद्यालय खोलने पर सहमति बनी है, अभिभावक अपनी जिम्मेदारी पर बच्चों को स्कूल छोड़ने और घर ले जाने की व्यवस्था करेंगे। भविष्य में किसी भी अप्रिय घटना की जिम्मेदारी वन विभाग की होगी। - रघुवर सिंह बिष्ट, प्रधानाध्यापक, राजकीय आदर्श उच्च प्राथमिक विद्यालय डभरा सौराल
- बच्चों और शिक्षकों की सुरक्षा के मद्देनजर विद्यालय बंद कर ऑनलाइन पढ़ाई कराने का निर्णय लिया गया था, इस दौरान सभी विद्यालय से संबंधित शिक्षक अन्य विद्यालयों में अटैक किए गए थे। उच्चाधिकारी के आदेशानुसार सोमवार से विद्यालय पुनः खोले जाएंगे। - डीके सती, प्रधानाध्यापक, राजकीय जूनियर हाईस्कूल, घजीरा
--

मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने को निगरानी बढ़ाई, 36 ट्रैप कैमरे और दो ड्रोन तैनात

मानव-वन्यजीव संघर्ष को देखते हुए वन विभाग ने तड़म, डभरा-सौराल और काठ की नाव क्षेत्र में निगरानी और रेस्क्यू अभियान तेज कर दिया है। संवेदनशील क्षेत्रों में 36 ट्रैप कैमरे, नौ पिंजरे और दो ड्रोन लगाए गए हैं। गश्ती टीमें लगातार बाघ और अन्य वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रख रही हैं। विभाग की ओर से रास्तों व पगडंडियों पर झाड़ी कटान के साथ छह एनफील्ड, सात फोकस लाइट समेत अन्य सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा है। गांवों में पोस्टर, लाउडस्पीकर और जनजागरूकता गोष्ठियों के माध्यम से ग्रामीणों को जागरूक किया जा रहा है। रेस्क्यू अभियान में कॉर्बेट की विशेषज्ञ टीम का भी सहयोग लिया जा रहा है।


कोट
स्कूली बच्चों को विद्यालय आने-जाने और उनकी सुरक्षा को लेकर शिक्षा विभाग के साथ पत्राचार किया जाएगा। अंतर विभागीय पत्राचार और सहमति के आधार पर ही अग्रिम निर्णय लिया जाएगा। हेमा कर्नाटक, वन क्षेत्राधिकारी, मोहान
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed