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सुअरों को बर्मिन प्रजाति घोषित करने का प्रस्ताव
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा।
Updated Fri, 19 Feb 2016 11:47 PM IST
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जंगली जानवर पर्वतीय कृषि के लिए अभिशाप बन गए हैं। सुअर, लंगूर और बंदरों के झुंड फसल जमने से पहले ही खोद कर चौपट कर दे रहे हैं। खासकर सुअर काश्तकारों की फसलों को बुरी तरह नुकसान पहुंचाते हैं। जिससे कई इलाकों में काश्तकारों ने खेती करना बंद कर दिया है।
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राज्य सरकार ने जंगली सुअरों को मारने के लिए लाइसेंस जारी करने का नियम बनाया है पर इससे भी खास फायदा नहीं मिल पाया है। अब वन विभाग ने कौआ, चमगादड़ और चूहे की तरह ही सुअर मारने को भी वन्य जीव अपराध श्रेणी से बाहर (बर्मिन प्रजाति) घोषित करने के लिए केंद्र को प्रस्ताव भेजा है।
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वन विभाग को इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलने का इंतजार है। पर्वतीय क्षेत्र में कई स्थानों पर जंगली सुअर फसलों को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं। सुअर एक ही रात में फसलों को बुरी तरह रौंद जाते हैं।
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सुअर और अन्य वन्य जंतुओं की डर से सोमेश्वर, धौलादेवी, लमगड़ा, हवालबाग, भैंसियाछाना समेत अन्य ब्लॉकों में गडेरी, आलू, प्याज आदि के साथ ही गेहूं, धान, मडुवा, मादिरा की फसलों के उत्पादन पर असर पड़ा है। जानवर जमाव के समय से ही फसलों को खोद कर नष्ट कर दे रहे हैं।
बीज लायक पैदावार नहीं मिल पाने से परेशान कई क्षेत्र के काश्तकारों का खेती से मोहभंग हो गया है। काश्तकार सुअर से छुटकारा दिलाने की मांग उठाते रहे हैं। राज्य सरकार ने जंगली सुअरों को मारने के लिए शिकारियों को लाइसेंस जारी करने का नियम बनाया है पर इससे भी खास फायदा नहीं हुआ है।
वन विभाग सुअरों को कौआ, चमगादड़ और चूहे को बर्मिन प्रजाति घोषित करने का पक्षधर है। अल्मोड़ा वन प्रभाग के उप प्रभागीय वनाधिकारी भूपेंद्र सिंह भोज ने बताया कि कौआ, चमगादड़ और चूहे (मुसक प्रजाति) की तरह ही सुअर को मारने के लिए भी वन्य जीव अपराध श्रेणी से बाहर (बर्मिन प्रजाति) घोषित करने के लिए राज्य वन्य जीव प्रतिपालक के माध्यम से बीते दिनों केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा गया है।
अगर इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो लोग आसानी से सुअरों को मार सकेंगे। उन्होंने बताया कि फिलहाल सुअरों को मारने के लिए शिकारियों को लाइसेंस जारी किए जाने का नियम है पर नाममात्र के लोग ही लाइसेंस ले रहे हैं।