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अल्मोड़ा के मृग विहार को मिली मिनी चिड़ियाघर की मान्यता
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा।
Updated Tue, 16 Feb 2016 11:39 PM IST
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नगर के एनटीडी में स्थित मृग विहार को सेंटर जू अथॉरिटी (सीजेडए) ने मिनी चिड़ियाघर की मान्यता दे दी है। मिनी चिड़ियाघर में देश के अन्य चिड़ियाघरों से विभिन्न प्रजाति के जानवर लाए जाएंगे। वन विभाग की मिनी चिड़ियाघर से करीब तीन किमी दूर डानागोलू मंदिर तक ट्वाय ट्रेन भी चलेगी।
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ताकि यह क्षेत्र एक अच्छे पर्यटक स्थल के रूप में विकसित हो सके। विभाग ने चिड़ियाघर के सुदृढ़ीकरण के लिए 5.40 करोड़ का प्रस्ताव मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक के माध्यम से सेंटर जू अथॉरिटी को भेजा है।
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1980 में एनटीडी में करीब 36 हेक्टेयर क्षेत्र में मृग विहार स्थापित किया गया था। करीब दो हेक्टेयर क्षेत्र में बंदरबाड़ा बनाया गया है। अब मृग विहार के पास कुल 38 हेक्टेयर भूमि है। सिविल सोयम वन प्रभाग के अधीन मृग विहार में वर्तमान में यहां 90 चीतल और सांभर, आठ तेंदुए, एक-एक भालू, सफेद बंदर, काकड़ समेत कुल 105 जानवर हैं।
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विभाग इन जानवरों के भोजन के लिए बड़ी मुश्किल से बजट की व्यवस्था कर पाता है। हर साल तेंदुओं के भोजन के लिए 10 लाख, चीतल, सांभर और अन्य जानवरों के लिए 10 लाख और मृग विहार में काम करने वाले श्रमिकों की मजदूरी के लिए 10 लाख रुपये की जरूरत होती है पर शासन से विभाग को करीब 25 लाख रुपये ही मिल पाते हैं।
अब सीजेडए ने मृग विहार एनटीडी को मिनी चिड़ियाघर की मान्यता दे दी है और सीजेडए ही इसके लिए फंडिंग करेगा। सीजेडए के मानकों के मुताबिक ही मिनी चिड़ियाघर में जानवरों के लिए बाड़े बनाने के साथ ही अन्य कार्य किए जाएंगे। सिविल सोयम वन प्रभाग के डीएफओ आरसी शर्मा ने बताया कि सीजेडए से बजट मिलने के बाद काम शुरू होगा और अन्य चिड़ियाघरों से जानवर लाए जाएंगे।
मानकों के मुताबिक मिनी चिड़ियाघर में जो भी प्रजाति लाई जाएगी उसके छह-छह जानवर होने चाहिए। यहां चीतल और सांभर काफी अधिक संख्या में हैं। मिनी चिड़ियाघर बनने के बाद विभाग चीतल और सांभर अन्य चिड़ियाघरों से अदला-बदली कर अन्य जानवर यहां लाएगा।
डीएफओ आरसी शर्मा का कहना है कि यहां की जलवायु उच्च हिमालयी और मैदानी दोनों क्षेत्रों के जानवरों के लिए उपयुक्त है। टाइगर, कस्तूरी मृग, मोनाल जैसे जानवर के लिए जलवायु अच्छी है।
मृग विहार एनटीडी में हर साल करीब 40 हजार पर्यटक पहुंचते हैं। विभाग प्रति व्यक्ति 20 रुपये और बच्चों का 10 रुपये शुल्क वसूलता है। इससे करीब सात से आठ लाख रुपये प्रतिवर्ष आय होती है, जो कि शासन के खाते में जमा होती है। इस वर्ष दिसंबर तक करीब 40 हजार पर्यटक मृग विहार देखने पहुंचे हैं।