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सरकार संवैधानिक संस्थाओं को समाप्त करना चाहती है: कुंजवाल
Thu, 26 Jun 2025 11:47 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
Updated Thu, 26 Jun 2025 11:47 PM IST
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अल्मोड़ा। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने कहा कि प्रदेश की भाजपा सरकार त्रिस्तरीय पंचायती चुनाव व्यवस्था को कमजोर करने पर तुली है। बीते पांच साल में क्षेत्र पंचायत की एक भी बैठक न कराकर सरकार संवैधानिक संस्थाओं को समाप्त करना चाहती है।
कुंजवाल ने कहा कि पूर्व में कांग्रेस की सरकार ने इन संस्थाओं को ठीक उसी तरह का संवैधानिक अधिकार दिया जैसा विधानसभा और लोकसभा को दिया गया है। संविधान की मंशा साफ है कि चुनी हुई ग्रामसभा, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायतें स्वतंत्र रूप से नियमों के तहत संचालित हों ताकि यह ग्रामीण क्षेत्रों का विकास और जनहित के कार्यों को अंजाम देते हुए ग्रामीणों की अर्थव्यवस्था के साथ ही लोकतंत्र को मजबूती देने में सहयोग कर सकें।
उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्य है कि सरकार समय पर चुनाव नहीं करा पा रही है। बीते पांच वर्षो में विकासखंड स्तर पर क्षेत्र पंचायत की पहली बैठक में चुने प्रमुख की मौजूदगी में कई प्रस्ताव पारित किए गए। उसके बाद पांच वर्ष तक एक भी बैठक न कर सके। सारे नियमों का उल्लंघन करते हुए पांच साल की कार्य योजना के लिए स्वीकृत धन का वितरण नियमों के तहत नहीं किया गया। जिन क्षेत्र पंचायत सदस्यों और ब्लाक प्रमुखों को चुना गया था उनके अधिकारों को सरकार के आदेशों पर जिला प्रशासन ने जिस तरह समाप्त करने का कार्य किया है, उससे स्पष्ट होता है कि इन संवैधानिक संस्थाओं को सरकार समाप्त करना चाहती है।
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कुंजवाल ने कहा कि पूर्व में कांग्रेस की सरकार ने इन संस्थाओं को ठीक उसी तरह का संवैधानिक अधिकार दिया जैसा विधानसभा और लोकसभा को दिया गया है। संविधान की मंशा साफ है कि चुनी हुई ग्रामसभा, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायतें स्वतंत्र रूप से नियमों के तहत संचालित हों ताकि यह ग्रामीण क्षेत्रों का विकास और जनहित के कार्यों को अंजाम देते हुए ग्रामीणों की अर्थव्यवस्था के साथ ही लोकतंत्र को मजबूती देने में सहयोग कर सकें।
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उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्य है कि सरकार समय पर चुनाव नहीं करा पा रही है। बीते पांच वर्षो में विकासखंड स्तर पर क्षेत्र पंचायत की पहली बैठक में चुने प्रमुख की मौजूदगी में कई प्रस्ताव पारित किए गए। उसके बाद पांच वर्ष तक एक भी बैठक न कर सके। सारे नियमों का उल्लंघन करते हुए पांच साल की कार्य योजना के लिए स्वीकृत धन का वितरण नियमों के तहत नहीं किया गया। जिन क्षेत्र पंचायत सदस्यों और ब्लाक प्रमुखों को चुना गया था उनके अधिकारों को सरकार के आदेशों पर जिला प्रशासन ने जिस तरह समाप्त करने का कार्य किया है, उससे स्पष्ट होता है कि इन संवैधानिक संस्थाओं को सरकार समाप्त करना चाहती है।
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